पश्चिम बंगाल में नई सरकार गठन, सुवेंदु अधिकारी 9 मई को शपथ लेने वाले हैं
पश्चिम बंगाल में विधानसभा दल की बैठक के बाद नई नेतृत्व व्यवस्था तय हो जाती है और सुवेंदु अधिकारी अगले मुख्यमंत्री के रूप में उभरते हैं। 9 मई को कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शपथ ग्रहण समारोह होना है, जबकि नई सरकार में दो उपमुख्यमंत्रियों को भी शामिल किया जाता है।
हाइलाइट्स
- सुवेंदु अधिकारी 9 मई को ब्रिगेड परेड ग्राउंड, कोलकाता में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे, दो उपमुख्यमंत्री भी सरकार में शामिल होंगे।
- शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति इस परिवर्तन को राष्ट्रीय राजनीति में महत्व देती है।
- चुनाव आयोग के अनुसार, सुवेंदु अधिकारी ने भवानीपुर में 15,000 से अधिक मतों से जीत दर्ज कर राज्य में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत की।
नेतृत्व व्यवस्था और शपथ ग्रहण की तैयारी
FinancialExpress.com के अनुसार, पश्चिम Bengal में नई सरकार के नेतृत्व पर फैसला विधानसभा दल की बैठक के बाद किया जाता है और औपचारिक घोषणा अमित शाह करते हैं। इस व्यवस्था के तहत सुवेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री पद संभालने वाले हैं, जबकि सरकार की संरचना में दो उपमुख्यमंत्री भी शामिल किए जाते हैं।
शपथ ग्रहण समारोह 9 मई को कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में निर्धारित है। कार्यक्रम में NDA के वरिष्ठ नेताओं, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शामिल हैं, के पहुंचने की उम्मीद है, जिससे इस राजनीतिक परिवर्तन का राष्ट्रीय महत्व भी रेखांकित होता है।
चुनावी बढ़त और राज्य की राजनीतिक दिशा
अधिकारी का उभार राज्य की सत्ता संरचना में बड़े बदलाव के रूप में देखा जाता है, क्योंकि मजबूत चुनावी प्रदर्शन के बाद वह नई सरकार के केंद्रीय चेहरे के रूप में स्थापित होते हैं। नंदीग्राम में 2021 की जीत से उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलती है और बाद में भवानीपुर में सफलता उनकी स्थिति को और मजबूत करती है।चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, भवानीपुर में उनकी जीत 15,000 से अधिक मतों के अंतर से होती है। पार्टी के भीतर उन्हें पहले से ही क्षेत्रीय विस्तार की रणनीति बनाने वाले प्रमुख नेताओं में माना जाता है, और जमीनी पहुंच बढ़ाने तथा विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता आधार मजबूत करने की उनकी कोशिशें अब राज्य की नई राजनीतिक पारी का आधार बनती हैं।
हमारी पिछली रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल विधानसभा भंग किए जाने और नई सरकार के गठन की संवैधानिक प्रक्रिया पर चर्चा की गई थी, जिसमें भाजपा विधायक दल की बैठक के जरिए नेतृत्व तय होने की रूपरेखा भी बताई गई थी। उसी संदर्भ में हमने चुनाव नतीजों के बाद बने राजनीतिक तनाव, ममता बनर्जी के इस्तीफा न देने के संकेत और आगे की संभावित संवैधानिक स्थितियों (राज्यपाल की भूमिका सहित) पर भी रोशनी डाली थी।
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