तमिलनाडु में VCK समर्थन पर TVK की सरकार गठन कोशिश टिकी

तमिलनाडु में VCK समर्थन पर TVK की सरकार गठन कोशिश टिकी
सरकार VCK समर्थन पर निर्भर

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में Tamilaga Vettri Kazhagam सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरती है, लेकिन बहुमत से पीछे रहने के कारण सरकार गठन की उसकी कोशिश अब सहयोगी दलों के समर्थन पर निर्भर है। इसी समीकरण में Viduthalai Chiruthaigal Katchi के दो विधायक निर्णायक बनते हैं, जिससे पार्टी प्रमुख Thol Thirumavalavan राज्य की नई सत्ता संरचना में अहम भूमिका में आते हैं।

हाइलाइट्स

  • TVK 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन बहुमत के लिए उसे CPI, CPI-M और VCK से समर्थन जुटाना जरूरी है।
  • Vijay की सीट रिक्त होने के बाद TVK के पास 116 विधायक रह जाते हैं, जिससे सरकार गठन में VCK के दो विधायकों का समर्थन निर्णायक है।
  • VCK अध्यक्ष Thirumavalavan का फैसला तमिलनाडु में सत्ता संतुलन, गठबंधन समीकरण और निवेश माहौल की स्थिरता पर सीधा असर डाल सकता है।

गठबंधन गणित और समर्थन की समयसीमा

Financial Express के अनुसार, 234 सदस्यीय विधानसभा में TVK 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है, जबकि बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत है। कांग्रेस ने पांच सीटों के साथ सशर्त समर्थन दिया है, लेकिन इसके बाद भी संख्या पूरी नहीं होती, जिससे TVK ने CPI, CPI-M और VCK से समर्थन जुटाने की कोशिश तेज की है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि Vijay की सीट रिक्त होने के बाद TVK के पास रिकॉर्ड पर 116 विधायक ही रह जाते हैं, जिससे शपथ ग्रहण की प्रक्रिया अनिश्चितता में पड़ती है। इसी कारण VCK के दो विधायकों का समर्थन सरकार गठन के लिए केंद्रीय महत्व हासिल करता है, जबकि Thirumavalavan औपचारिक प्रतिबद्धता से पहले TVK, AIADMK और DMK नेताओं के साथ बातचीत करते हैं।

Thirumavalavan कहते हैं कि उनकी पार्टी की उच्चस्तरीय समिति शाम को बैठक कर मौजूदा राजनीतिक स्थिति और TVK के समर्थन अनुरोध पर फैसला करेगी। वह यह भी रेखांकित करते हैं कि VCK अभी DMK गठबंधन के साथ है, इसलिए आगे की रणनीति में पुराने गठबंधन संबंध और मौजूदा सत्ता समीकरण, दोनों पर विचार होता है।

VCK की भूमिका और तमिलनाडु की राजनीतिक दिशा

Thol Thirumavalavan VCK के अध्यक्ष और प्रमुख चेहरा हैं तथा 1990 से पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं। चेन्नई के वकील और Chidambaram से लोकसभा सांसद के रूप में वह दलित अधिकारों और सामाजिक न्याय की राजनीति से अपनी पहचान बनाते हैं, जिससे उनकी पार्टी का समर्थन केवल संख्यात्मक नहीं बल्कि राजनीतिक संदेश का भी वाहक बनता है.

वह राज्यपाल Rajendra Arlekar के रुख की आलोचना करते हुए कहते हैं कि राज्यपाल को इस तरह व्यवहार नहीं करना चाहिए। TVK के बहुमत प्रमाण को लेकर पैदा हुई देरी के बीच VCK का रुख तमिलनाडु में DMK और AIADMK के लंबे प्रभुत्व से अलग नई राजनीतिक संरचना की दिशा तय कर सकता है, जबकि उद्योग और निवेश माहौल के लिए स्थिर सरकार का सवाल भी प्रमुख बना रहता है।

तमिलनाडु में त्रिशंकु विधानसभा के बाद TVK के बहुमत जुटाने की चुनौती पर हमारी पिछली रिपोर्ट में बताया गया था कि 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद उसे सरकार बनाने के लिए 118 के आंकड़े तक पहुंचने हेतु छोटे दलों के समर्थन पर निर्भर रहना पड़ रहा है। उस लेख में CPI, CPI(M) और VCK जैसे दलों की निर्णायक भूमिका, कांग्रेस के सशर्त समर्थन के बाद भी बची कमी, और राज्यपाल के बहुमत परीक्षण को लेकर रुख से पैदा हुई अनिश्चितता पर भी चर्चा की गई थी।

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