तमिलनाडु की वित्तीय स्थिति पर दबाव, विजय ने श्वेत पत्र की तैयारी की
तमिलनाडु में नई सरकार के गठन के तुरंत बाद राज्य के कर्ज, कल्याणकारी खर्च और राजकोषीय क्षमता पर बहस फिर तेज हो रही है। विजय ने राज्य पर लगभग 10 लाख करोड़ रुपये के कर्ज का मुद्दा उठाते हुए वित्त पर श्वेत पत्र लाने की बात कही है, जबकि उनकी नई मुफ्त बिजली योजना भी बजट पर अतिरिक्त बोझ डालने वाली है।
हाइलाइट्स
- भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार FY25 के अंत तक तमिलनाडु की बकाया देनदारियां 9.56 लाख करोड़ रुपये होंगी, जो देश में सबसे अधिक हैं।
- तमिलनाडु सरकार FY26 में वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान पर अपनी राजस्व प्राप्तियों का लगभग 62% खर्च करने की योजना बना रही है।
- 2025-26 में सब्सिडी का प्रावधान 72,000 करोड़ रुपये से अधिक है और सभी नए कल्याणकारी वादों की कुल लागत वार्षिक 1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
कर्ज बोझ और श्वेत पत्र की पृष्ठभूमि
Financial Express की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के कुछ दिन बाद विजय ने कहा कि उनकी सरकार जल्द ही राज्य की वित्तीय स्थिति पर श्वेत पत्र जारी करेगी और आरोप लगाया कि पिछली DMK सरकार ने खजाने पर गंभीर दबाव छोड़ा है। इसी के साथ उन्होंने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए हर दो महीने में 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने का वादा भी आगे बढ़ाया, जिसकी वार्षिक लागत राज्य ऊर्जा विभाग के अनुसार लगभग 1,730 करोड़ रुपये रहने की उम्मीद है।
इस पर पूर्व मुख्यमंत्री M K Stalin ने तीखी प्रतिक्रिया दी और यह दावा खारिज किया कि DMK ने राज्य का खजाना खाली छोड़ा। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि सरकार चलाने की व्यावहारिक बारीकियां सत्ता में आने के बाद ही समझ में आती हैं।
तमिलनाडु की वित्तीय स्थिति कई वर्षों से बहस का विषय रही है। 2021 में DMK के सत्ता में आने के बाद तत्कालीन वित्त मंत्री P Thiaga Rajan ने भी एक श्वेत पत्र जारी कर वित्तीय हालत को गंभीर बताया था और कहा था कि एक दशक के शासन के बाद कोई सुरक्षा कवच नहीं बचा था।
भारतीय रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़े दिखाते हैं कि FY25 के अंत तक तमिलनाडु की बकाया देनदारियां 9.56 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचती हैं, जो भारतीय राज्यों में सबसे अधिक हैं। इसके बावजूद राज्य देश की तेज वृद्धि वाली अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है और अर्थशास्त्री मानते हैं कि तेज वृद्धि कर्ज चुकाने की क्षमता को सहारा देती है।
कल्याणकारी वादों से बढ़ सकता है राजकोषीय दबाव
राज्य के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में बंधी हुई व्यय प्रतिबद्धताएं हैं, जिनमें वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान जैसे खर्च शामिल हैं और जिन्हें हर साल चुकाना ही होता है। PRS Legislative Research की 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, तमिलनाडु FY26 में अपने राजस्व प्राप्तियों का करीब 62% वेतन, पेंशन और ब्याज पर खर्च करने की योजना बनाता है, जिससे स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे विकास क्षेत्रों के लिए गुंजाइश कम बचती है।सब्सिडी का दबाव भी पहले से ही भारी है। 2025-26 में तमिलनाडु ने 72,000 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी का प्रावधान किया है, जबकि पूंजीगत व्यय लक्ष्य अपेक्षाकृत कमजोर बताए गए हैं। विजय के घोषणापत्र में महिला मुखियाओं के लिए मासिक सहायता, मुफ्त LPG सिलेंडर और स्नातकों के लिए बेरोजगारी सहायता जैसे वादे शामिल हैं, और विभिन्न आकलनों के अनुसार इन सभी को लागू करने पर वार्षिक कल्याणकारी खर्च करीब 1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
आबादी की उम्रदराज होती संरचना भी आने वाले वर्षों में दबाव बढ़ा सकती है। RBI ने अनुमान जताया है कि तमिलनाडु जल्द ही ऐसे राज्यों की श्रेणी में जा सकता है जहां 60 वर्ष से ऊपर की आबादी 15% से अधिक होती है, और इससे सामाजिक क्षेत्र पर खर्च की बाध्यताएं बढ़ेंगी। यही वजह है कि राज्य की वित्तीय स्थिरता अब केवल कर्ज के आकार का नहीं, बल्कि वृद्धि, कल्याण और दीर्घकालिक राजकोषीय योजना के संतुलन का सवाल बनती है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में TVK सरकार के गठन और विजय के मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण पर फोकस था, जिसमें 108 सीटों के साथ पार्टी के उभार और सहयोगी दलों के समर्थन से बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने का विवरण दिया गया था। उस लेख में यह भी बताया गया था कि नई सरकार को 13 मई तक विधानसभा में बहुमत साबित करना है और DMK-AIADMK के लंबे प्रभुत्व के बाद राज्य की राजनीति में नेतृत्व के बदलाव का संकेत मिला है।
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