मोदी की पांच देशों की यात्रा, ऊर्जा, रक्षा और प्रौद्योगिकी सहयोग पर फोकस
पश्चिम एशिया में युद्ध और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बढ़ी अनिश्चितता के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 मई से छह दिन की पांच देशों की यात्रा पर निकल रहे हैं। यात्रा में UAE, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली शामिल हैं, जहां वार्ता का केंद्र ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, निवेश, रक्षा और उभरती प्रौद्योगिकियां रहने वाली हैं।
हाइलाइट्स
- 15 मई को UAE में प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान से ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षा और क्षेत्रीय तनाव पर चर्चा करेंगे।
- भारत और स्वीडन के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2025 में 7.75 अरब डॉलर तक पहुंचा, स्वीडिश FDI 2000-2025 में 2.825 अरब डॉलर रहा।
- मोदी 19 मई को इटली में प्रधानमंत्री Giorgia Meloni और राष्ट्रपति Sergio Mattarella से मिलेंगे, यात्रा के दौरान रक्षा और प्रौद्योगिकी सहयोग पर प्रमुख बल रहेगा।
यात्रा का कार्यक्रम और प्रमुख वार्ताएं
विदेश मंत्रालय के अनुसार, दौरे की शुरुआत 15 मई को UAE में एक संक्षिप्त ठहराव से होती है, जहां मोदी राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान के साथ बैठक करने वाले हैं। मंत्रालय ने कहा है कि बातचीत में द्विपक्षीय संबंधों, ऊर्जा सहयोग और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा होने वाली है, ऐसे समय में जब ईरान युद्ध और होरमुज जलडमरूमध्य के बंद होने से भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है।भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा UAE से पूरा करता है, इसलिए प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति को सुरक्षित रखने के उपाय चर्चा का अहम हिस्सा रहने की संभावना है। यह यात्रा फुजैराह के एक पेट्रोलियम परिसर पर हमले और पश्चिम एशिया में बढ़ी शत्रुता की पृष्ठभूमि में भी हो रही है।
इसके बाद मोदी 15 से 17 मई तक नीदरलैंड में रहने वाले हैं, जहां प्रधानमंत्री Rob Jetten के निमंत्रण पर द्विपक्षीय वार्ता और अन्य कार्यक्रम तय हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Sibi George ने कहा कि मोदी वहां प्रधानमंत्री के साथ बातचीत करेंगे, King Willem-Alexander और Queen Maxima से मुलाकात करेंगे, भारतीय समुदाय को संबोधित करेंगे और नीदरलैंड के शीर्ष कारोबारियों से भी मिलेंगे।
17 मई को मोदी स्वीडन के गोथेनबर्ग पहुंचने वाले हैं, जहां प्रधानमंत्री Ulf Kristersson के साथ वार्ता में द्विपक्षीय व्यापार, हरित परिवर्तन, AI, उभरती प्रौद्योगिकियां, स्टार्टअप, लचीली आपूर्ति शृंखलाएं, रक्षा, अंतरिक्ष और जलवायु सहयोग पर जोर रहने वाला है। भारत और स्वीडन के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2025 में 7.75 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है, जबकि 2000 से 2025 के बीच भारत में स्वीडिश FDI 2.825 अरब डॉलर रहा है।
मोदी और Kristersson, European Commission की अध्यक्ष Ursula von der Leyen के साथ European Round Table for Industry को भी संबोधित करने वाले हैं। इसके बाद प्रधानमंत्री 18 मई को नॉर्वे पहुंचेंगे, जहां वह प्रधानमंत्री Jonas Gahr Store के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे, King Harald V और Queen Sonja से मिलेंगे और India-Norway Business and Research Summit को संबोधित करेंगे।
ओस्लो में 19 मई 2026 को तीसरा India-Nordic Summit होने वाला है, जिसमें डेनमार्क, फिनलैंड और आइसलैंड के नेता भी शामिल होने वाले हैं। दौरे का अंतिम चरण 19 मई को इटली में होगा, जहां मोदी प्रधानमंत्री Giorgia Meloni और राष्ट्रपति Sergio Mattarella से मुलाकात करने वाले हैं।
हमारी पिछली रिपोर्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यूएई से शुरू होने वाले 15–20 मई के पांच देशों के दौरे की पृष्ठभूमि और एजेंडा पर फोकस किया गया था, जहां ऊंची ऊर्जा कीमतें और पश्चिम एशिया की अनिश्चितता के बीच ऊर्जा सुरक्षा, निवेश और रणनीतिक साझेदारी प्रमुख मुद्दे थे। उस लेख में यूएई नेतृत्व के साथ बातचीत में OPEC पाइपलाइनों, एलपीजी तथा Strategic Petroleum Reserves से जुड़े संभावित समझौता ज्ञापनों और यूरोपीय चरण में व्यापार-निवेश व हरित प्रौद्योगिकी सहयोग (साथ ही भारत-ईयू FTA चर्चा) के आर्थिक महत्व को रेखांकित किया गया था।
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