भारत BRICS एजेंडा को बहुपक्षवाद और आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन पर आगे बढ़ाता है
भारत विस्तारित BRICS की 2026 अध्यक्षता संभालते हुए उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच समन्वय बढ़ाने और नए वैश्विक ढांचे में सेतु-निर्माता की भूमिका मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। नई दिल्ली में 14 और 15 मई को हो रही मंत्रिस्तरीय बैठक आगामी BRICS नेताओं के शिखर सम्मेलन की दिशा तय करने के साथ आर्थिक सहयोग, क्षेत्रीय सुरक्षा और विकास संबंधी प्राथमिकताओं पर भी केंद्रित है।
हाइलाइट्स
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS विदेश मंत्रियों से बहुपक्षवाद, सतत विकास, और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन बढ़ाने पर सहयोग का आग्रह किया।
- विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पश्चिम एशिया संकट, ऊर्जा आपूर्ति दबाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री जोखिम को लेकर BRICS में व्यावहारिक समाधान की आवश्यकता पर बल दिया।
- ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araqchi ने BRICS देशों से United States और Israel द्वारा अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघनों की कड़ी निंदा करने की अपील की, सुरक्षा और ऊर्जा जोखिम चर्चा में केंद्रित रहे।
नई दिल्ली बैठक में भारत की प्राथमिकताएं
Prime Minister’s Office के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को BRICS देशों के विदेश मंत्रियों और प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों से मुलाकात में कहा कि यह समूह विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण मंच बन गया है। उन्होंने कहा कि भारत अपनी अध्यक्षता के दौरान बहुपक्षवाद को मजबूत करने, सतत विकास को बढ़ावा देने, आर्थिक लचीलापन बढ़ाने और अधिक समावेशी विश्व व्यवस्था के निर्माण पर साथ मिलकर काम करेगा।भारत इस वर्ष “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” थीम के तहत समूह का नेतृत्व कर रहा है। 10 सदस्यीय विस्तारित BRICS गठजोड़ की यह पहली बड़ी मंत्रिस्तरीय बैठक है, और भारत ने 1 जनवरी को ब्राजील से अध्यक्षता संभाली थी। यह चौथी बार है जब भारत समूह का नेतृत्व कर रहा है, इससे पहले वह 2012, 2016 और 2021 में शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर चुका है।
प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी विदेश मंत्री Sergei Lavrov से अलग बैठक में यूक्रेन और पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी चर्चा की। उन्होंने संवाद और शांतिपूर्ण समाधान के पक्ष में भारत की लगातार नीति दोहराई, जबकि Lavrov ने दिसंबर 2025 में हुए 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के बाद द्विपक्षीय सहयोग की प्रगति की जानकारी दी।
ऊर्जा, समुद्री मार्ग और भू-राजनीतिक जोखिम
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने BRICS बैठक में पश्चिम एशिया संकट के बढ़ते असर, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात के जोखिम को लेकर चिंता जताई। उन्होंने सदस्य देशों से अभूतपूर्व भू-राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितता, साथ ही एकतरफा दबावपूर्ण प्रतिबंधों से निपटने के व्यावहारिक तरीके विकसित करने का आग्रह किया।जयशंकर ने कहा कि संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान अंतरराष्ट्रीय संबंधों की बुनियाद बना रहना चाहिए, और संघर्षों के समाधान के लिए संवाद तथा कूटनीति ही टिकाऊ रास्ता हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि शांति को खंडों में नहीं देखा जा सकता, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन, नागरिकों की सुरक्षा और सार्वजनिक अवसंरचना को निशाना बनाने से परहेज जरूरी है।
बैठक में ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araqchi ने BRICS देशों से United States और Israel द्वारा अंतरराष्ट्रीय कानून के कथित उल्लंघनों की स्पष्ट निंदा करने का आग्रह किया। Reuters के हवाले से उनके बयान में पश्चिमी वर्चस्व का विरोध करने और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अधिक कठोर रुख अपनाने की अपील भी शामिल है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भारत की अध्यक्षता वाले इस मंच पर आर्थिक सहयोग के साथ सुरक्षा और ऊर्जा जोखिम भी प्रमुख एजेंडा बने हुए हैं।
हमारी पिछली रिपोर्ट में नई दिल्ली में BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक पर पश्चिम एशिया युद्ध के साए और होरमुज जलडमरूमध्य में संभावित व्यवधान के बीच बढ़ते कूटनीतिक दबावों को रेखांकित किया गया था। इसमें बताया गया था कि ईरान औपचारिक निंदा की मांग कर रहा है, जबकि भारत को ऊर्जा सुरक्षा और खाड़ी भागीदारों के हितों के साथ संतुलन साधना पड़ रहा है। हमने यह भी संकेत दिया था कि आपूर्ति अनिश्चितता और बढ़ती कीमतें भारत जैसे बड़े आयातकों के लिए जोखिम बढ़ा सकती हैं।
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