PhysicsWallah ने कम-कीमत कोचिंग मॉडल से भारत के एडटेक बाजार में विस्तार किया

PhysicsWallah ने कम-कीमत कोचिंग मॉडल से भारत के एडटेक बाजार में विस्तार किया
PhysicsWallah का अनोखा विस्तार

भारत के एडटेक क्षेत्र में फंडिंग उछाल के बाद कई कंपनियों पर लाभप्रदता का दबाव बढ़ रहा है, वहीं PhysicsWallah ने सस्ती, संरचित तैयारी के जरिए छोटे शहरों और कस्बों के छात्रों तक पहुंच बनाकर अलग रास्ता बनाया है। कंपनी का मॉडल ऊंचे मार्जिन के बजाय बड़े छात्र आधार पर टिका है, और इसी रणनीति ने उसे ऑनलाइन सामग्री, ऑफलाइन केंद्रों और हालिया IPO के बाद भी क्षेत्र में अलग पहचान दी है।

हाइलाइट्स

  • PhysicsWallah ने 2020 में JEE के लिए 999 रुपये में पहला पेड बैच लांच किया, 10 दिनों में 50,000 से अधिक छात्रों ने नामांकन किया।
  • IPO नवंबर में 109 रुपये प्रति शेयर पर आया, 145 रुपये पर सूचीबद्ध हुआ और उच्च स्तर 162 रुपये छूने के बाद 106-109 रुपये दायरे में स्थिर हुआ।
  • FY25 में ऑनलाइन का औसत राजस्व प्रति उपयोगकर्ता 3,682 रुपये और ऑफलाइन केंद्रों का औसत 40,405 रुपये है, जबकि कंपनी हाइब्रिड मॉडल और नए सेगमेंट्स में विस्तार कर रही है।

कम कीमत, बड़े पैमाने का विस्तार

Forbes India के अनुसार, PhysicsWallah की शुरुआत एक YouTube चैनल के रूप में हुई थी, जहां Alakh Pandey 2016 से उन छात्रों के लिए मुफ्त वीडियो डालते थे जो महंगी कोचिंग नहीं ले सकते थे। 2020 में Covid-19 महामारी के दौरान ऑनलाइन शिक्षा की मांग तेज हुई तो Pandey और PenPencil के संस्थापक Prateek Boob ने मिलकर इसे औपचारिक कंपनी में बदला और भुगतान वाले पाठ्यक्रम शुरू किए।

कंपनी का पहला पेड बैच, Lakshya, 2020 में JEE अभ्यर्थियों के लिए 999 रुपये में शुरू हुआ और 10 दिनों में 50,000 से अधिक छात्रों ने नामांकन किया। इसके बाद JEE और NEET के लिए 3,999 रुपये से 4,999 रुपये के बीच के कोर्स लाए गए, जो पारंपरिक ऑफलाइन कोचिंग संस्थानों की 50,000 रुपये से 1.5 लाख रुपये से अधिक फीस की तुलना में काफी सस्ते रहे।

PhysicsWallah ने अपने उत्पाद को ऑफलाइन कोचिंग की तरह तय समय की कक्षाओं, होमवर्क, टेस्ट और डाउट-सॉल्विंग के साथ बनाया, लेकिन कीमत को कम रखा। कंपनी का तर्क यह है कि टियर II और III बाजारों के बड़े हिस्से के छात्र तभी औपचारिक तैयारी तंत्र में आएंगे जब सीखने की लागत परीक्षा फॉर्म भरने की लागत के करीब पहुंचे।

विश्लेषकों के मुताबिक, इस मॉडल का एक बड़ा लाभ कम ग्राहक अधिग्रहण लागत है, क्योंकि कंपनी ने पहले मुफ्त दर्शक वर्ग बनाया और बाद में उसी आधार के एक हिस्से को पेड कोर्स, टेस्ट सीरीज और अन्य कार्यक्रमों में बदला। कंपनी ने शुरुआती वर्षों में कई श्रेणियों में आक्रामक विस्तार करने के बजाय K-12 और परीक्षा तैयारी पर ध्यान रखा, फिर 2023 से 2025 के बीच अपनी श्रेणियां बढ़ाकर राज्य बोर्ड, कॉमर्स और सरकारी परीक्षाओं तक पहुंच बनाई।

हाइब्रिड रणनीति और एडटेक पर असर

नवंबर में आए कंपनी के IPO ने न केवल PhysicsWallah बल्कि व्यापक एडटेक क्षेत्र के लिए भी संकेत दिया कि इस क्षेत्र में निवेशकों की रुचि पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। IPO 109 रुपये प्रति शेयर पर मूल्यांकित हुआ, 145 रुपये पर सूचीबद्ध हुआ और बाद में लगभग 162 रुपये के उच्च स्तर तक पहुंचने के बाद 106 रुपये से 109 रुपये के दायरे में आ गया।

यह प्रदर्शन ऐसे समय में आया है जब 2021 के फंडिंग उछाल के बाद कई एडटेक कंपनियों के मॉडल दबाव में आए। Tracxn की सह-संस्थापक Neha Singh ने PhysicsWallah को इस क्षेत्र की मुश्किल अवधि में एक दुर्लभ सकारात्मक उदाहरण बताया है, जबकि Lightspeed India के Dev Khare के अनुसार कंपनी ने पूंजी-गहन बिक्री मॉडल के बजाय मुफ्त सामग्री और ब्रांड जुड़ाव पर आधारित वितरण रणनीति अपनाई।

अब कंपनी का 93 प्रतिशत छात्र आधार अभी भी ऑनलाइन है, जहां FY25 में औसत राजस्व प्रति उपयोगकर्ता लगभग 3,682 रुपये रहा। दूसरी ओर, ऑफलाइन केंद्र प्रति छात्र अधिक राजस्व देते हैं, जहां औसत 40,405 रुपये है, लेकिन इनके साथ परिचालन लागत और फैकल्टी प्रबंधन का दबाव भी बढ़ता है।

PhysicsWallah का हाइब्रिड मॉडल कक्षाओं में टचस्क्रीन, लाइव चैट, रिकॉर्डेड लेक्चर, क्विज और प्रदर्शन डैशबोर्ड जैसे उपकरणों का उपयोग करता है ताकि ऑनलाइन और ऑफलाइन छात्रों को साथ जोड़ा जा सके। कंपनी का कहना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता सीखने की प्रगति को समझने और शिक्षण को अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगी, लेकिन शिक्षक केंद्र में बने रहेंगे।

आगे कंपनी कॉमर्स, सरकारी परीक्षाओं, स्किल डेवलपमेंट और छात्र आवास जैसे नए क्षेत्रों में विस्तार कर रही है। इसके साथ ही, बाजार के सामने मुख्य सवाल यह है कि क्या एक शिक्षक-प्रधान और ब्रांड-निर्भर मॉडल अपनी प्रामाणिकता बनाए रखते हुए बड़े पैमाने पर टिकाऊ ढंग से बढ़ सकता है।

भारत में युवा महिलाओं की बेरोजगारी दर में अप्रैल के PLFS आंकड़ों के आधार पर बढ़ते दबाव पर हम पहले लिख चुके हैं। उस रिपोर्ट में बताया गया था कि 15–29 आयु वर्ग में युवा महिलाओं की बेरोजगारी 18.7% तक पहुंची, शहरी क्षेत्रों में यह 24.5% रही, और श्रम बल भागीदारी दर 41.2% पर फिसल गई। साथ ही, कौशल असंगति और automation/AI के बढ़ते उपयोग को रोजगार अवसरों पर दबाव बढ़ाने वाले कारकों के रूप में रेखांकित किया गया था।

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