MOSPI नई IIP श्रृंखला में दुर्लभ खनिजों और नवीकरणीय ऊर्जा ट्रैकिंग जोड़ता है

MOSPI नई IIP श्रृंखला में दुर्लभ खनिजों और नवीकरणीय ऊर्जा ट्रैकिंग जोड़ता है
IIP में नई ऊर्जा ट्रैकिंग

भारत के औद्योगिक उत्पादन मापन ढांचे में 1 जून 2026 से बड़ा बदलाव लागू होता है, जब सूचकांक का नया आधार वर्ष 2022-23 के साथ नई IIP श्रृंखला जारी होती है। यह संशोधन 1,042 उत्पादों और नए अवसंरचना व ऊर्जा खंडों को शामिल कर व्यापक मैक्रोइकॉनॉमिक आंकड़ों के बीच बेहतर संगति लाने का लक्ष्य रखता है।

हाइलाइट्स

  • MOSPI की नई IIP श्रृंखला 1 जून 2026 से लागू होगी और इसका आधार वर्ष 2022-23 होगा, जिसमें दुर्लभ खनिज, नवीकरणीय ऊर्जा, गैस, जल आपूर्ति और अपशिष्ट प्रबंधन को पहली बार शामिल किया गया है।
  • नई श्रृंखला में 463 आइटम ग्रुप्स के तहत 1,042 उत्पाद ट्रैक होंगे, जो पहले के 407 ग्रुप्स और 839 उत्पादों की तुलना में अधिक व्यापक दायरा प्रदान करती है।
  • शहरी अवसंरचना क्षेत्रों की कवरेज और बंद इकाइयों को प्रतिस्थापित करने की औपचारिक व्यवस्था डेटा गुणवत्ता को सुधारती है, जबकि चेन-लिंक्ड इंडेक्स भविष्य में अंतरराष्ट्रीय तुलना के लिए प्रस्तावित है।

नई श्रृंखला का दायरा और समयरेखा

Forbes India के अनुसार, सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय, MOSPI, द्वारा जारी तकनीकी सलाहकार समिति, TAC-IIP, की रिपोर्ट बताती है कि नई IIP श्रृंखला पहली बार दुर्लभ खनिज, नवीकरणीय ऊर्जा, गैस आपूर्ति, जल आपूर्ति और अपशिष्ट प्रबंधन क्षेत्रों के उत्पादन को ट्रैक करती है। नई श्रृंखला 1 जून 2026 से जारी होती है और IIP का आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर देती है।

नई संरचना में 463 आइटम समूहों के तहत 1,042 उत्पाद शामिल हैं, जबकि पिछली श्रृंखला में 407 आइटम समूहों में 839 उत्पाद थे। यह बदलाव नई GDP, खुदरा मुद्रास्फीति और थोक मुद्रास्फीति श्रृंखलाओं में प्रयुक्त आधार वर्ष के साथ तालमेल बैठाता है, जिससे भारत के मैक्रोइकॉनॉमिक डेटा में अधिक स्थिरता लाने का प्रयास होता है।

संशोधन भारत के औद्योगिक परिदृश्य में पिछले पुनरीक्षण के बाद आए बदलावों को भी दर्शाता है। इलेक्ट्रिक वाहनों, रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स और स्वच्छ ऊर्जा उपकरणों के लिए अहम दुर्लभ खनिज अब खनन उप-सूचकांक में शामिल होते हैं, जबकि निर्माण और अवसंरचना से जुड़े लघु खनिज भी जोड़े जाते हैं।

शहरी अवसंरचना और डेटा गुणवत्ता पर असर

ऊर्जा खंड में नई श्रृंखला नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय स्रोतों से उत्पन्न बिजली को अलग-अलग ट्रैक करती है। इसके साथ जल आपूर्ति, सीवरेज और अपशिष्ट प्रबंधन जैसे क्षेत्र भी शामिल किए जाते हैं, जो AMRUT जैसे शहरी अवसंरचना कार्यक्रमों के लिए केंद्रीय महत्व रखते हैं।

इन संकेतकों को 500 शहरों में नल कनेक्शन और सीवेज नेटवर्क कवरेज जैसे मापनीय प्रॉक्सी के जरिए ट्रैक किया जाता है। इससे औद्योगिक गतिविधि के आकलन में उन सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं को भी जगह मिलती है जो शहरी विस्तार और बुनियादी ढांचे के निवेश से सीधे जुड़ी हैं।

इस पुनर्गठन में बंद हो चुकी फैक्ट्रियों या उत्पादन लाइन बदलने वाली इकाइयों को प्रतिस्थापित करने की औपचारिक व्यवस्था भी शामिल है, जिससे लंबे समय से बनी डेटा गुणवत्ता की कमी को संबोधित किया जाता है। समिति भविष्य में समानांतर ढांचे के रूप में चेन-लिंक्ड इंडेक्स की भी सिफारिश करती है, जिसे अंतरराष्ट्रीय तुलना के लिहाज से अधिक उपयुक्त माना जाता है।

हमारी पिछली रिपोर्ट में अप्रैल में भारत के आठ प्रमुख बुनियादी (कोर) क्षेत्रों की वृद्धि 1.7% रहने और लगातार दूसरे महीने 2% से नीचे बने रहने की तस्वीर सामने आई थी। रिपोर्ट में बताया गया था कि इस्पात, सीमेंट और बिजली उत्पादन ने कुछ सहारा दिया, लेकिन कोयला, प्राकृतिक गैस, कच्चा तेल, उर्वरक और रिफाइनरी उत्पादों में गिरावट ने समग्र औद्योगिक गति पर दबाव बनाए रखा।

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