कर्नाटक में डीके शिवकुमार ने मुख्यमंत्री पद संभाला, बेंगलुरु बुनियादी ढांचा एजेंडा केंद्र में
कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन के साथ डीके शिवकुमार ने बुधवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और उनके सामने बेंगलुरु के लिए लंबे समय से आगे बढ़ाए जा रहे बड़े बुनियादी ढांचा प्रस्ताव अब अधिक राजनीतिक महत्व हासिल कर रहे हैं। उनके 2023 चुनावी हलफनामे में 1,413.78 करोड़ रुपये की संयुक्त संपत्ति घोषित की गई थी, जिससे वह घोषित संपत्ति के आधार पर देश के सबसे धनी मुख्यमंत्री बनते हैं।
हाइलाइट्स
- डीके शिवकुमार ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2023 में 1,413.78 करोड़ रुपये की संयुक्त संपत्ति घोषित की, जो 2018 की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि है।
- बिदादी के पास 7,000 एकड़ की एकीकृत टाउनशिप योजना के लिए कर्नाटक मंत्रिमंडल ने लगभग 18,000 करोड़ रुपये मंजूर किए, जिससे बेंगलुरु में शहरी विस्तार और निवेश गलियारे को बल मिलेगा।
- बेंगलुरु हवाईअड्डे की भीड़ को देखते हुए नए हवाईअड्डा और 17,000–40,000 करोड़ रुपये लागत वाले 17 किमी भूमिगत टनल रोड सहित अवसंरचना परियोजनाओं में तेजी आई।
संपत्ति खुलासे और शपथ ग्रहण का संदर्भ
Financial Express की रिपोर्ट के अनुसार, शिवकुमार के चुनावी हलफनामे ने उन्हें आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय से आगे रखा है, जिससे देश के तीन सबसे धनी मुख्यमंत्री दक्षिण भारत से हो गए हैं। 2023 कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए दाखिल हलफनामे में शिवकुमार और उनके आश्रितों की संयुक्त संपत्ति 1,413.78 करोड़ रुपये दर्ज है।
यह राशि 2018 विधानसभा चुनाव में घोषित 840.08 करोड़ रुपये से काफी अधिक है। हलफनामे में 273.42 करोड़ रुपये की चल संपत्ति और 1,140.36 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति दर्ज है, जबकि केवल उनकी व्यक्तिगत अचल संपत्ति का मूल्य 972.65 करोड़ रुपये बताया गया है और देनदारियां लगभग 263 करोड़ रुपये हैं।
दस्तावेज में उनके नाम एक पंजीकृत वाहन, Toyota Qualis, का उल्लेख है। इसमें Rolex और Hublot जैसी लग्जरी घड़ियों के साथ सोने और चांदी की बड़ी होल्डिंग्स भी दर्ज हैं, जबकि नामांकन दाखिल करते समय उनके खिलाफ 19 आपराधिक मामले लंबित बताए गए थे।
बेंगलुरु और कनकपुरा के लिए परियोजनाओं का असर
उपमुख्यमंत्री के रूप में शिवकुमार की पहचान बेंगलुरु को नए शहरी ढांचे में ढालने वाली कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं से जुड़ी रही है। इनमें भूमिगत टनल कॉरिडोर, सैटेलाइट टाउनशिप, दूसरे हवाईअड्डे का प्रस्ताव और कावेरी से जुड़े जल ढांचा प्रोजेक्ट शामिल हैं, जो अब उनके प्रशासनिक एजेंडे के मुख्य हिस्से के रूप में देखे जा रहे हैं।बिदादी के पास 7,000 एकड़ में प्रस्तावित एकीकृत टाउनशिप उनकी सबसे बड़ी शहरी विस्तार योजनाओं में है, जिसके लिए कर्नाटक मंत्रिमंडल हाल ही में लगभग 18,000 करोड़ रुपये को मंजूरी दे चुका है। इस परियोजना को आवासीय क्षेत्र, औद्योगिक क्लस्टर, शैक्षणिक संस्थान, वाणिज्यिक जिले और आधुनिक परिवहन ढांचे वाले आत्मनिर्भर सैटेलाइट शहर के रूप में विकसित करने की योजना है, ताकि बेंगलुरु के मुख्य शहरी हिस्सों पर दबाव घटे और नए निवेश गलियारे बनें।
दूसरे बेंगलुरु हवाईअड्डे का प्रस्ताव भी तेजी पकड़ रहा है, क्योंकि केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा सालाना 4 करोड़ से अधिक यात्रियों को संभाल रहा है। वहीं, हेब्बल से सिल्क बोर्ड जंक्शन तक 17 किलोमीटर के भूमिगत टनल रोड प्रस्ताव पर बहस जारी है, जिसकी अनुमानित लागत 17,000 करोड़ रुपये से 40,000 करोड़ रुपये के बीच बताई जाती है।
मेकदातु बैलेंसिंग रिजर्वायर परियोजना राजनीतिक रूप से संवेदनशील बनी हुई है, क्योंकि इसका लक्ष्य बेंगलुरु की पेयजल आपूर्ति मजबूत करना और जलविद्युत उत्पादन बढ़ाना है, लेकिन कावेरी जल बंटवारे को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच तनाव भी इससे जुड़ा है। कनकपुरा में शिवकुमार की राजनीतिक पकड़ भी इन्हीं विकास कार्यों से मजबूत हुई है, जहां सड़क संपर्क, जल योजनाएं, ड्रेनेज, पुस्तकालय, खेल मैदान, सभा भवन और सौर स्ट्रीट लाइटिंग जैसी परियोजनाएं उनकी क्षेत्रीय विकास रणनीति का हिस्सा रही हैं।
हमारी पिछली रिपोर्ट में डीके शिवकुमार की बेंगलुरु के लिए विकास प्राथमिकताओं पर विस्तार से चर्चा की गई थी, जिसमें बिदादी के पास 7,000 एकड़ की एकीकृत टाउनशिप, Hebbal–Silk Board भूमिगत टनल रोड और मेकेदातु बैलेंसिंग रिजर्वायर जैसे बड़े प्रोजेक्ट शामिल थे। उस लेख में इन योजनाओं की अनुमानित लागत, संभावित बाधाएं (जैसे भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय मंजूरियां) और कावेरी जल विवाद से जुड़ी राजनीतिक संवेदनशीलता का संदर्भ भी दिया गया था।
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