गोवा में ईडी ने भूमि अधिकार धोखाधड़ी मामले में अभियोजन शिकायत दायर की

गोवा में ईडी ने भूमि अधिकार धोखाधड़ी मामले में अभियोजन शिकायत दायर की
गोवा भूमि धोखाधड़ी पर केस

गोवा में कथित भूमि अधिकार हड़पने से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले ने अब अदालती चरण में प्रवेश कर लिया है। मामला कारांजालेम स्थित एक भूखंड से जुड़ा है, जहां जांच एजेंसी के अनुसार कथित जालसाजी के जरिए मूल किरायेदार परिवार को उसके वैध अधिकारों से वंचित किया गया और बाद में उससे अपराध की आय उत्पन्न हुई।

हाइलाइट्स

  • ईडी ने फ्र. अरलिनो डी मेलो, फ्र. विक्टर रोड्रिग्स, प्रभाकर हवालदार और एक रियल एस्टेट फर्म के खिलाफ भूमि अधिकार धोखाधड़ी में अभियोजन शिकायत दाखिल की।
  • कथित फर्जी दस्तावेजों से 2,479 वर्ग मीटर भूखंड आर्चडायोसीज ऑफ गोवा एंड दमन के नाम करवाकर उसे 09.04.2007 को 61,97,500 रुपये में बेचा गया।
  • ईडी ने आरोपित अचल संपत्तियों की 27.10 करोड़ रुपये कीमत अस्थायी रूप से कुर्क की, जिनमें परियोजना बिक्री से उत्पन्न अपराध की आय शामिल है।

मामले के आरोप और जांच का आधार

According to the Enforcement Directorate, पणजी जोनल कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत फ्र. अरलिनो डी मेलो, फ्र. विक्टर कॉन्सेइकाओ रोड्रिग्स, प्रभाकर राम हवालदार और एक निजी रियल एस्टेट डेवलपमेंट फर्म के खिलाफ मर्सेस, उत्तर गोवा स्थित विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत दायर की है। आरोप है कि 18.11.2004 से 05.12.2006 के बीच संबंधित पक्षों ने कथित साजिश के तहत जाली दस्तावेजों का उपयोग कर सिटी सर्वे, पणजी की पी.टी. शीट संख्या 162 के चाल्टा संख्या 44, 2479 वर्ग मीटर भूमि के रिकॉर्ड में आर्चडायोसीज ऑफ गोवा एंड दमन का नाम दर्ज कराया।

जांच की शुरुआत पणजी पुलिस स्टेशन, उत्तर गोवा में भारतीय दंड संहिता, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज प्राथमिकी से हुई। उसी प्राथमिकी के आधार पर ईडी ने ईसीआईआर दर्ज किया। एजेंसी का कहना है कि इस कथित फर्जी प्रविष्टि से मूल किरायेदार परिवार के वैध काश्तकारी अधिकार समाप्त कर दिए गए।

ईडी ने बताया कि 16.12.2025 को गोवा में धन शोधन निवारण अधिनियम की धारा 17 के तहत तलाशी अभियान चलाया गया, जिसमें आपत्तिजनक ढीले कागजात और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद हुए। एजेंसी के वित्तीय जांच निष्कर्षों के अनुसार, कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के सहारे इस भूखंड को आर्चडायोसीज ऑफ गोवा एंड दमन के नाम दर्ज कराया गया और बाद में 09.04.2007 की बिक्री विलेख के जरिए इसे 61,97,500 रुपये के मूल्य पर एक निजी रियल एस्टेट डेवलपमेंट फर्म को बेचा गया।

अपराध की आय और संपत्ति पर असर

ईडी के मुताबिक, उक्त भूमि पर बाद में आवासीय-सह-व्यावसायिक परियोजना विकसित की गई और उसमें बनी इकाइयों की बिक्री से लगभग 27.10 करोड़ रुपये की अपराध की आय उत्पन्न हुई और उसके कब्जे में रखी गई। यह राशि जांच एजेंसी के अनुसार कथित धोखाधड़ी वाले लेनदेन से जुड़े वित्तीय लाभ का प्रमुख आधार है।

एजेंसी इससे पहले लगभग 27.10 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर चुकी है। इनमें मित्रा, कारांजालेम, पणजी स्थित एक वाणिज्यिक संपत्ति, होटल-सह-रेस्तरां, तथा दो अन्य अचल संपत्तियां शामिल हैं, जिन्हें ईडी ने अपराध की आय या उसके समतुल्य मूल्य का प्रतिनिधित्व करने वाली संपत्ति बताया है।

यह मामला गोवा के रियल एस्टेट और भूमि अभिलेख प्रशासन से जुड़े अनुपालन जोखिमों को भी रेखांकित करता है, खासकर उन मामलों में जहां शीर्षक, काश्तकारी अधिकार और बाद की परियोजना बिक्री आपस में जुड़ती हैं। अदालत में दायर शिकायत के आगे बढ़ने के साथ इस प्रकरण का असर संबंधित पक्षों की कानूनी स्थिति के साथ-साथ क्षेत्र में भूमि लेनदेन की जांच पर भी पड़ सकता है।

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