बेंगलुरु के लिए डीके शिवकुमार की अवसंरचना योजना में टनल रोड, टाउनशिप और मेकेदातु पर जोर

बेंगलुरु के लिए डीके शिवकुमार की अवसंरचना योजना में टनल रोड, टाउनशिप और मेकेदातु पर जोर
बेंगलुरु के लिए नई योजना

कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी के बीच बेंगलुरु के लिए डीके शिवकुमार की विकास प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित हो रहा है। इस दृष्टि के केंद्र में बड़े पैमाने की शहरी अवसंरचना, जल सुरक्षा, उपग्रह नगरों का विस्तार और ऐसे प्रोजेक्ट हैं जो शहर की दीर्घकालिक आर्थिक व भौतिक संरचना को बदल सकते हैं।

हाइलाइट्स

  • कर्नाटक मंत्रिमंडल ने बिदादी के पास लगभग 7,000 एकड़ में 18,000 करोड़ रुपये की लागत से एकीकृत टाउनशिप परियोजना को मंजूरी दी।
  • 17 से 40 हजार करोड़ रुपये लागत की 17 किमी भूमिगत टनल रोड परियोजना Hebbal से Silk Board के बीच ट्रैफिक जाम कम करने और शहरी संरचना बदलने पर केंद्रित है।
  • 9,000 करोड़ रुपये से ऊपर की संभावित लागत वाली मेकेदातु जलाशय परियोजना कावेरी जल विवाद, बेंगलुरु की जल आपूर्ति और क्षेत्रीय राजनीति को प्रभावित करेगी।

बेंगलुरु विस्तार की परियोजनाएं और नीति दिशा

Financial Express Online से बातचीत में कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता Kengal Shreepada Renu ने कहा कि शिवकुमार की प्राथमिकता कल्याण-केंद्रित प्रशासन से अलग, बड़े अवसंरचना विस्तार और दीर्घकालिक शहरी योजना पर है। उनके अनुसार, ट्रैफिक जाम, आबादी वृद्धि, जल कमी और तेज शहरी फैलाव के दबाव के बीच शिवकुमार क्रमिक सुधारों के बजाय ऐसे बड़े प्रोजेक्ट पर जोर देते हैं जो शहर की संरचना को मूल रूप से बदलें।

इसी परिप्रेक्ष्य में बिदादी के पास लगभग 7,000 एकड़ में एकीकृत टाउनशिप का प्रस्ताव सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में शामिल है। कर्नाटक मंत्रिमंडल इस परियोजना के लिए लगभग 18,000 करोड़ रुपये को मंजूरी दे चुका है, और इसका लक्ष्य आवासीय क्षेत्र, औद्योगिक क्लस्टर, वाणिज्यिक जिले, शैक्षणिक संस्थान और आधुनिक परिवहन संपर्क के साथ एक आत्मनिर्भर उपग्रह शहर विकसित करना है।

हालांकि, इस योजना को भूमि अधिग्रहण, रियल एस्टेट सट्टेबाजी और कृषि समुदायों के संभावित विस्थापन को लेकर आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। आलोचकों का कहना है कि बेंगलुरु के मूल नियोजन संकट का समाधान किए बिना बाहरी विस्तार नई समस्याएं पैदा कर सकता है।

दूसरे हवाईअड्डे का प्रस्ताव भी तेजी से चर्चा में है, क्योंकि Kempegowda International Airport सालाना 4 करोड़ से अधिक यात्रियों को संभाल रहा है। Kanakapura, Nelamangala और Tumakuru जिले के Sira जैसे स्थानों पर विचार चल रहा है, लेकिन मौजूदा हवाईअड्डा संचालक के संविदात्मक संरक्षण, पर्यावरणीय मंजूरी और बड़े पैमाने के भूमि अधिग्रहण जैसी बाधाएं बनी हुई हैं।

शिवकुमार से सबसे अधिक जुड़ी परियोजनाओं में प्रस्तावित भूमिगत टनल रोड नेटवर्क भी शामिल है। 17 किलोमीटर के गलियारे का यह विचार Hebbal को Silk Board जंक्शन से जोड़कर सतही जाम कम करने पर केंद्रित है, जबकि इसकी अनुमानित लागत 17,000 करोड़ रुपये से लेकर लगभग 40,000 करोड़ रुपये तक बताई जाती है, जिससे यह राज्य की सबसे महंगी शहरी परियोजनाओं में गिनी जा रही है।

जल सुरक्षा, क्षेत्रीय असर और राजनीतिक महत्व

मेकेदातु बैलेंसिंग रिजर्वायर परियोजना शिवकुमार की राजनीतिक और प्रशासनिक पहचान से जुड़ी सबसे संवेदनशील योजनाओं में बनी हुई है। Cauvery नदी पर Ramanagara जिले के पास प्रस्तावित यह जलाशय बेंगलुरु की पेयजल आपूर्ति मजबूत करने के साथ जलविद्युत उत्पादन का भी लक्ष्य रखता है, हालांकि तमिलनाडु के साथ जल बंटवारे को लेकर यह लगातार अंतर्राज्यीय विवाद का विषय बना हुआ है।

2019 के शुरुआती आकलन में इस परियोजना की लागत लगभग 9,000 करोड़ रुपये रखी गई थी, लेकिन मुद्रास्फीति और निर्माण लागत बढ़ने से संशोधित अनुमान काफी ऊपर जाने की संभावना है। यदि इसे आगे बढ़ाया जाता है, तो इसका प्रभाव केवल शहरी जल आपूर्ति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कर्नाटक की दीर्घकालिक संसाधन योजना और क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ेगा।

शिवकुमार की अवसंरचना-केंद्रित छवि का बड़ा हिस्सा Kanakapura में उनके लंबे राजनीतिक कार्यकाल से बनता है। वहां सड़क संपर्क, जल योजनाएं, ड्रेनेज, पुस्तकालय, खेल मैदान, सभा भवन और सौर स्ट्रीट लाइटिंग जैसी पहलों ने उनकी विकास शैली को आकार दिया है, और कांग्रेस नेताओं का मानना है कि यही प्रशासनिक फोकस बेंगलुरु में तेज परियोजना क्रियान्वयन का आधार बन सकता है।

हमारी पिछली रिपोर्ट में डीके शिवकुमार के कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन और 3 जून को मुख्यमंत्री पद की शपथ की रूपरेखा पर फोकस किया गया था। इसमें कांग्रेस विधायक दल द्वारा उन्हें सर्वसम्मति से नेता चुने जाने, सत्ता हस्तांतरण को पार्टी एकजुटता के संकेत के रूप में देखे जाने और उनकी घोषित संपत्ति व कारोबारी हितों से जुड़ी प्रोफाइल का भी उल्लेख था।

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