भारत का दक्षिण-पश्चिम मानसून केरल पहुंचा, कृषि और जल क्षेत्र पर कम बारिश का जोखिम बढ़ा
भारत में चार महीने के वर्षा मौसम की औपचारिक शुरुआत के साथ दक्षिण-पश्चिम मानसून गुरुवार को केरल पहुंचता है। यह प्रगति ऐसे समय में होती है जब देश के लिए इस मौसम में सामान्य से कम बारिश का अनुमान लगाया गया है, जो कृषि, जल संसाधनों और व्यापक अर्थव्यवस्था के लिए अहम है।
हाइलाइट्स
- 4 जून, 2026 को दक्षिण-पश्चिम मानसून केरल पहुंचा, मौसम विभाग ने पूरे सीजन में दीर्घकालिक औसत का लगभग 90 प्रतिशत वर्षा अनुमानित की।
- कम वर्षा का पूर्वानुमान एल नीनो स्थितियों से जुड़ा है, जो सितंबर 2026 तक मध्यम या मजबूत हो सकती है और वर्षा प्रभावित कर सकती है।
- कमजोर मानसून के अनुमान से भारत की कृषि, जल उपलब्धता और ग्रामीण मांग पर आर्थिक जोखिम बढ़ा, दीर्घकालिक औसत 87 सेंटीमीटर है।
मानसून की शुरुआत और मौसम विभाग का पूर्वानुमान
Financial Express की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत मौसम विज्ञान विभाग ने कहा कि 4 जून, 2026 को दक्षिण-पश्चिम मानसून केरल और माहे सहित लक्षद्वीप द्वीपसमूह, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के कई हिस्सों में आगे बढ़ता है। विभाग के मुताबिक यह आगमन उसके 26 मई के पहले के अनुमान से कुछ दिन बाद होता है, जबकि सामान्य तौर पर मानसून हर साल लगभग 1 जून के आसपास केरल पहुंचता है।यह वर्षा चक्र जून से सितंबर तक चलता है और भारत की वार्षिक बारिश का बड़ा हिस्सा इसी अवधि में आता है। मौसम विभाग अब 2026 के मानसून मौसम में देशभर में वर्षा दीर्घकालिक औसत के लगभग 90 प्रतिशत रहने का अनुमान देता है।
दीर्घकालिक औसत किसी क्षेत्र में 30 से 50 वर्षों के दौरान किसी विशेष महीने या मौसम की औसत वर्षा को दर्शाता है। 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर देश की मौसमी वर्षा का दीर्घकालिक औसत 87 सेंटीमीटर है।
एल नीनो का असर और आर्थिक महत्व
मौसम विभाग के वर्गीकरण के तहत दीर्घकालिक औसत के 90 प्रतिशत से कम मौसमी वर्षा को कमी वाली वर्षा माना जाता है। मौसम विशेषज्ञ इस मौसम में सामान्य से कम बारिश की संभावना को प्रशांत महासागर में उभरती एल नीनो परिस्थितियों से जोड़ते हैं, जो अक्सर भारत में कमजोर मानसून से जुड़ी रहती हैं।फिलहाल भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में तटस्थ एल नीनो-दक्षिणी दोलन स्थिति एल नीनो की ओर बढ़ रही है। मौसम विभाग का कहना है कि जून में एल नीनो की स्थिति कमजोर रहने की संभावना है, लेकिन सितंबर तक यह मध्यम या मजबूत स्तर तक पहुंच सकती है।
मानसून की प्रगति और एल नीनो की दिशा आने वाले महीनों में बारीकी से देखी जाएगी, क्योंकि दोनों ही इस मौसम में देशभर में वर्षा के वितरण को प्रभावित करने की उम्मीद है। भारत की कृषि गतिविधि, जल उपलब्धता और ग्रामीण मांग पर मानसून का सीधा असर पड़ता है, इसलिए कम वर्षा का अनुमान कई क्षेत्रों के लिए आर्थिक जोखिम बढ़ाता है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में मुंबई की सात झीलों में तेजी से घटते भंडार और दीर्घकालिक औसत के करीब 90% मानसून अनुमान के बीच BMC की बढ़ी हुई आपात तैयारियों पर चर्चा की गई थी। लेख में 10% जलकटौती, टैंकर संचालन पर सख्ती और आने वाले महीनों की वर्षा के आधार पर अतिरिक्त कटौती व वितरण प्रबंधन जैसे कदमों की संभावित दिशा का भी उल्लेख था।
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