पश्चिम एशिया संकट और होरमुज जलडमरूमध्य में व्यवधान के कारण भारत पर उर्वरक और ऊर्जा लागत का दबाव बढ़ रहा है। इसी पृष्ठभूमि में FY27 के लिए उर्वरक सब्सिडी बिल केंद्रीय बजट के अनुमान से दोगुने से अधिक तक पहुंचने की आशंका है।
हाइलाइट्स
- रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने FY27 में 1.7 लाख करोड़ रुपये के बजट प्रावधान के मुकाबले 3.4 लाख करोड़ रुपये उर्वरक सब्सिडी की मांग की है।
- सरकार ने युद्ध के बाद ऊर्जा क्षेत्र में तेल विपणन कंपनियों को 78 दिनों में 1.23 लाख करोड़ रुपये का समर्थन दिया, बावजूद इसके कंपनियां अभी भी रोज़ 650 करोड़ रुपये का नुकसान उठा रही हैं।
- सरकार ने FY27 में 80,000 करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य तय किया, जो FY26 के संशोधित 33,800 करोड़ रुपये से 136 प्रतिशत अधिक है।
सब्सिडी मांग और लागत दबाव
Forbes India के अनुसार, मंगलवार को एक सरकारी सूत्र ने कहा कि रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने FY27 के लिए 1.7 लाख करोड़ रुपये के बजटीय प्रावधान के मुकाबले 3.4 लाख करोड़ रुपये की सब्सिडी की मांग की है। यह बढ़ोतरी पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद उर्वरक कीमतों में उछाल और आपूर्ति मार्गों पर दबाव से जुड़ी है।
FY27 के बजट में यह मानकर प्रावधान किया गया था कि आवंटित राशि 2026 की रबी फसलों और 2027 की खरीफ फसलों की जरूरतें पूरी करेगी, जबकि मौजूदा खरीफ मौसम की उर्वरक लागत पहले ही समाहित की जा चुकी है। सरकारी सूत्र के मुताबिक, यूरिया के प्रत्येक बोरे पर सब्सिडी कोविड के बाद के दौर में 2,900 रुपये से बढ़कर संघर्ष शुरू होने के बाद करीब 4,500 रुपये हो गई है। सरकार को निकट अवधि में मूल्य दबाव कम होने की उम्मीद नहीं है, हालांकि वह संसद के आगामी मानसून सत्र में अनुपूरक अनुदान मांग के जरिये अतिरिक्त धनराशि लेने की योजना नहीं बना रही है।
स्थिति को संभालने के लिए भारत घरेलू उत्पादन बढ़ा रहा है, ताकि आयातित लागत झटकों का असर कुछ कम किया जा सके। इससे संकेत मिलता है कि सरकार वित्तीय बोझ बढ़ने के बावजूद आपूर्ति उपलब्धता बनाए रखने को प्राथमिकता दे रही है।
तेल विपणन कंपनियों और राजस्व पर असर
उर्वरक के अलावा ऊर्जा क्षेत्र में भी दबाव दिख रहा है। युद्ध शुरू होने के बाद कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से उपभोक्ताओं को बचाने के लिए सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों को मूल्य वृद्धि का कुछ हिस्सा वहन करने में मदद दी, जिससे करीब तीन महीने तक खुदरा ईंधन कीमतें अपरिवर्तित रहीं।वित्त मंत्रालय ने 78 दिनों में इन कंपनियों को लगभग 1.23 लाख करोड़ रुपये का समर्थन दिया है, जिसे सरकारी राजस्व त्याग के रूप में देखा जा रहा है। अब तेल विपणन कंपनियां पंप पर ईंधन कीमतें बढ़ाना शुरू कर रही हैं, लेकिन सूत्र के अनुसार वे अभी भी करीब 650 करोड़ रुपये प्रतिदिन का नुकसान उठा रही हैं और सरकार आगे कोई अतिरिक्त सहायता देने की योजना नहीं बना रही है।
वृहद अर्थव्यवस्था पर सरकारी आकलन यह है कि वृद्धि की रफ्तार बनी हुई है और उच्च आवृत्ति संकेतक घरेलू मांग के मजबूत रहने का संकेत देते हैं। बाहरी जोखिमों, जिनमें संभावित El Niño भी शामिल है, के बीच सरकार FY27 में 80,000 करोड़ रुपये के विनिवेश लक्ष्य को तेज कर राजस्व आधार मजबूत करने की कोशिश कर रही है, जो FY26 के संशोधित 33,800 करोड़ रुपये से 136 प्रतिशत अधिक है।
पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच उधारी योजना पर हमारे पहले के लेख में बताया गया था कि सरकार को FY27 के लिए अपने उधारी कार्यक्रम का विस्तार करने की जरूरत नहीं दिख रही है और घरेलू वित्तीय संसाधनों को पर्याप्त माना जा रहा है। उसी कवरेज में RBI के FY27 के लिए घटाए गए वृद्धि अनुमान और बढ़ाए गए महंगाई अनुमान का उल्लेख करते हुए कच्चे तेल की कीमतों में अनिश्चितता तथा कमजोर मानसून/El Niño को प्रमुख जोखिम बताया गया था।
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