Mercedes-Benz India की पावरट्रेन रणनीति लग्जरी ईवी बाजार में प्रतिस्पर्धा तेज करती है

Mercedes-Benz India की पावरट्रेन रणनीति लग्जरी ईवी बाजार में प्रतिस्पर्धा तेज करती है
Mercedes की ईवी रणनीति

भारत के लग्जरी कार बाजार में Mercedes-Benz India अपनी बाजार बढ़त बचाए रखते हुए इलेक्ट्रिक वाहनों, प्लग-इन हाइब्रिड और पारंपरिक इंजन, तीनों पर साथ-साथ दांव लगा रही है। BMW के साथ बिक्री अंतर घटने और लग्जरी ईवी हिस्सेदारी बढ़ने के बीच कंपनी का मानना है कि ग्राहक पसंद और उत्पाद प्रीमियमकरण आने वाले वर्षों में प्रतिस्पर्धा की दिशा तय करेंगे।

हाइलाइट्स

  • Mercedes-Benz India ने अप्रैल में 55 लाख रुपये की CLA EV लॉन्च की, जिससे उसकी ईवी हिस्सेदारी 8 प्रतिशत से बढ़कर 10 प्रतिशत हो गई।
  • कंपनी जून के मध्य में S-Class का प्लग-इन हाइब्रिड संस्करण पेश करती है, जिससे रेंज चिंता कम करने और क्रमिक ईवी ट्रांजिशन का लक्ष्य है।
  • BMW iX1 की शुरुआती कीमत 51.4 लाख रुपये है तथा इलेक्ट्रिक वाहनों का हिस्सा BMW की भारत बिक्री में 26 प्रतिशत, जबकि Mercedes-Benz के लिए 10 प्रतिशत है।

भारत में मॉडल रणनीति और पावरट्रेन विस्तार

Forbes India के अनुसार, Mercedes-Benz India के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी Santosh Iyer का कहना है कि कंपनी केवल कम कीमत वाले वॉल्यूम के पीछे नहीं भाग रही, बल्कि ब्रांड की प्रीमियम पहचान, उत्पाद गुणवत्ता और पुनर्बिक्री मूल्य को बचाए रखते हुए अपनी ईवी पेशकश बढ़ा रही है। कंपनी ने इस साल अप्रैल में CLA EV पेश की, जिसकी शुरुआती कीमत 55 लाख रुपये, एक्स-शोरूम, है, और इससे भारत में उसके कुल वॉल्यूम में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 8 प्रतिशत से 10 प्रतिशत तक बढ़ती है।

Mercedes-Benz ने शुरुआत में भारत में अपने ऊपरी सिरे के ईवी मॉडल, जैसे EQS SUV, EQS Sedan, Mercedes-Maybach EQS SUV और G580 with EQ technology, पर ध्यान दिया था। बाद में ग्राहक प्रतिक्रिया के बाद कंपनी अपनी अलग EQ पहचान को वैश्विक स्तर पर समेटती है और इलेक्ट्रिक मॉडलों को फिर से मुख्य Mercedes-Benz ब्रांड के तहत लाती है, क्योंकि खरीदार अलग ईवी डिजाइन के बजाय परिचित Mercedes डिजाइन के साथ इलेक्ट्रिक पावरट्रेन चाहते हैं।

कंपनी अब खुद को पावरट्रेन-अज्ञेयवादी बताती है। Mercedes-Benz की वैश्विक प्रबंधन टीम के सदस्य Mathias Geisen का कहना है कि भविष्य इलेक्ट्रिक है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि यह बदलाव हर बाजार में कब पूरी तरह आता है, इसलिए भारत जैसे बाजार में पुल तकनीकों की जरूरत बनी रहती है, जहां चार्जिंग ढांचा अभी विकसित हो रहा है।

इसी सोच के तहत Mercedes-Benz India जून के मध्य में S-Class का प्लग-इन हाइब्रिड संस्करण प्रदर्शित करती है। कंपनी का तर्क है कि PHEV शहर में इलेक्ट्रिक ड्राइविंग और लंबी दूरी पर दहन इंजन, दोनों का विकल्प देकर रेंज संबंधी चिंता कम करता है और ग्राहकों को पूर्ण ईवी की ओर क्रमिक रूप से ले जा सकता है।

लग्जरी ईवी बाजार में प्रतिस्पर्धा और उद्योग पर असर

भारत के यात्री वाहन बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी FY26 में 4.25 प्रतिशत रहती है, लेकिन लग्जरी खंड में यह 14 प्रतिशत तक पहुंचती है। कर ढांचे, ऊंची कीमतों में तुलनात्मक समानता, बड़े बैटरी पैक और घरेलू चार्जिंग सुविधा के कारण लग्जरी ईवी अपनाने की रफ्तार आम बाजार से आगे रहती है, और यही वजह है कि Mercedes-Benz तथा BMW की रणनीतियों का असर पूरे प्रीमियम ऑटो क्षेत्र पर पड़ता है।

BMW भारत में अपेक्षाकृत निचले प्रवेश बिंदु से ईवी मांग जुटाती है। उसकी iX1 की शुरुआती कीमत 51.4 लाख रुपये है और कंपनी के अनुसार X1 रेंज की 60 प्रतिशत बिक्री iX1 से आती है, जबकि i7 Series में इलेक्ट्रिक और दहन इंजन का बंटवारा 50-50 है। इससे BMW की भारत बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 26 प्रतिशत तक पहुंचती है और वह Mercedes-Benz के साथ अंतर कम करती है।

इसके विपरीत Mercedes-Benz का कहना है कि वह 50 लाख रुपये के आसपास कीमत घटाने के लिए उत्पाद को हल्का नहीं करेगी। Iyer के अनुसार, अल्पकाल में बिक्री रैंकिंग में उतार-चढ़ाव का शोर रह सकता है, लेकिन ग्राहक भरोसा, उत्पाद सार और अवशिष्ट मूल्य लंबे समय में अधिक महत्वपूर्ण रहते हैं। कंपनी यह भी मानती है कि 60 लाख रुपये से 1.5 करोड़ रुपये वाले मुख्य लग्जरी खंड में अभी इलेक्ट्रिक विकल्पों की कमी है, जबकि यही बाजार का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा है।

Mercedes-Benz 2027 तक वैश्विक स्तर पर 40 से अधिक कारें लॉन्च करने की योजना रखती है और कंपनी का कहना है कि इनमें से कई भारत आएंगी। Iyer के अनुसार, जब प्रत्येक दहन इंजन मॉडल के साथ एक इलेक्ट्रिक समकक्ष उपलब्ध होता है, तब मांग में कहीं अधिक तेज बदलाव दिखता है, हालांकि भारत में ऐसी स्थिति बनने में अभी 24 से 36 महीने लग सकते हैं।

हमारी पिछली रिपोर्ट में भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की तेज होती अपनाने की रफ्तार पर चर्चा की गई थी, जहां कम परिचालन लागत, बेहतर तकनीक और ऊर्जा सुरक्षा जैसी चिंताओं के चलते ईवी कई खरीदारों के लिए पहली कार का विकल्प बन रहे हैं। हमने यह भी बताया था कि रेंज चिंता, चार्जिंग नेटवर्क, कर ढांचे और पुनर्बिक्री मूल्य जैसे कारक बाजार को आकार दे रहे हैं और निवेश व नए मॉडल लॉन्च के साथ प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है।

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