प्रवर्तन निदेशालय ने मुंबई में 36.90 करोड़ रुपये के कथित धनशोधन मामले में अभियोजन शिकायत दायर की
महाराष्ट्र में दर्ज कई आपराधिक मामलों से जुड़ी जांच के बीच प्रवर्तन निदेशालय ने अशोककुमार एकनाथ खरात और अन्य आरोपियों के खिलाफ धनशोधन का मामला अदालत तक पहुंचाया है। एजेंसी के अनुसार, अब तक इस मामले में लगभग 36.90 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच, जब्त या फ्रीज की जा चुकी हैं, जबकि मुख्य आरोपी न्यायिक हिरासत में बना हुआ है।
हाइलाइट्स
- प्रवर्तन निदेशालय ने 36.90 करोड़ रुपये के कथित धनशोधन मामले में अशोककुमार एकनाथ खरात, उनकी पत्नी व चार अन्य के खिलाफ 17.07.2026 को अभियोजन शिकायत दायर की।
- एजेंसी ने 19.20 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से अटैच कीं और अप्रैल–मई 2026 में 17.70 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त/फ्रीज कीं।
- ईडी की जांच ने सहकारी वित्तीय संस्थानों तथा धार्मिक विश्वास-आधारित धोखाधड़ी को उजागर किया, जिससे भविष्य में नियामकीय निगरानी बढ़ सकती है।
जांच, शिकायत और संपत्ति कार्रवाई
Enforcement Directorate के अनुसार, मुंबई जोनल कार्यालय ने 17.07.2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत मुंबई की विशेष अदालत में अशोककुमार एकनाथ खरात, उनकी पत्नी कल्पना खरात और चार अन्य के खिलाफ अभियोजन शिकायत दायर की है। यह कार्रवाई कथित धनशोधन अपराध से संबंधित है, जो अधिनियम की धारा 3 के अंतर्गत आता है और धारा 4 के तहत दंडनीय है।
एजेंसी ने 15.07.2026 को आरोपियों और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर दर्ज 19.20 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच कीं। इसके अलावा, अप्रैल और मई 2026 में कई परिसरों, बैंक लॉकरों और वाहनों पर की गई तलाशी के दौरान 17.70 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त या फ्रीज की गई थीं।
ईडी ने कहा कि उसने यह जांच सरकार वाडा, शिर्डी, सिन्नर और राहाता पुलिस थानों में दर्ज कई प्राथमिकी के आधार पर शुरू की थी। एजेंसी के मुताबिक, मुख्य आरोपी को 19.05.2026 को गिरफ्तार किया गया था और वह अभी भी न्यायिक हिरासत में है।
कथित धनशोधन का तरीका और क्षेत्रीय प्रभाव
जांच में एजेंसी का कहना है कि अशोककुमार एकनाथ खरात ने श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था का कथित तौर पर दुरुपयोग किया और "अवतार पूजा", बीमारी ठीक करने, दुर्भाग्य टालने तथा कारोबार में समृद्धि दिलाने के नाम पर उनसे धन और संपत्तियां हासिल कीं। ईडी के अनुसार, इस प्रक्रिया से उगाही, धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी के जरिये अपराध से अर्जित आय पैदा हुई।एजेंसी का यह भी आरोप है कि आरोपी ने स्वयं को दैवीय शक्तियों से युक्त और भगवान शिव का अवतार बताकर लोगों को भ्रमित किया। जांच के अनुसार, कथित अवैध धन को दो सहकारी क्रेडिट सोसाइटियों, कई खातों के फर्जी संचालन, बेनामी खातों में बड़े नकद जमा और बाद की निकासी, जिनमें परिपक्वता राशि भी शामिल है, के माध्यम से चलाया गया।
ईडी के मुताबिक, इन धनराशियों को भरोसेमंद सहयोगियों के पास रखा गया या परिवार के सदस्यों के नाम पर नासिक, अहमदनगर, सोलापुर, पुणे और मुंबई में अचल संपत्तियों में निवेश किया गया। मामले की आगे की जांच जारी है, जिससे सहकारी वित्तीय संस्थानों और धार्मिक विश्वास से जुड़े कथित वित्तीय दुरुपयोग पर नियामकीय निगरानी और तेज हो सकती है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में बहु-राज्य जमा योजनाओं से जुड़े LUCC/LJCC और Option One Industries Limited के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED की कार्रवाई पर चर्चा की गई थी, जिसमें रवि शंकर तिवारी की PMLA के तहत गिरफ्तारी और अदालत द्वारा ईडी हिरासत मंजूर किए जाने का उल्लेख था। लेख में उच्च रिटर्न का वादा कर लाखों निवेशकों की रकम के दुरुपयोग के आरोप, तिवारी व उनके परिवार के खातों में संदिग्ध जमा और कथित अपराध की आय से खरीदी गई अचल संपत्तियों की जांच जैसे पहलुओं को रेखांकित किया गया था।
नवीनतम भारत समाचार
- Forex
- Crypto