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लेकिन हमने सब कुछ सहेज लिया 🙂.
डॉ अरविंद वीर्मानी ने चीन की समाजवादी बाजार अर्थव्यवस्था (SME) के संदर्भ में बताया कि 1980 से 2020 के बीच वहाँ के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में वेतन वृद्धि की दर प्रति व्यक्ति जीडीपी वृद्धि की तुलना में धीमी रही। यह ट्रेंड चीन के श्रमिकों की क्रयशक्ति और औद्योगिक लाभप्रदता को लेकर नई बहस को जन्म देता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे न केवल मजदूरों की आय पर बल्कि खपत और समग्र आर्थिक असंतुलन पर भी असर पड़ा है।
Virmani has previously commented on China’s economic positioning, including its push toward status as a reserve currency. He has also examined policies encouraging greater trade diversification. The comments reflect his ongoing analysis of China’s structural economic shifts.