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लेकिन हमने सब कुछ सहेज लिया 🙂.
Dr Arvind Virmani ने 1991 के आर्थिक संकट और उस समय हुए सुधारों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया है कि वर्तमान स्थिति की 1991 से कोई सीधी तुलना नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि आज की आर्थिक चुनौतियाँ अलग हैं, जबकि 1991 संकट के केवल एक महत्वपूर्ण सबक को लागू किया जा सकता है—यह कि किसी भी संकट के समय सुधारों का अवसर नहीं गंवाना चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर ईरान युद्ध फिर शुरू होता है तो यह स्थिति में नई चुनौतियाँ ला सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे समय में पारदर्शी सुधार और नीतिगत लचीलापन आवश्यक हैं।
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इससे पहले, Dr Arvind Virmani ने भारत के निम्न-मध्यम आय वर्ग की स्थिति पर टिप्पणी की थी, जिसमें उन्होंने आने वाले वर्षों में उच्च-मध्यम आय वर्ग में प्रवेश की संभावना जताई थी। उन्होंने Piketty की आय असमानता संबंधी धारणाओं पर भी सवाल उठाए थे, और भारत की आय वितरण को अपने शोध में स्पष्ट करने की बात कही थी। इन विषयों पर उनके विचारों को आर्थिक नीति के मौजूदा संदर्भ में महत्त्वपूर्ण माना जाता है।