आरबीआई 23 अक्टूबर को 33,000 करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियों के लिए अंडरराइटिंग नीलामी करेगा

आरबीआई 23 अक्टूबर को 33,000 करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियों के लिए अंडरराइटिंग नीलामी करेगा
33,000 करोड़ की नीलामी

भारत के सरकारी उधारी कार्यक्रम के तहत रिजर्व बैंक 23 अक्टूबर 2026 को 33,000 करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री के लिए अंडरराइटिंग नीलामी आयोजित करेगा। यह प्रक्रिया पात्र बैंकों और प्राइमरी डीलरों की भागीदारी के साथ बाजार में तरलता प्रबंधन और स्थिरता समर्थन के व्यापक ढांचे का हिस्सा है।

हाइलाइट्स

  • आरबीआई 23 अक्टूबर को 33,000 करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियों के लिए अंडरराइटिंग नीलामी आयोजित करेगा, जिसमें बैंक और प्राइमरी डीलर भाग लेंगे।
  • नीलामी से जुड़ी प्रतिभूतियों, बोली मानकों और अनुपालन दिशानिर्देशों का विस्तृत विवरण पूर्व में साझा किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता और संचालन दक्षता बढ़ेगी।
  • यह पहल RBI की मौद्रिक नीति के तहत बाजार स्थिरता और तरलता प्रबंधन को समर्थन देती है तथा सरकारी उधारी कार्यक्रम के प्रभावी निष्पादन में सहायता करेगी।

नीलामी की रूपरेखा और भागीदारी

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह अंडरराइटिंग नीलामी सरकारी प्रतिभूतियों की प्रस्तावित बिक्री से पहले आयोजित की जा रही है और इसका कुल आकार 33,000 करोड़ रुपये है। नीलामी 23 अक्टूबर 2026 को होगी और इसमें पात्र प्रतिभागियों के रूप में अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक तथा प्राइमरी डीलर बोली प्रक्रिया में हिस्सा लेंगे।

केंद्रीय बैंक ने कहा है कि नीलामी से जुड़ी प्रतिभूतियों, बोली मानकों और अनुपालन दिशानिर्देशों का विवरण पहले से साझा किया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना और संचालन को अधिक दक्ष बनाना है।

तरलता प्रबंधन और बाजार स्थिरता पर असर

यह कदम मौजूदा आर्थिक परिप्रेक्ष्य में तरलता प्रबंधन और बाजार स्थिरता को समर्थन देने वाली आरबीआई की व्यापक मौद्रिक नीति पहल से जुड़ा है। सरकारी प्रतिभूति बाजार में अंडरराइटिंग तंत्र निवेशक मांग और निर्गम प्रक्रिया के बीच संतुलन बनाने में सहायक होता है।

ऐसी नीलामियां सरकारी उधारी कार्यक्रम के सुचारु निष्पादन के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती हैं, क्योंकि वे बाजार सहभागियों को पूर्वनिर्धारित ढांचे के भीतर जोखिम का आकलन करने और बोली लगाने का अवसर देती हैं। इससे प्राथमिक बाजार में व्यवस्था और मूल्य खोज की प्रक्रिया को समर्थन मिलता है।

हमारे पहले के लेख में राज्यों की बाजार उधारी और Q3 FY2027 के लिए राज्य सरकारी प्रतिभूतियों (SGS) के निर्गम कैलेंडर पर प्रकाश डाला गया था। इसमें बताया गया था कि रिडेम्प्शन समायोजन के बाद भी शुद्ध SGS निर्गम बढ़ने का अनुमान है और महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल व हरियाणा जैसे राज्यों का योगदान प्रमुख रहेगा, जबकि कई राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने बेंचमार्क इश्यूअंस स्ट्रैटेजी (BIS) को अपनाया है।

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