आरबीआई ने 35,000 करोड़ रुपये के सरकारी प्रतिभूति नीलामी परिणाम जारी किए
भारत सरकार के चालू वित्तीय वर्ष के उधारी कार्यक्रम के तहत 30 अक्टूबर 2026 को कई अवधियों वाली सरकारी प्रतिभूतियों की नीलामी पूरी हुई। इस प्रक्रिया में 2028, 2031 और 2036 परिपक्वता वाली प्रतिभूतियों के लिए कुल 35,000 करोड़ रुपये स्वीकार किए गए, जो बाजार स्थिरता और निवेशक रुचि को सहारा देने के उद्देश्य को दर्शाता है।
हाइलाइट्स
- आरबीआई ने 30 अक्टूबर 2026 को तीन परिपक्वता वाली सरकारी प्रतिभूतियों की नीलामी में 35,000 करोड़ रुपये की बोलियां स्वीकार कीं।
- 2028, 2031 और 2036 की परिपक्वता पर क्रमशः 10,000 करोड़ रुपये (कूपन 6.10%), 15,000 करोड़ रुपये (कूपन 6.25%) और 10,000 करोड़ रुपये (कूपन 6.35%) स्वीकृत हुए।
- सरकार विभिन्न अवधि की प्रतिभूतियों के माध्यम से उधारी कार्यक्रम को बाजार स्थिरता एवं निवेशक विविधीकरण को ध्यान में रखते हुए चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ा रही है।
नीलामी के परिणाम और प्रतिभूतियों का ब्योरा
जैसा कि Reserve Bank of India द्वारा बताया गया है, 30 अक्टूबर 2026 को आयोजित सरकारी प्रतिभूति नीलामी में तीन अलग-अलग परिपक्वता अवधियों वाले बॉन्ड शामिल रहे और कुल 35,000 करोड़ रुपये की बोलियां स्वीकार की गईं। यह घोषणा सरकार के बाजार उधारी कार्यक्रम के नियमित संचालन का हिस्सा है।2028 परिपक्वता वाली सरकारी प्रतिभूति के लिए 10,000 करोड़ रुपये स्वीकार किए गए और इसका कूपन 6.10% रहा। 2031 परिपक्वता वाली प्रतिभूति के लिए 15,000 करोड़ रुपये स्वीकार किए गए, जबकि इसका कूपन 6.25% तय हुआ। 2036 परिपक्वता वाली प्रतिभूति में 10,000 करोड़ रुपये स्वीकार किए गए और इसका कूपन 6.35% रहा।
उधारी कार्यक्रम और बाजार पर असर
ये परिणाम दिखाते हैं कि सरकार अपने चालू वित्तीय वर्ष की उधारी जरूरतों को अलग-अलग अवधि की प्रतिभूतियों के जरिए पूरा कर रही है। विभिन्न परिपक्वताओं में निर्गम से निवेशक आधार को विविध बनाए रखने और प्रतिफल वक्र के अलग-अलग हिस्सों में मांग को संतुलित करने में मदद मिलती है।आरबीआई ने कहा कि यह प्रक्रिया ऐसे तरीके से आगे बढ़ रही है जो बाजार स्थिरता और निवेशक रुचि का समर्थन करती है। कुल स्वीकृत राशि का आकार यह भी संकेत देता है कि नियोजित उधारी कार्यक्रम को चरणबद्ध तरीके से बाजार में समायोजित किया जा रहा है।
IMF द्वारा FY27 और FY28 के लिए भारत की वृद्धि का अनुमान 7% तक बढ़ाए जाने पर हमारी पहले की रिपोर्ट में चर्चा की गई थी, जिसमें ऊंची तेल कीमतों और वैश्विक सुस्ती के बावजूद घरेलू मांग और सेवाओं की मजबूती को प्रमुख आधार बताया गया था। उस लेख में मुद्रास्फीति और चालू खाते के घाटे के संभावित रुझानों के साथ यह भी रेखांकित किया गया था कि पूंजीगत व्यय, R&D निवेश और आपूर्ति शृंखला की मजबूती जैसे कदम आर्थिक लचीलेपन को सहारा देते हैं। यह पृष्ठभूमि सरकार के उधारी कार्यक्रम और बॉन्ड नीलामी के नतीजों को व्यापक मैक्रो संदर्भ में समझने में मदद करती है।
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