भारत का मध्यम वर्ग 6.3 प्रतिशत वार्षिक दर से बढ़ा, खपत और एआई अपनाने को मिला सहारा

भारत का मध्यम वर्ग 6.3 प्रतिशत वार्षिक दर से बढ़ा, खपत और एआई अपनाने को मिला सहारा
मध्यम वर्ग की तेजी

भारत में मध्यम वर्ग देश की खपत-आधारित वृद्धि का केंद्रीय आधार बन रहा है और इसका विस्तार अब बड़े महानगरों से आगे छोटे शहरों तक फैल रहा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि 1995 से 2021 के बीच यह वर्ग औसतन 6.3 प्रतिशत सालाना बढ़ा और आज देश की 31 प्रतिशत आबादी मध्यम वर्ग में आती है।

हाइलाइट्स

  • OECD के अनुसार, भारत का मध्यम वर्ग 6.3 प्रतिशत वार्षिक दर से बढ़ रहा है और 2030-2035 के बीच आकार में चीन से आगे निकलने की उम्मीद है।
  • वित्तीय समावेशन, डिजिटल भुगतान और कर राहत जैसे उपायों से 24.8 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए और उपभोग मुख्य रूप से मध्यम वर्ग द्वारा 93 प्रतिशत तक होने का अनुमान है।
  • STEM शिक्षा और जिला-स्तरीय एआई कौशल शिविरों की वजह से मध्यम वर्ग एआई को तेजी से अपना रहा है, जिससे MSME निर्यात का 40 प्रतिशत योगदान करते हैं।

मध्यम वर्ग की वृद्धि और खपत का आधार

Forbes India के अनुसार, सीतारमण ने फ्रांस के Les Rencontres Économiques d'Aix-en-Provence 2026 में एक पैनल चर्चा के दौरान कहा कि OECD के आकलन के मुताबिक भारत 2030 से 2035 के बीच मध्यम वर्ग की कुल आबादी के आकार में चीन से आगे निकलने की उम्मीद रखता है। उन्होंने यह भी कहा कि 2036 तक कुल उपभोक्ता खर्च का 93 प्रतिशत हिस्सा मध्यम वर्ग और समृद्ध परिवारों से आने का अनुमान है।

सीतारमण के मुताबिक, कोविड के बाद भारत की तेज वृद्धि में मध्यम वर्ग की खपत प्रमुख भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि यह वर्ग केवल वृद्धि का लाभार्थी नहीं है, बल्कि स्वयं वृद्धि का इंजन बन चुका है।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत में संपत्ति का फैलाव अब मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे चुनिंदा महानगरों तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, लगभग 500 टियर II और टियर III शहर नए आर्थिक केंद्रों के रूप में उभरने की स्थिति में हैं, जिससे आय और खपत का आधार अधिक व्यापक हो रहा है।

वित्तीय समावेशन, राहत और एआई कौशल पर जोर

सीतारमण ने मध्यम वर्ग के विस्तार को 2014 से शुरू हुए वित्तीय समावेशन, जन धन योजना के तहत बड़े पैमाने पर बैंक खाते खोलने, कम ब्याज वाले सरकारी गारंटी युक्त ऋण, वस्तु एवं सेवा कर दरों में कटौती और डिजिटल भुगतान ढांचे के विस्तार से जोड़ा। उन्होंने कहा कि डिजिटल लेनदेन ने छोटे कारोबारों को अधिक औपचारिक कारोबारी ढांचे में लाने, उनकी ऋण योग्यता सुधारने और बैंकों की पहुंच बढ़ाने में मदद की है।

उन्होंने विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि इन उपायों से लगभग 24.8 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले। उनके अनुसार, कर राहत ने भी खपत को समर्थन दिया है, क्योंकि जिस आय सीमा तक कोई कर नहीं देना होता, वह पुराने कर ढांचे के 2.5 लाख रुपये से बढ़कर 12 लाख रुपये हो गई है।

स्वास्थ्य सहायता के मोर्चे पर उन्होंने प्रति परिवार 5 लाख रुपये के वार्षिक बीमा कवर और बाजार कीमत से लगभग 80 प्रतिशत कम दर पर जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराने वाली सरकारी फार्मेसी श्रृंखला का उल्लेख किया। आवास के मामले में उन्होंने कहा कि शहरों के अनुसार किफायती आवास की अलग सीमा तय की गई है और मध्यम वर्ग के खरीदारों को सब्सिडी वाली ब्याज दर पर ऋण मिलता है।

सीतारमण ने महिलाओं, अनुसूचित जातियों और जनजातीय समुदायों के लिए बिना जमानत रियायती उद्यम ऋण का भी जिक्र किया, जिसे उन्होंने भारत में सात वर्षों के भीतर 100 से अधिक यूनिकॉर्न स्टार्टअप उभरने के कारकों में एक बताया। उन्होंने कहा कि चुनौती केवल रोजगार या उद्यम शुरू कराने की नहीं, बल्कि लोगों को मध्यम वर्ग में टिकाए रखने की भी है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर उन्होंने कहा कि STEM शिक्षा में दशकों के निवेश ने भारत के मध्यम वर्ग को एआई से विस्थापित होने के बजाय उसके उपयोग में आगे रहने की स्थिति में रखा है। उनके अनुसार, कई एआई समाधान विकसित करने वाले लोग मध्यम वर्ग से आते हैं और यही वर्ग एआई के साथ काम करने के लिए तेजी से नए कौशल भी सीख रहा है।

उन्होंने जिला स्तर पर निजी कंपनियों के साथ साझेदारी में चल रहे एआई कौशल शिविरों का उल्लेख किया, जहां प्रशिक्षण को कंपनियों की जरूरत के अनुसार तैयार किया जाता है। सीतारमण ने कहा कि भारत के लगभग 40 प्रतिशत निर्यात सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों से आते हैं, जिनमें से कई अब एआई आधारित कारोबारी मॉडल अपना रहे हैं और एआई प्रशिक्षित कर्मचारियों की मांग कर रहे हैं।

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