RBI ने बेंगलुरु के Amanath Co-operative Bank पर नियामकीय निर्देश सितंबर 2026 तक बढ़ाए

RBI ने बेंगलुरु के Amanath Co-operative Bank पर नियामकीय निर्देश सितंबर 2026 तक बढ़ाए
अमनथ बैंक पर बढ़ी सख्ती

भारतीय रिजर्व बैंक ने The Amanath Co-operative Bank Ltd., Bangalore पर लागू नियामकीय निर्देशों की अवधि तीन महीने और बढ़ा दी है। यह विस्तार 12 जून 2026 के कारोबार बंद होने के बाद से 12 सितंबर 2026 के कारोबार बंद होने तक प्रभावी रहता है और बैंक की परिचालन स्थिति पर नियामकीय निगरानी जारी रहने का संकेत देता है।

हाइलाइट्स

  • RBI ने The Amanath Co-operative Bank Ltd., Bangalore पर नियामकीय निर्देशों की अवधि 12 जून 2026 तक बढ़ाई।
  • विस्तारित निर्देश बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 35A के तहत समीक्षा के अधीन जारी रहेंगे; अन्य सभी शर्तें अपरिवर्तित रहेंगी।
  • RBI का यह कदम बैंक की वित्तीय स्थिति पर संतुष्टि नहीं दर्शाता है और आगे की समीक्षा नियामकीय सतर्कता को रेखांकित करती है।

निर्देश विस्तार और नियामकीय आधार

भारतीय रिजर्व बैंक की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह निर्देश बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 35A को धारा 56 के साथ पढ़ते हुए जारी किए गए हैं और अब उनकी अवधि समीक्षा के अधीन आगे बढ़ाई गई है। केंद्रीय बैंक ने कहा कि जनहित में निर्देशों के संचालन की अवधि को 12 जून 2026 के कारोबार बंद होने के बाद भी जारी रखना आवश्यक है।

RBI ने बताया कि The Amanath Co-operative Bank Ltd., Bangalore को मूल निर्देश 12 जून 2024 को जारी किए गए थे। उस समय ये निर्देश छह महीने के लिए, 12 दिसंबर 2024 के कारोबार बंद होने तक लागू किए गए थे।

बैंक की स्थिति और क्षेत्रीय असर

केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया कि इस विस्तार या किसी संशोधन को अपने आप में इस रूप में नहीं समझा जाना चाहिए कि वह बैंक की वित्तीय स्थिति से संतुष्ट है। संदर्भित निर्देशों की अन्य सभी शर्तें और नियम अपरिवर्तित रहते हैं।

यह कदम बेंगलुरु के सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में नियामकीय सतर्कता को रेखांकित करता है, जहां ऐसे निर्देश आम तौर पर जमाकर्ताओं के हित, संचालन नियंत्रण और जोखिम प्रबंधन के नजरिये से महत्वपूर्ण माने जाते हैं। चूंकि अवधि केवल तीन महीने के लिए बढ़ाई गई है, आगे की स्थिति RBI की समीक्षा पर निर्भर करती है।

हमारी पिछली रिपोर्ट में कर्नाटक की नई सरकार में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार द्वारा सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एलके अतीक को वित्तीय सलाहकार नियुक्त किए जाने पर चर्चा की गई थी। इसमें राजकोषीय दबावों के बीच कल्याणकारी गारंटी योजनाओं के क्रियान्वयन, बजटीय अनुशासन और बेंगलुरु-केंद्रित निवेश व बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से जुड़े नीति संकेतों पर फोकस को रेखांकित किया गया था।

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