भारत का निजी कॉरपोरेट क्षेत्र चौथी तिमाही में बिक्री वृद्धि तेज करता है
भारतीय निजी गैर-वित्तीय सूचीबद्ध कंपनियां 2025-26 की चौथी तिमाही में दो अंकों की बिक्री वृद्धि बनाए रखती हैं और यह रफ्तार पिछली तिमाही से तेज होती है। 3,266 कंपनियों के संक्षिप्त तिमाही नतीजों पर आधारित यह तस्वीर विनिर्माण, IT और गैर-IT सेवाओं में मांग की स्थिति के साथ लागत दबाव और लाभप्रदता के रुझान भी दिखाती है।
हाइलाइट्स
- भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, 2025-26 की चौथी तिमाही में निजी गैर-सरकारी गैर-वित्तीय कंपनियों की समेकित बिक्री वृद्धि 13.9 प्रतिशत रही, जो पिछली तिमाही के 10.1 प्रतिशत से अधिक है।
- विनिर्माण कंपनियों में कच्चे माल का खर्च 18.3 प्रतिशत बढ़ा और कच्चे माल-संपर्क बिक्री अनुपात 58.5 प्रतिशत तक पहुंच गया, जिससे इनपुट लागत दबाव उभरा।
- इनपुट लागत बढ़ने के कारण विनिर्माण कंपनियों की परिचालन लाभ वृद्धि घटकर 9.4 प्रतिशत रह गई, जबकि IT कंपनियों का परिचालन लाभ 14.1 प्रतिशत बढ़ा।
चौथी तिमाही के नतीजों में बिक्री और लागत रुझान
भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 की चौथी तिमाही में सूचीबद्ध निजी गैर-सरकारी गैर-वित्तीय कंपनियों की समेकित बिक्री वृद्धि सालाना आधार पर 13.9 प्रतिशत रहती है, जो पिछली तिमाही के 10.1 प्रतिशत से अधिक है। यह आंकड़े 3,266 सूचीबद्ध कंपनियों के संक्षिप्त तिमाही वित्तीय परिणामों पर आधारित हैं और इनमें तुलनात्मक अध्ययन के लिए 2025-26 की तीसरी तिमाही तथा 2024-25 की चौथी तिमाही के आंकड़े भी शामिल हैं।1,817 सूचीबद्ध निजी विनिर्माण कंपनियों की बिक्री वृद्धि 14.5 प्रतिशत तक पहुंचती है, जबकि पिछली तिमाही में यह 11.4 प्रतिशत थी। RBI के मुताबिक यह तेजी मुख्य रूप से ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिकल मशीनरी और गैर-लौह धातु उद्योगों से आती है।
IT कंपनियों की बिक्री वृद्धि 9.9 प्रतिशत तक और बेहतर होती है, जो पिछली तिमाही में 8.8 प्रतिशत थी। गैर-IT सेवा कंपनियों की बिक्री वृद्धि 20.3 प्रतिशत तक मजबूत होती है, जिसमें थोक और खुदरा व्यापार उद्योग का योगदान प्रमुख रहता है।
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच विनिर्माण कंपनियों का कच्चे माल का खर्च सालाना आधार पर 18.3 प्रतिशत बढ़ता है। कच्चे माल और बिक्री का अनुपात चौथी तिमाही में 58.5 प्रतिशत हो जाता है, जो पिछली तिमाही के 57.5 प्रतिशत से ऊपर है, और इससे इनपुट लागत दबाव का संकेत मिलता है।
विनिर्माण कंपनियों में कर्मचारी लागत वृद्धि घटकर 9.8 प्रतिशत पर आती है। सेवा क्षेत्र में गैर-IT कंपनियों की कर्मचारी लागत वृद्धि 8.9 प्रतिशत की तेज दर से बढ़ती है, जबकि IT कंपनियों में यह अनुपात व्यापक रूप से पिछली तिमाही जैसा ही रहता है।
लाभप्रदता और ऋण सेवा क्षमता पर असर
इनपुट लागत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी के बीच विनिर्माण कंपनियों की परिचालन लाभ वृद्धि घटकर 9.4 प्रतिशत रह जाती है, जबकि पिछली तिमाही में यह 11.8 प्रतिशत थी। इसके विपरीत, IT और गैर-IT सेवा कंपनियों की परिचालन लाभ वृद्धि क्रमशः 14.1 प्रतिशत और 6.5 प्रतिशत तक सुधरती है।क्रमिक आधार पर विनिर्माण कंपनियों का परिचालन लाभ मार्जिन स्थिर रहता है, जबकि सेवा क्षेत्र की कंपनियों में यह चौथी तिमाही में कुछ नरम पड़ता है। कर्मचारी लागत और बिक्री का अनुपात विनिर्माण तथा गैर-IT सेवा कंपनियों के लिए क्रमशः 5.3 प्रतिशत और 9.4 प्रतिशत तक घटता है, हालांकि IT कंपनियों में यह अनुपात मामूली बढ़ता है।
सकल लाभ में ब्याज खर्च की तुलना में अधिक क्रमिक बढ़ोतरी के कारण विनिर्माण कंपनियों का ब्याज कवरेज अनुपात 9.0 से बढ़कर 9.5 हो जाता है। गैर-IT सेवा कंपनियों का ब्याज कवरेज अनुपात 2.3 पर अपरिवर्तित रहता है, जबकि IT कंपनियों का अनुपात चौथी तिमाही में भी ऊंचे स्तर पर बना रहता है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में मई 2026 में भारत की थोक महंगाई (WPI) के 9.68% तक तेज होने और इसके पीछे ईंधन व ऊर्जा कीमतों से आए दबाव पर चर्चा की गई थी। उस लेख में नई 2022-23 आधार वर्ष वाली WPI श्रृंखला, वस्तुओं के कवरेज व पद्धति में बदलाव, और सरकार की आगे चलकर WPI की जगह PPI को अपनाने की योजना का भी उल्लेख था।
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