RBI 29 जून को 75,000 करोड़ रुपये की दो-दिवसीय वीआरआर नीलामी आयोजित करेगा

RBI 29 जून को 75,000 करोड़ रुपये की दो-दिवसीय वीआरआर नीलामी आयोजित करेगा
RBI की वीआरआर नीलामी

भारतीय बैंकिंग तंत्र में तरलता की मौजूदा और बदलती स्थिति की समीक्षा के बाद RBI ने 29 जून 2026 को दो-दिवसीय Variable Rate Repo, वीआरआर, नीलामी कराने का फैसला किया है। यह कदम 75,000 करोड़ रुपये की राशि के लिए होगा और इसकी रिवर्सल 1 जुलाई 2026 को निर्धारित है।

हाइलाइट्स

  • RBI 29 जून 2026 को 75,000 करोड़ रुपये की दो-दिवसीय वीआरआर नीलामी Liquidity Adjustment Facility के तहत आयोजित करेगा।
  • नीलामी की अवधि सुबह 9:30 बजे से 10:00 बजे तक रहेगी और रिवर्सल 1 जुलाई 2026 को निर्धारित है।
  • नीलामी संचालन के दिशा-निर्देश 20 जनवरी 2022 की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार होंगे, जिससे मार्केट प्रक्रिया में स्थिरता बनी रहेगी।

तरलता प्रबंधन के लिए नीलामी योजना

Reserve Bank of India की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह वीआरआर नीलामी 29 जून 2026, सोमवार को Liquidity Adjustment Facility, LAF, के तहत आयोजित की जाएगी। नीलामी की समयावधि सुबह 9:30 बजे से 10:00 बजे तक रहेगी और इसकी अवधि दो दिन होगी।

अधिसूचित राशि 75,000 करोड़ रुपये तय की गई है। RBI ने कहा है कि इस परिचालन का उद्देश्य मौजूदा और विकसित होती तरलता स्थितियों के अनुरूप प्रणाली में अल्पकालिक धन उपलब्ध कराना है।

बाजार संचालन और परिचालन नियम

केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि इस नीलामी के परिचालन दिशा-निर्देश 20 जनवरी 2022 की Reserve Bank प्रेस विज्ञप्ति 2021-2022/1572 के समान रहेंगे। इससे बाजार सहभागियों को प्रक्रिया, पात्रता और बोली व्यवस्था में निरंतरता मिलेगी।

इस नीलामी के तहत डाली गई राशि की रिवर्सल 1 जुलाई 2026, बुधवार को होगी। घोषणा पर Ajit Prasad, उप महाप्रबंधक, Communications, के हस्ताक्षर हैं और इसे प्रेस विज्ञप्ति संख्या 2026-2027/549 के रूप में जारी किया गया है।

हमारी पिछली रिपोर्ट में भारतीय शेयर बाजार में ऊंचे वैल्यूएशन और पूंजी की ऊंची लागत के बीच बन रहे तनाव पर चर्चा की गई थी, जहां करीब 7% जोखिम-मुक्त दर और 5–6% जोखिम प्रीमियम से अपेक्षित रिटर्न की दहलीज बढ़ जाती है। हमने यह भी बताया था कि घरेलू निवेशकों के सीमित विकल्प और विदेशी पूंजी की वैश्विक गतिशीलता के कारण कीमतों और वास्तविक आय क्षमता के बीच अंतर बढ़ सकता है, जिससे आगे चलकर बाजार और बाहरी संतुलन पर दबाव की आशंका बनती है।

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