राज्यों ने एसजीएस नीलामी में 21,350 करोड़ रुपये जुटाए
भारतीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की उधारी गतिविधि में ताजा राज्य सरकारी प्रतिभूति नीलामी के जरिए कुल 21,350 करोड़ रुपये स्वीकार किए जाते हैं। इस इश्यू में बिहार, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल समेत कई उधारकर्ताओं की नई प्रतिभूतियां और पुनः जारी बॉन्ड शामिल हैं।
हाइलाइट्स
- राज्य सरकारों ने 21,350 करोड़ रुपये की अंतिम बोली के साथ आरबीआई एसजीएस नीलामी में पूरी घोषित राशि जुटाई।
- पश्चिम बंगाल ने कुल 4,700 करोड़ रुपये की उधारी और उत्तर प्रदेश ने 3,000 करोड़ रुपये सहित सर्वोच्च उधारी कार्यकम किए।
- नई प्रतिभूतियों की यील्ड 7.07% से 7.64% के बीच रही, जबकि पुनः निर्गम और लंबी अवधि के बॉन्ड्स की मांग मजबूत दिखी।
नीलामी के नतीजे और उधारी संरचना
भारतीय रिजर्व बैंक की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, राज्य सरकारी प्रतिभूतियों की यील्ड या मूल्य आधारित नीलामी में कुल 21,350 करोड़ रुपये के लिए बोली स्वीकृत की जाती है, जो घोषित उगाही राशि के बराबर है। नीलामी में कई राज्यों ने अलग-अलग अवधि की प्रतिभूतियां जारी कीं, जबकि कुछ ने पहले जारी बॉन्ड का पुनः निर्गम किया।
बिहार ने 800 करोड़ रुपये और 1,200 करोड़ रुपये जुटाए, जिसमें दूसरी किश्त 7.92% बिहार एसजीएस 2051 के पुनः निर्गम के रूप में है। जम्मू और कश्मीर ने 500 करोड़ रुपये की नई प्रतिभूति के साथ 500 करोड़ रुपये का 7.91% एसजीएस 2046 पुनः जारी किया, जबकि मध्य प्रदेश ने 1,600 करोड़ रुपये की 18 वर्षीय प्रतिभूति और 2,000 करोड़ रुपये का 7.90% एसजीएस 2056 पुनः निर्गम किया। तेलंगाना ने 1,500 करोड़ रुपये के 7.97% एसजीएस 2043 और 1,500 करोड़ रुपये के 8.07% एसजीएस 2056 का पुनः निर्गम किया।
उत्तर प्रदेश ने 6 वर्ष, 16 वर्ष और 2051 परिपक्वता वाले पुनः निर्गम सहित तीन किस्तों में कुल 3,000 करोड़ रुपये जुटाए। पश्चिम बंगाल ने 5 वर्ष, 18 वर्ष और 26 वर्ष की प्रतिभूतियों के जरिए कुल 4,700 करोड़ रुपये स्वीकार किए, जो इस नीलामी में सबसे बड़े उधारी कार्यक्रमों में से एक है।
राज्यों की फंडिंग लागत और बाजार संकेत
नीलामी के नतीजे दिखाते हैं कि राज्यों की उधारी लागत अलग-अलग अवधि और क्रेडिट मांग के अनुसार बदलती है। नई प्रतिभूतियों में यील्ड मोटे तौर पर 7.07% से 7.64% के दायरे में रहती है, जबकि पुनः निर्गम वाले कुछ बॉन्ड मूल्य आधारित कट-ऑफ पर स्वीकृत किए जाते हैं।केरल, झारखंड, चhattisgarh, हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, सिक्किम, उत्तराखंड और अन्य उधारकर्ताओं की स्वीकृतियां भी पूरी घोषित राशि के बराबर रहती हैं, जिससे संकेत मिलता है कि नीलामी में मांग पर्याप्त है। राज्यों द्वारा लंबी अवधि के बॉन्ड, खासकर 18 वर्ष, 26 वर्ष और 2056 तक की परिपक्वता वाले पुनः निर्गम, यह दिखाते हैं कि सब-सॉवरेन बाजार में लंबी अवधि की फंडिंग अभी भी सक्रिय है।
NSE के प्रस्तावित IPO और 17 जून को दायर DRHP से जुड़ी मूल्यांकन व वृद्धि की बहस पर हम पहले लिख चुके हैं। उस लेख में बताया गया था कि एक्सचेंज की मजबूत बाजार हिस्सेदारी और ऊंची लाभप्रदता के बावजूद निवेशकों की नजर अगली ग्रोथ, राजस्व विविधीकरण और नियामकीय/गवर्नेंस जोखिमों पर है।
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