RBI की तरलता परिचालन रिपोर्ट में 11 अक्टूबर को 3.78 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध अवशोषण दिखा

RBI की तरलता परिचालन रिपोर्ट में 11 अक्टूबर को 3.78 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध अवशोषण दिखा
RBI का तरलता अवशोषण

भारतीय बैंकिंग तंत्र में अल्पकालिक तरलता की स्थिति 11 अक्टूबर 2026 को भी अधिशेष में बनी रहती है, जिसमें केंद्रीय बैंक की दैनिक और बकाया सुविधाओं के जरिए बड़ी मात्रा में धन का अवशोषण दिखता है। इसी दिन स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी के तहत 1,41,354 करोड़ रुपये और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी के तहत 864 करोड़ रुपये दर्ज होते हैं, जबकि कुल शुद्ध तरलता अवशोषण 3,77,856.90 करोड़ रुपये पर पहुंचता है।

हाइलाइट्स

  • 11 अक्टूबर 2026 को RBI की तरलता परिचालन रिपोर्ट में कुल शुद्ध अवशोषण 3,77,856.90 करोड़ रुपये रिकॉर्ड हुआ।
  • बाजार के सभी कॉल मनी, ट्राइपार्टी रेपो, मार्केट रेपो और कॉरपोरेट बॉन्ड सेगमेंट्स में शून्य लेनदेन दर्ज, अल्पकालिक फंडिंग मुख्यतः RBI सुविधाओं से संतुलित।
  • 11 अक्टूबर तक अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की RBI के पास नकद शेष 7,84,585.44 करोड़ रुपये व औसत दैनिक नकद आरक्षित आवश्यकता 8,17,219 करोड़ रुपये रही।

11 अक्टूबर के तरलता परिचालन और दरें

जैसा कि Reserve Bank of India ने RBI की प्रेस विज्ञप्ति 2026-2027/1310 का हवाला देते हुए बताया है, 11 अक्टूबर 2026 के मनी मार्केट ऑपरेशंस में ओवरनाइट और टर्म मनी के सभी दर्शाए गए बाजार खंडों, जिनमें कॉल मनी, ट्राइपार्टी रेपो, मार्केट रेपो और कॉरपोरेट बॉन्ड में रेपो शामिल हैं, में शून्य लेनदेन दर्ज होता है। इसके साथ ही ध्यान केंद्रीय बैंक की तरलता समायोजन सुविधाओं पर रहता है, जहां दिन के परिचालनों में स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी 1,41,354 करोड़ रुपये पर 5.25 प्रतिशत और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी 864 करोड़ रुपये पर 5.75 प्रतिशत दिखती है।

इन दैनिक परिचालनों से शुद्ध तरलता, इंजेक्शन और अवशोषण के RBI के मानक सूत्र के आधार पर, 1,40,490 करोड़ रुपये का शुद्ध अवशोषण दिखाती है। बकाया परिचालनों में 9 अक्टूबर की 3-दिवसीय, 10-दिवसीय और 29-दिवसीय वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो नीलामियों के तहत क्रमशः 1,39,847 करोड़ रुपये, 18,170 करोड़ रुपये और 79,655 करोड़ रुपये 5.49 प्रतिशत की कट-ऑफ दर पर बने रहते हैं।

बकाया सुविधाओं में 9 अक्टूबर की 3-दिवसीय SDF के तहत 3,252 करोड़ रुपये 5.25 प्रतिशत पर दर्ज हैं, जबकि 10 अक्टूबर और 9 अक्टूबर की MSF प्रविष्टियां शून्य रहती हैं। RBI के आंकड़ों में स्टैंडिंग लिक्विडिटी फैसिलिटी के तहत 3,557.10 करोड़ रुपये भी दर्शाए गए हैं, और बकाया परिचालनों से शुद्ध तरलता अवशोषण 2,37,366.90 करोड़ रुपये निकलता है। दैनिक और बकाया दोनों को मिलाकर कुल शुद्ध तरलता अवशोषण 3,77,856.90 करोड़ रुपये पर पहुंचता है।

बैंकिंग प्रणाली और नकद आरक्षित स्थिति पर असर

यह तस्वीर बताती है कि बैंकिंग प्रणाली में अधिशेष धनराशि को RBI की सुविधाओं के माध्यम से सोखा जा रहा है, न कि बाजार के बिना गारंटी वाले या रेपो खंडों में सक्रिय लेनदेन के जरिए। बाजार खंडों में शून्य वॉल्यूम और केंद्रीय बैंक सुविधाओं में बड़ी रकम इस बात का संकेत देती है कि अल्पकालिक फंडिंग की जरूरतें मुख्यतः RBI की खिड़कियों के जरिये संतुलित हो रही हैं।

आरक्षित स्थिति के आंकड़ों में 11 अक्टूबर 2026 तक अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की RBI के पास नकद शेष 7,84,585.44 करोड़ रुपये दिखता है। 15 अक्टूबर 2026 को समाप्त होने वाले पखवाड़े के लिए औसत दैनिक नकद आरक्षित आवश्यकता 8,17,219 करोड़ रुपये है, जबकि 9 अक्टूबर 2026 तक नीलामी के लिए मानी गई भारत सरकार की अधिशेष नकद शेषराशि शून्य है। RBI के डेटा में 15 सितंबर 2026 तक शुद्ध टिकाऊ तरलता 13,93,819 करोड़ रुपये के अधिशेष के रूप में दर्ज है, जो प्रणाली में व्यापक तरलता समर्थन की पृष्ठभूमि को रेखांकित करती है।

हमारी पहले की रिपोर्ट में आरबीआई की अक्टूबर मौद्रिक नीति बैठक पर फोकस था, जहां बढ़ती खुदरा महंगाई, 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कच्चे तेल और रुपये पर दबाव के बीच रेपो दर में संभावित बढ़ोतरी को लेकर बाजार की उम्मीदें चर्चा में थीं। उस लेख में यह भी बताया गया था कि निवेशक न सिर्फ नीतिगत फैसले, बल्कि आगे की सख्ती के संकेतों और उधारी लागत पर संभावित असर को लेकर भी सतर्क नजर बनाए हुए हैं।

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