आरबीआई ट्रेजरी बिल नीलामी का कट-ऑफ तय, 364-दिवसीय यील्ड 6.4891% पर

आरबीआई ट्रेजरी बिल नीलामी का कट-ऑफ तय, 364-दिवसीय यील्ड 6.4891% पर
ट्रेजरी बिल कट-ऑफ जारी

भारतीय मुद्रा बाजार में अल्पावधि सरकारी उधारी के ताजा संकेतों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक 91-दिवसीय, 182-दिवसीय और 364-दिवसीय ट्रेजरी बिल नीलामी के कट-ऑफ परिणाम जारी करता है। तीनों अवधियों में अधिसूचित पूरी राशि स्वीकार की जाती है, जिससे कुल 23,000 करोड़ रुपये की उधारी इस नीलामी के जरिए पूरी होती है।

हाइलाइट्स

  • भारतीय रिजर्व बैंक ने 91-दिवसीय, 182-दिवसीय और 364-दिवसीय ट्रेजरी बिल नीलामी में क्रमशः 8,000 करोड़ रुपये, 8,000 करोड़ रुपये और 7,000 करोड़ रुपये की पूरी अधिसूचित राशि स्वीकार की।
  • 364-दिवसीय ट्रेजरी बिल के लिए कट-ऑफ यील्ड 6.4891% रहा, जबकि 91-दिवसीय और 182-दिवसीय बिल के लिए यह क्रमशः 5.7281% और 6.2896% रहा।
  • अधिक अवधि वाले टी-बिल्स पर ऊंची यील्ड और पूरी अधिसूचित राशि की स्वीकृति अल्पकालिक सरकारी उधारी की लागत और मनी मार्केट धारणा का प्रमुख संकेत है।

नीलामी परिणाम और स्वीकृत राशि

Reserve Bank of India की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 91-दिवसीय, 182-दिवसीय और 364-दिवसीय ट्रेजरी बिल नीलामी में क्रमशः 8,000 करोड़ रुपये, 8,000 करोड़ रुपये और 7,000 करोड़ रुपये का कुल अंकित मूल्य अधिसूचित किया जाता है। केंद्रीय बैंक इन तीनों श्रेणियों में पूरी अधिसूचित राशि स्वीकार करता है।

91-दिवसीय टी-बिल के लिए कट-ऑफ मूल्य 98.5920 रुपये तय किया जाता है, जिस पर निहित प्रतिफल 5.7281% है। 182-दिवसीय टी-बिल के लिए कट-ऑफ मूल्य 96.9592 रुपये और प्रतिफल 6.2896% रहता है, जबकि 364-दिवसीय टी-बिल का कट-ऑफ मूल्य 93.9220 रुपये और निहित प्रतिफल 6.4891% तय किया जाता है।

बाजार संकेत और उधारी पर असर

इन परिणामों से यह संकेत मिलता है कि लंबी परिपक्वता वाले टी-बिल पर प्रतिफल अल्पावधि प्रतिभूतियों की तुलना में अधिक बना रहता है, जो निवेशकों की अवधि-आधारित मूल्य निर्धारण को दर्शाता है। 364-दिवसीय टी-बिल की 6.4891% प्रतिफल इस नीलामी में सबसे ऊंचे स्तर पर रहती है।

ट्रेजरी बिल नीलामी के ये कट-ऑफ स्तर अल्पकालिक सरकारी उधारी लागत और मनी मार्केट की धारणा के प्रमुख संकेतक होते हैं। पूरी अधिसूचित राशि की स्वीकृति यह भी दिखाती है कि आरबीआई इस दौर में नियोजित अल्पावधि उधारी कार्यक्रम को तय आकार में पूरा करता है।

हमारी पिछली रिपोर्ट में Q3 FY2027 के लिए राज्यों की बाजार उधारी और एसजीएस निर्गम के बढ़ते अनुमान पर चर्चा की गई थी। इसमें आरबीआई के नीलामी कैलेंडर के आधार पर सकल एसजीएस निर्गम, रिडेम्प्शन के बाद शुद्ध निर्गम, और प्रमुख राज्यों के योगदान व बेंचमार्क इश्यूअंस स्ट्रैटेजी (BIS) के विस्तार जैसे रुझानों को रेखांकित किया गया था।

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