Ashutosh Sureka

RBI 15 अक्टूबर को 50,000 करोड़ रुपये की एकदिवसीय VRRR नीलामी करेगा

RBI 15 अक्टूबर को 50,000 करोड़ रुपये की एकदिवसीय VRRR नीलामी करेगा
RBI की बड़ी VRRR नीलामी

भारतीय रिजर्व बैंक मौजूदा और बदलती तरलता स्थितियों की समीक्षा के बाद 15 अक्टूबर 2026 को तरलता समायोजन सुविधा के तहत एकदिवसीय वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो नीलामी आयोजित करेगा। यह कदम 50,000 करोड़ रुपये की अधिसूचित राशि के लिए है और इसकी वापसी 16 अक्टूबर 2026, शुक्रवार को निर्धारित है।

हाइलाइट्स

  • RBI 15 अक्टूबर 2026 को 50,000 करोड़ रुपये की एकदिवसीय VRRR नीलामी 9:30-10:00 बजे के बीच आयोजित करेगा।
  • नीलामी में स्वीकृत धनराशि की वापसी 16 अक्टूबर 2026 को होगी और संचालन 13 फरवरी 2020 के नियमों के अनुरूप रहेगा।
  • यह कदम RBI द्वारा बैंकों से अल्पावधि अधिशेष धनराशि अवशोषित कर प्रणालीगत तरलता प्रबंधन को लक्षित करने के लिए लिया गया है।

तरलता प्रबंधन के लिए नीलामी कार्यक्रम

RBI की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, केंद्रीय बैंक 15 अक्टूबर 2026, गुरुवार को सुबह 9:30 बजे से 10:00 बजे तक यह VRRR नीलामी आयोजित करेगा। यह एक दिन की अवधि की नीलामी होगी, जिसमें 50,000 करोड़ रुपये की अधिसूचित राशि रखी गई है।

VRRR नीलामी के जरिए RBI बैंकों से अल्पावधि अधिशेष धनराशि अवशोषित करता है, जिससे प्रणाली में तरलता प्रबंधन को समायोजित किया जा सके। इस नीलामी के तहत स्वीकृत धनराशि की वापसी 16 अक्टूबर 2026 को होगी।

संचालन नियम और नीतिगत संदर्भ

केंद्रीय बैंक ने कहा कि इस नीलामी के लिए परिचालन दिशानिर्देश वही रहेंगे जो 13 फरवरी 2020 की प्रेस विज्ञप्ति संख्या 2019-2020/1947 में निर्धारित किए गए थे। इससे संकेत मिलता है कि RBI मौजूदा ढांचे के भीतर ही अल्पकालिक तरलता संचालन को आगे बढ़ा रहा है।

यह घोषणा RBI के संचार विभाग की ओर से उप महाप्रबंधक अजीत प्रसाद के नाम से जारी प्रेस विज्ञप्ति 2026-2027/1327 में की गई। वित्तीय क्षेत्र के लिए यह कदम निकट अवधि की धन बाज़ार स्थितियों और बैंकिंग प्रणाली की तरलता पर RBI की सतत निगरानी को दर्शाता है।

हमारी पिछली रिपोर्ट में आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति के अक्टूबर फैसले पर फोकस था, जहां बढ़ती खुदरा महंगाई, 100 डॉलर प्रति बैरल के पार कच्चे तेल और रुपये पर दबाव के बीच रेपो दर में संभावित बढ़ोतरी को लेकर बाजार की नजरें टिकी थीं। रिपोर्ट में बताया गया था कि यदि दर बढ़ती है तो उधारी लागत और बैंक ऋण दरों पर असर पड़ सकता है, साथ ही आगे की नीतिगत दिशा के संकेत भी अहम रहेंगे।

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