RBI ने प्राथमिकता क्षेत्र ऋण दिशानिर्देशों के मसौदे पर टिप्पणियां मांगी
भारतीय बैंकिंग विनियमन ढांचे में एकीकृत नियमावली की दिशा में Reserve Bank of India ने प्राथमिकता क्षेत्र ऋण, यानी PSL, से जुड़ी मौजूदा गाइडलाइंस की समीक्षा शुरू की है। यह कदम अलग-अलग विनियमित संस्थाओं के लिए 2026 के नए मसौदा निर्देश जारी करने की तैयारी के साथ आता है और इन पर 26 नवंबर 2026 तक सार्वजनिक प्रतिक्रिया मांगी गई है।
हाइलाइट्स
- RBI ने सभी बैंकों के प्राथमिकता क्षेत्र ऋण के लक्ष्य और वर्गीकरण से जुड़े निर्देशों पर एकीकृत मसौदा जारी कर 26 नवंबर 2026 तक टिप्पणियां मांगी।
- अंतिम समेकित निर्देश जारी होने पर पुराने विरोधाभासी दिशानिर्देश निरस्त कर दिए जाएंगे और इसके लिए बैंकों को अलग से सूचित किया जाएगा।
- नए निर्देश अनुपालन, रिपोर्टिंग और श्रेणीकरण में स्पष्टता लाने के साथ बैंकिंग संस्थानों में आंतरिक प्रक्रियाओं की व्यापक समीक्षा की आवश्यकता पैदा करेंगे।
मसौदा निर्देशों का दायरा और समयसीमा
Reserve Bank of India की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, केंद्रीय बैंक ने समय-समय पर जारी विभिन्न निर्देशों के एकीकरण के तहत प्राथमिकता क्षेत्र ऋण से संबंधित मौजूदा दिशानिर्देशों की समीक्षा की है और विषय पर RE-वार निर्देश जारी करने का प्रस्ताव रखा है। इसी क्रम में मसौदा निर्देश सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए वेबसाइट पर डाले गए हैं।इन मसौदों में वाणिज्यिक बैंकों, Small Finance Banks, Local Area Banks, Regional Rural Banks और Urban Co-operative Banks के लिए प्राथमिकता क्षेत्र ऋण लक्ष्य और वर्गीकरण से जुड़े अलग-अलग 2026 निर्देश शामिल हैं। RBI ने कहा है कि जो निर्देश इन समेकित मसौदा दिशानिर्देशों में शामिल नहीं किए गए हैं, उन्हें अंतिम निर्देश जारी होने के बाद निरस्त किया जाएगा और इसकी अलग से सूचना दी जाएगी.
हितधारक 26 नवंबर 2026 तक अपनी टिप्पणियां RBI की वेबसाइट के 'Connect 2 Regulate' खंड के जरिए या ई-मेल से भेज सकते हैं। ई-मेल के विषय में संबंधित मसौदा निर्देश का पूरा नाम, जिसमें विनियमित इकाई का प्रकार भी शामिल हो, लिखना होगा।
बैंकों और नियामकीय अनुपालन पर संभावित असर
यह परामर्श प्रक्रिया बैंकों और अन्य विनियमित संस्थाओं के लिए प्राथमिकता क्षेत्र ऋण अनुपालन को अधिक स्पष्ट और श्रेणीवार ढांचे में ला सकती है। अलग-अलग इकाइयों के लिए लक्ष्य और वर्गीकरण को पृथक निर्देशों में समेटने से अनुपालन, रिपोर्टिंग और नियामकीय व्याख्या में अधिक एकरूपता आने की संभावना है।भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में PSL ढांचा कृषि, सूक्ष्म और लघु उद्यमों तथा अन्य निर्दिष्ट क्षेत्रों तक ऋण प्रवाह के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में अंतिम निर्देश जारी होने के बाद संस्थानों को अपने आंतरिक अनुपालन ढांचे, वर्गीकरण प्रक्रियाओं और रिपोर्टिंग व्यवस्थाओं की समीक्षा करनी पड़ सकती है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में भारतीय बैंकों में अप्रत्यक्ष एवरग्रीनिंग की प्रथा और इसके जरिए खराब ऋणों की पहचान टालने के तरीके पर चर्चा की गई थी। लेख में बताया गया था कि संबंधित पक्षों के जरिए धन घुमाकर ऋण वसूली का आभास पैदा किया जाता है, जबकि ऐसे ऋण अपेक्षाकृत अधिक डिफॉल्ट-प्रवण होते हैं और इससे बैंकिंग प्रणाली की वित्तीय स्थिरता पर जोखिम बढ़ सकता है।
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