भारत ने वाणिज्यिक एलपीजी आवंटन 70% तक बढ़ाया, आतिथ्य और उद्योगों को राहत

भारत ने वाणिज्यिक एलपीजी आवंटन 70% तक बढ़ाया, आतिथ्य और उद्योगों को राहत
एलपीजी आवंटन में बढ़ोतरी

केंद्र सरकार के आधिकारिक पत्र के अनुसार, शुक्रवार को राज्यों के लिए वाणिज्यिक एलपीजी का आवंटन पूर्व-संकट स्तर की 70% मांग तक बढ़ा दिया जाता है, जिससे आपूर्ति दबाव झेल रहे उद्योगों और आतिथ्य क्षेत्र को राहत मिलती है। यह अतिरिक्त 20% बढ़ोतरी पहले से लागू 50% आवंटन के ऊपर आती है और राज्यों को श्रम-प्रधान उद्योगों को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया जाता है। सरकार ने साथ ही पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क भी घटाया है, जो व्यापक ऊर्जा लागत दबाव को कम करने की कोशिश को दिखाता है।

हाइलाइट्स

  • भारत सरकार ने वाणिज्यिक और औद्योगिक एलपीजी आवंटन 70% तक बढ़ाया, जिसमें 10% सुधार-आधारित आवंटन शामिल है, श्रम-प्रधान और प्राथमिकता क्षेत्रों को समर्थन मिलेगा।
  • पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये की कटौती की गई, जिससे पेट्रोल पर शुल्क 3 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर शून्य हो गया, जबकि डीजल निर्यात पर विंडफॉल टैक्स 21.5 रुपये प्रति लीटर तय हुआ।
  • ऊर्जा लागत और आपूर्ति स्थिरता के लिए उठाए गए इन कदमों का आतिथ्य, विनिर्माण और श्रम-प्रधान क्षेत्रों पर सकारात्मक लागत-संचालन प्रभाव पड़ सकता है।

राज्यों के लिए बढ़ा आवंटन और प्राथमिकता योजना

तेल सचिव नीरज मित्तल के अनुसार, वाणिज्यिक और औद्योगिक एलपीजी आवंटन अब 70% तक पहुंचता है, जिसमें 10% सुधार-आधारित आवंटन भी शामिल है। राज्यों के मुख्य सचिवों को भेजे गए पत्र में कहा जाता है कि अतिरिक्त आपूर्ति उन उद्योगों को दी जाए जो श्रम-प्रधान हैं और अन्य आवश्यक क्षेत्रों को समर्थन देते हैं। पत्र में इस्पात, ऑटोमोबाइल, वस्त्र, डाई, रसायन और प्लास्टिक जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता सूची में रखा जाता है।

सरकार यह भी स्पष्ट करती है कि प्राथमिकता उन प्रोसेस उद्योगों को मिलेगी जिन्हें विशेष तापीय उपयोग के लिए एलपीजी चाहिए और जहां प्राकृतिक गैस उसका विकल्प नहीं बन सकती। राज्यों से कहा जाता है कि यदि उन्होंने अभी तक 10% सुधार-आधारित आवंटन का उपयोग नहीं किया है तो उसे तुरंत लिया जाए। इस कदम का उद्देश्य आपूर्ति में सुधार के साथ औद्योगिक परिचालन को सहारा देना है।

ईंधन शुल्क में कटौती से लागत दबाव कम करने की कोशिश

सरकार शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये की कटौती भी करती है। इसके बाद पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 3 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर शून्य हो जाता है। डीजल के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स 21.5 रुपये प्रति लीटर तय किया जाता है।

ये फैसले ऐसे समय पर आते हैं जब वैश्विक कच्चे तेल की ऊंची कीमतें ऊर्जा लागत और उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ाती हैं। शुल्क में कमी और एलपीजी आवंटन बढ़ाने का संयुक्त असर परिवहन, विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों के परिचालन खर्च पर पड़ सकता है। आतिथ्य क्षेत्र के लिए यह खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि वाणिज्यिक एलपीजी उसकी रोजमर्रा की लागत का प्रमुख हिस्सा रहती है।

ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार का संदेश और क्षेत्रीय असर

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी इन फैसलों की सराहना करते हुए भारत को ऊर्जा सुरक्षा, उपलब्धता और वहनीयता का केंद्र बताते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने ऐसे समय में आपूर्ति स्थिरता और वहनीयता को प्राथमिकता दी है जब कई देश ईंधन बचत के कड़े उपाय अपना रहे हैं। उनके अनुसार, वाणिज्यिक एलपीजी आवंटन में बढ़ोतरी उन उद्योगों को सहारा देती है जहां पाइप्ड गैस व्यवहार्य विकल्प नहीं है।

इस नीति का असर आतिथ्य, विनिर्माण और श्रम-प्रधान औद्योगिक इकाइयों पर सबसे अधिक दिख सकता है। बेहतर एलपीजी उपलब्धता से उत्पादन बाधाएं कम हो सकती हैं और आवश्यक आपूर्ति शृंखलाओं को समर्थन मिल सकता है। यदि राज्य प्राथमिकता निर्देशों को तेजी से लागू करते हैं, तो इसका लाभ उन क्षेत्रों तक पहुंचता है जो रोजगार और औद्योगिक गतिविधि दोनों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

हमने पहले वैश्विक कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव के बीच सरकार की ईंधन कीमत प्रबंधन रणनीति पर रिपोर्ट किया था। उस रिपोर्ट में पेट्रोल-डीजल पर कर राजस्व त्याग, घरेलू बाजार को प्राथमिकता देने के लिए निर्यात कर जैसे उपाय, और ऊर्जा सुरक्षा के तहत आयात स्रोतों के पुनर्संतुलन (रूसी आपूर्ति पर बातचीत सहित) के संभावित असर को रेखांकित किया गया था।

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