केरल विधानसभा चुनाव से एक सप्ताह पहले, 2 अप्रैल को जारी घोषणापत्रों के अनुसार सत्तारूढ़ एलडीएफ और विपक्षी यूडीएफ पेंशन, नकद सहायता, रोजगार और बुनियादी ढांचा निवेश के मोर्चे पर अपनी पेशकश तेज कर रहे हैं। लेख में कहा गया है कि 9 अप्रैल की वोटिंग और 4 मई की मतगणना से पहले दोनों गठबंधन कल्याण प्रतिस्पर्धा को केंद्र में रख रहे हैं। मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 23 मई को समाप्त होना है, इसलिए ये वादे सरकार गठन की दौड़ में निर्णायक माने जा रहे हैं।
हाइलाइट्स
- एलडीएफ ने सार्वभौमिक पेंशन 3,000 रुपये तक, 2 लाख करोड़ रुपये निवेश, 60,000 नौकरियां और 1 लाख एमएसएमई को 1 करोड़ रुपये टर्नओवर मिशन का वादा किया।
- यूडीएफ ने प्रति माह 6,000 रुपये एनवाईएवाई सहायता, 25 लाख रुपये स्वास्थ्य बीमा, महिलाओं हेतु मुफ्त यात्रा और किसानों के लिए रबर 250 रुपये किलो समर्थन मूल्य का वादा किया।
- दोनों गठबंधनों के वादों के लागू होने से केरल के राजकोष, सार्वजनिक सेवाओं और निवेश प्राथमिकताओं पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।
घोषणापत्र में कल्याण और निवेश की प्रतिस्पर्धा
एलडीएफ अपने 'घोषणापत्र' नव केरलम' विजन के तहत सार्वभौमिक कल्याण पेंशन को 3,000 रुपये प्रति माह तक बढ़ाने, 5 लाख सबसे गरीब परिवारों की लक्षित सहायता और बुजुर्गों व बिस्तर पर रहने वाले मरीजों के लिए जिला स्तरीय एकीकृत देखभाल की बात कर रहा है। गठबंधन 60,000 नौकरियों, सभी स्नातकों के लिए कौशल कार्यक्रम, 20 लाख गृहिणियों के आर्थिक सशक्तिकरण और 1 लाख एमएसएमई को 1 करोड़ रुपये टर्नओवर तक पहुंचाने के मिशन को भी आगे बढ़ा रहा है। इसके साथ ही 2 लाख करोड़ रुपये निवेश, औद्योगिक कॉरिडोर, विजिनजम औद्योगिक टाउनशिप, तेज उत्तर-दक्षिण रेल और बिजली कटौती-मुक्त राज्य जैसे बुनियादी ढांचा वादे भी शामिल हैं।
यूडीएफ अपनी '5+1 गारंटी' और एनवाईएवाई योजना के जरिए गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों को 6,000 रुपये मासिक सहायता देने का वादा कर रहा है। गठबंधन पेंशन को चरणबद्ध तरीके से 3,000 रुपये तक बढ़ाने, पीले राशन कार्ड धारकों के लिए मुफ्त किट और 25 लाख रुपये के पारिवारिक स्वास्थ्य बीमा का प्रस्ताव रख रहा है। इसके अलावा महिलाओं के लिए मुफ्त केएसआरटीसी यात्रा, कॉलेज छात्राओं को 1,000 रुपये मासिक, युवा उद्यमियों के लिए ब्याज-मुक्त ऋण और वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग मंत्रालय जैसी पेशकशें भी शामिल हैं।
रोजगार, किसान और स्वास्थ्य पर अलग-अलग जोर
रोजगार के मोर्चे पर एलडीएफ इस शैक्षिक वर्ष में 60,000 नौकरियों, कैंपस प्लेसमेंट और 'बैक टू कैंपस' कौशल कार्यक्रमों पर जोर दे रहा है, जबकि यूडीएफ पांच वर्षों में 5 लाख युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने और छोटे कारोबारों के लिए 5 लाख रुपये तक ब्याज-मुक्त ऋण का वादा कर रहा है। एमएसएमई क्षेत्र में एलडीएफ उन्नयन कार्यक्रम की बात करता है, वहीं यूडीएफ 100 करोड़ रुपये टर्नओवर तक सहायता का प्रस्ताव रख रहा है। दोनों घोषणापत्र रोजगार को चुनावी मुकाबले का केंद्रीय आर्थिक मुद्दा बना रहे हैं।
किसानों के लिए एलडीएफ कमजोर समूहों की सहायता और ग्रामीण रोजगार योजनाओं को बनाए रखने की बात कर रहा है। यूडीएफ रबर के लिए 250 रुपये प्रति किलोग्राम और धान के लिए 35 रुपये प्रति किलोग्राम का समर्थन मूल्य देने का वादा कर रहा है, साथ ही आवास योजनाओं में सुधार की बात भी कर रहा है। स्वास्थ्य क्षेत्र में एलडीएफ जिला स्तर पर देखभाल और महामारी पूर्वानुमान प्रणालियों पर ध्यान दे रहा है, जबकि यूडीएफ करुण्य सुधार, हर पंचायत में डायलिसिस केंद्र और विस्तारित बीमा कवर को प्रमुखता दे रहा है।
चुनावी प्रभाव और नीति संकेत
दोनों मोर्चों ने पेंशन को 3,000 रुपये तक ले जाने का लक्ष्य रखा है, लेकिन यूडीएफ का एनवाईएवाई प्रस्ताव सबसे गरीब परिवारों के लिए अतिरिक्त प्रत्यक्ष नकद सहायता देकर प्रतिस्पर्धा को और तेज करता है। दूसरी ओर एलडीएफ का फोकस कल्याण के साथ बड़े निवेश, परिवहन और औद्योगिक विस्तार को जोड़कर विकास मॉडल पेश करने पर है। इससे चुनावी बहस केवल सामाजिक सुरक्षा तक सीमित नहीं रहती, बल्कि राज्य की दीर्घकालिक आर्थिक दिशा पर भी केंद्रित होती है।
9 अप्रैल को मतदान और 4 मई को नतीजों के बीच घोषणापत्रों की यह प्रतिस्पर्धा इस बात का संकेत देती है कि केरल में कल्याण, महिलाओं की भागीदारी, युवाओं के लिए नौकरियां और किसान समर्थन प्रमुख नीति मुद्दे बने हुए हैं। यदि इन वादों को लागू किया जाता है, तो राज्य के राजकोष, सार्वजनिक सेवाओं और निवेश प्राथमिकताओं पर बड़ा असर पड़ सकता है। यही कारण है कि यह मुकाबला केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि व्यापक आर्थिक नीति का भी परीक्षण बन रहा है।
हमने पहले केरल विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा नीत एनडीए के आधिकारिक घोषणापत्र में किए गए कल्याण और बुनियादी ढांचे से जुड़े वादों पर रिपोर्ट किया था। उस रिपोर्ट में महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए प्रत्यक्ष सहायता, 3,000 रुपये मासिक पेंशन, मुफ्त एलपीजी सिलेंडर, मुफ्त पानी, एम्स और तिरुवनंतपुरम-कन्नूर हाई स्पीड रेलवे जैसे प्रस्तावों के साथ निवेश और राजकोषीय प्रबंधन पर उसके जोर को रेखांकित किया गया था।
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