केरल चुनाव में एलडीएफ, एनडीए ने विकास और शासन पर दांव तेज किया
एएनआई से बातचीत में माकपा नेता बृंदा करात ने कहा कि 2026 केरल विधानसभा चुनाव से पहले एलडीएफ को तीसरे कार्यकाल के लिए व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है, जिसे उन्होंने लोगों पर केंद्रित विकास मॉडल का परिणाम बताया। शनिवार को पूर्व वित्त मंत्री थॉमस आइजैक ने भी सड़क, तटीय पर्यटन और होमस्टे ढांचे में सुधार का हवाला देते हुए मोर्चे की जीत का भरोसा जताया। इसी बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रैलियों में एलडीएफ और यूडीएफ पर एफसीआरए विधेयक, समान नागरिक संहिता और सीएए जैसे मुद्दों पर झूठ फैलाने का आरोप लगाते हुए भाजपा नीत एनडीए की जीत का दावा कर रहे हैं।
हाइलाइट्स
- एलडीएफ और एनडीए दोनों ने केरल विधानसभा चुनाव प्रचार में विकास मॉडल, बुनियादी ढांचे और शासन रिकॉर्ड को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया है।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने केरल को पिछले सरकारों की तुलना में पांच गुना अधिक फंड आवंटित किया है और विपक्ष को एफसीआरए, यूसीसी, सीएए पर घेरा।
- एलडीएफ, यूडीएफ और एनडीए के बीच त्रिकोणीय मुकाबले में बुनियादी ढांचे, पर्यटन, सामाजिक नीति और केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध अगले शासन मॉडल के लिए महत्वपूर्ण कारक बनेंगे।
चुनाव प्रचार में विकास मॉडल और बुनियादी ढांचा केंद्र में
बृंदा करात का कहना है कि एलडीएफ की चुनावी अपील का आधार लोगों के हित में किया गया विकास है, और यही वजह है कि राज्य भर में उसके समर्थन में बड़ी संख्या में लोग सामने आ रहे हैं। उन्होंने इस मॉडल को पारंपरिक राजनीतिक दावों से अलग बताते हुए कहा कि यह सीधे जनकेंद्रित कामकाज पर आधारित है। विधानसभा चुनाव के लिए मतदान 9 अप्रैल को होना है, इसलिए सभी प्रमुख दल अपने शासन रिकॉर्ड को मतदाताओं के सामने प्रमुखता से रख रहे हैं।
थॉमस आइजैक ने भी इसी तर्क को आगे बढ़ाते हुए कहा कि राज्य की सड़कों की गुणवत्ता, तटीय इलाकों में पर्यटन गतिविधि और बड़ी संख्या में उभरे होमस्टे, सरकार के काम का प्रत्यक्ष संकेत हैं। उनके अनुसार, बुनियादी ढांचे में सुधार का असर कई क्षेत्रों में दिख रहा है और मतदाता सरकार की निरंतरता चाहते हैं। एलडीएफ में माकपा के साथ केरल कांग्रेस (एम), राष्ट्रीय जनता दल और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, शरदचंद्र पवार गुट, जैसे दल शामिल हैं।
मोदी ने फंडिंग, कानूनों और शासन पर विपक्ष को घेरा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनावी रैलियों में भाजपा नीत एनडीए की संभावनाओं पर भरोसा जता रहे हैं और एलडीएफ तथा यूडीएफ दोनों को निशाने पर ले रहे हैं। उनका आरोप है कि विपक्ष एफसीआरए, यूसीसी और सीएए जैसे मुद्दों पर गलत सूचना फैला रहा है, जबकि गोवा में दशकों से यूसीसी लागू है। उन्होंने संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का भी जिक्र किया और 16 से 18 अप्रैल के संसदीय सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन पारित करने की बात कही।
मोदी ने केरल में शासन को लेकर मुनंबम जैसे मामलों, हिंदू और ईसाई समुदायों की कथित अनदेखी और राज्य को कम फंड मिलने के आरोपों को भी उठाया। उनका कहना है कि उनकी सरकार ने पहले की तुलना में राज्य को पांच गुना अधिक धन आवंटित किया है। एनडीए खेमे में भाजपा के साथ ट्वेंटी 20 पार्टी, भारत धर्म जन सेना और केरल कामराज कांग्रेस जैसे दल शामिल हैं, जबकि यूडीएफ में कांग्रेस, केरल कांग्रेस और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग प्रमुख घटक हैं।
मतदान कार्यक्रम से पहले त्रिकोणीय मुकाबले की तस्वीर
राज्य में चुनावी मुकाबला एलडीएफ, यूडीएफ और एनडीए के बीच त्रिकोणीय रूप ले रहा है, जहां हर मोर्चा विकास, पहचान और शासन के मुद्दों का अलग राजनीतिक इस्तेमाल कर रहा है। एलडीएफ अपने कामकाज और निरंतरता की दलील दे रहा है, जबकि एनडीए बदलाव और केंद्र से अधिक संसाधनों की बात कर रहा है। यूडीएफ का उल्लेख भी इस राजनीतिक टकराव के केंद्र में है, क्योंकि मोदी ने उसे एलडीएफ के साथ समान रूप से निशाना बनाया है।
विधानसभा चुनाव की मतगणना 4 मई को होनी है और मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 23 मई को समाप्त होना है। इस वजह से आने वाले दिनों में प्रचार और आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने की संभावना है। कारोबारी और निवेश पर नजर रखने वाले वर्ग के लिए यह चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि बुनियादी ढांचे, पर्यटन, सामाजिक नीति और केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध, सभी अगले शासन मॉडल की दिशा तय कर सकते हैं।
हमने पहले केरल विधानसभा चुनाव से पहले एलडीएफ और यूडीएफ के घोषणापत्रों में पेंशन, नकद सहायता, रोजगार और बुनियादी ढांचा निवेश से जुड़े वादों की प्रतिस्पर्धा पर रिपोर्ट किया था। उस रिपोर्ट में 9 अप्रैल की वोटिंग और 4 मई की मतगणना से पहले दोनों मोर्चों के प्रमुख आर्थिक वादों और उनके राजकोष, सार्वजनिक सेवाओं व निवेश प्राथमिकताओं पर संभावित असर को रेखांकित किया गया था।
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