अदाणी समूह U.S. एसईसी मुकदमा खारिज करने की मांग करता है

अदाणी समूह U.S. एसईसी मुकदमा खारिज करने की मांग करता है
अदाणी समूह की कानूनी रणनीति

ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ न्यूयॉर्क में 7 अप्रैल 2026 को दायर प्री मोशन पत्र के अनुसार, गौतम अदाणी और सागर अदाणी U.S. सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन के प्रतिभूति धोखाधड़ी मुकदमे को खारिज कराने की तैयारी कर रहे हैं। पत्र में कहा गया है कि 30 अप्रैल तक प्रस्तावित खारिजी याचिका दायर की जाएगी और मामला U.S. कानून के अस्वीकार्य बाह्य क्षेत्रीय विस्तार, व्यक्तिगत क्षेत्राधिकार की कमी तथा कथित भ्रामक बयानों की अपर्याप्तता पर आधारित है। यह विवाद 2021 के अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के 75 करोड़ डॉलर के बॉन्ड निर्गम और 2024 में एसईसी द्वारा लगाए गए आरोपों से जुड़ा है।

हाइलाइट्स

  • अदाणी ग्रीन एनर्जी ने 2021 में $750 मिलियन का बॉन्ड U.S. से बाहर Rule 144A और Regulation S छूटों के तहत जारी किया, जिसे अब अदाणी पक्ष U.S. SEC मुकदमे में संरक्षण के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।
  • प्रतिवादियों ने SEC की याचिका खारिज करने की मांग करते हुए तर्क दिया कि बॉन्ड U.S. में सूचीबद्ध नहीं हैं, निवेशकों को कोई हानि नहीं हुई, और कथित रिश्वत भारत केंद्रित सौर परियोजना से जुड़ी थी।
  • यह मुकदमा भारतीय कंपनियों की सीमा पार पूंजी जुटाने की संरचनाओं और विदेशी फंडिंग पर U.S. नियामकीय दायरे को लेकर व्यापक कानूनी बहस छेड़ सकता है, जिससे ऊर्जा और वित्तीय सेक्टर पर असर पड़ेगा।

2021 बॉन्ड सौदे पर कानूनी चुनौती

अदाणी पक्ष का कहना है कि अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड ने 2021 में 75 करोड़ डॉलर का बॉन्ड निर्गम U.S. के बाहर Rule 144A और Regulation S छूटों के तहत किया था। पत्र के अनुसार ये प्रतिभूतियां पहले गैर U.S. अंडरराइटरों को बेची गईं और बाद में उनका एक हिस्सा योग्य संस्थागत खरीदारों को पुनर्बेचा गया। प्रतिवादियों का तर्क है कि न तो प्रतिभूतियां U.S. में सूचीबद्ध थीं, न जारीकर्ता U.S. रजिस्ट्रेंट था, और न ही कथित आचरण भारत के बाहर हुआ।वकीलों ने अदालत से कहा कि गौतम अदाणी या सागर अदाणी का U.S. निवेशकों को लक्षित करने या निर्गम के दस्तावेजों को मंजूरी देने में प्रत्यक्ष योगदान नहीं दिखाया गया है। पत्र में यह भी कहा गया है कि एसईसी ने यह पर्याप्त रूप से नहीं बताया कि अपरिवर्तनीय देयता U.S. के भीतर उत्पन्न हुई थी या स्वामित्व का हस्तांतरण वहीं हुआ था। इसी आधार पर प्रतिवादी U.S. प्रतिभूति कानूनों के लागू होने पर सवाल उठा रहे हैं।

दाखिले में यह भी दलील दी गई है कि एसईसी जिन बयानों का हवाला दे रहा है, वे ईएसजी प्रतिबद्धताओं, भ्रष्टाचार रोधी प्रथाओं और कॉरपोरेट प्रतिष्ठा जैसे सामान्य दावे हैं, जिन्हें कानूनी रूप से कार्रवाई योग्य भ्रामक बयान नहीं माना जाना चाहिए। प्रतिवादियों के अनुसार एजेंसी किसी एक विशिष्ट कथित झूठे बयान को दोनों आरोपियों से स्पष्ट रूप से नहीं जोड़ पाई है। उनका कहना है कि धोखाधड़ी की मंशा या लापरवाही का भी पर्याप्त आरोप नहीं लगाया गया है।

निवेशक नुकसान और भारत केंद्रित परियोजना पर जोर

अदाणी पक्ष ने कहा है कि एसईसी ने किसी निवेशक नुकसान का आरोप नहीं लगाया, क्योंकि ऐसा कोई नुकसान हुआ ही नहीं। पत्र के मुताबिक बॉन्ड परिपक्व हो चुके हैं और 2024 में मूलधन तथा ब्याज का पूरा भुगतान कर दिया गया था। यह तर्क बचाव पक्ष के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे निवेशक हानि आधारित दावों की कमजोरी दिखाने की कोशिश की जा रही है।दाखिले में कथित रिश्वत योजना को भारत के सौर ऊर्जा परियोजना से जुड़ा बताया गया है, जहां बिजली की आपूर्ति भी भारत के लिए ही थी। प्रतिवादियों का कहना है कि न किसी U.S. कंपनी ने परियोजना के लिए बोली लगाई और न किसी U.S. ग्राहक ने वहां से ऊर्जा खरीदी। इस तरह बचाव पक्ष मामले को पूरी तरह भारत केंद्रित वाणिज्यिक और नियामकीय विवाद के रूप में पेश कर रहा है।

एसईसी ने नवंबर 2024 में आरोप लगाया था कि गौतम अदाणी, सागर अदाणी और अन्य लोगों ने 2020 से 2024 के बीच भारत में सौर ऊर्जा अनुबंध हासिल करने के लिए 25 करोड़ डॉलर से अधिक की कथित रिश्वत योजना चलाई। अदाणी पक्ष इन आरोपों से इनकार करता है और कहता है कि कथित योजना के समर्थन में विश्वसनीय साक्ष्य नहीं हैं। अब अदालत के सामने अगला प्रमुख कदम 30 अप्रैल 2026 तक प्रस्तावित खारिजी याचिका है, जिसके बाद प्री मोशन कॉन्फ्रेंस भी हो सकती है।

नियामकीय पहुंच और ऊर्जा क्षेत्र पर असर

यह मामला सीमा पार पूंजी जुटाने वाले भारतीय समूहों के लिए एक अहम परीक्षण के रूप में देखा जा रहा है, खासकर तब जब विदेशी निवेशकों तक पहुंच निजी प्लेसमेंट और पुनर्बिक्री संरचनाओं के जरिए बनाई जाती है। यदि अदालत व्यक्तिगत क्षेत्राधिकार और बाह्य क्षेत्रीयता पर प्रतिवादियों की दलीलों को महत्व देती है, तो U.S. नियामकों की पहुंच को लेकर व्यापक बहस तेज हो सकती है। इससे भविष्य में भारतीय जारीकर्ताओं की ऑफशोर फंडिंग संरचनाओं पर कानूनी सावधानी और बढ़ सकती है।नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के लिए भी यह विवाद महत्वपूर्ण है, क्योंकि मामला अदाणी ग्रीन के बॉन्ड निर्गम और भारत के सौर परियोजना अनुबंधों से जुड़ा है। हालांकि मुकदमा अभी प्रारंभिक प्रक्रिया में है, फिर भी यह निवेशकों, अंडरराइटरों और कानूनी सलाहकारों को प्रकटीकरण मानकों, अधिकार क्षेत्र और सीमा पार अनुपालन जोखिमों पर अधिक सतर्क रहने का संकेत देता है। अदाणी पक्ष का जोर इस बात पर है कि विदेशी पूंजी बाजारों में भागीदारी अपने आप U.S. प्रतिभूति कानूनों के पूर्ण दायरे को सक्रिय नहीं करती।

हमने पहले पश्चिम एशिया के बढ़ते संघर्ष से वैश्विक ऊर्जा प्रवाह पर पड़ रहे दबाव और इसे ऊर्जा बाजारों के लिए “सिस्टमिक ट्रेमर” बताए जाने पर रिपोर्ट किया था। उस रिपोर्ट में वैश्विक सार्वजनिक ऋण के बढ़ते बोझ के बीच भारत के debt-to-GDP, बाह्य ऋण और विदेशी मुद्रा भंडार जैसे संकेतकों के आधार पर उसकी राजकोषीय स्थिति और नीति-गत गुंजाइश को रेखांकित किया गया था।

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