राहुल गांधी ने तमिलनाडु चुनाव में कांग्रेस-डीएमके गारंटी और संघीय अधिकारों का मुद्दा उठाया
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले रणिपेट की रैली में राहुल गांधी राज्य की स्वायत्तता, केंद्र-राज्य संबंधों और कल्याणकारी वादों को चुनावी बहस के केंद्र में रखते हैं। उनके भाषण में परिसीमन, महिला आरक्षण, राज्य के लिए वित्तीय सहायता और स्थानीय प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों को BJP-RSS की केंद्रीकरण नीति के खिलाफ जोड़ा जाता है।
हाइलाइट्स
- रणिपेट रैली में राहुल गांधी ने कांग्रेस-डीएमके की छह प्रमुख गारंटी घोषित कीं, जिनमें हर महिला को 2,000 रुपये प्रतिमाह और परिवारों को 2,500 रुपये सहायता शामिल है।
- राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने तमिलनाडु की शिक्षा के लिए लगभग 2,000 करोड़ रुपये की राशि रोक दी और मदुरै AIIMS, मेट्रो परियोजनाओं में देरी तमिलनाडु की आर्थिक क्षमता कमजोर करने का प्रयास है।
- तमिलनाडु में 23 अप्रैल को मतदान और 4 मई को मतगणना होगी, मुख्य मुकाबला डीएमके गठबंधन और NDA गुट के बीच है जबकि TVK त्रिकोणीय प्रतियोगिता की कोशिश कर रही है।
रणिपेट रैली में चुनावी संदेश और छह गारंटी
FinancialExpress.com के अनुसार, कांग्रेस नेता राहुल गांधी रणिपेट में कहते हैं कि तमिल लोगों को तमिलनाडु पर शासन करना चाहिए और राज्य को दिल्ली से चुने गए किसी “प्रॉक्सी” के हवाले नहीं किया जाना चाहिए। वह इस चुनाव को इस सवाल से जोड़ते हैं कि तमिलनाडु का नेतृत्व स्थानीय जनादेश से चलेगा या केंद्र की राजनीतिक प्राथमिकताओं से।
राहुल गांधी अपने भाषण में हालिया संविधान (131वां संशोधन) विधेयक को परिसीमन और महिला-केंद्रित कानून के साथ जोड़कर तमिलनाडु तथा दक्षिणी राज्यों की संसदीय हिस्सेदारी पर दबाव के रूप में पेश करते हैं। वह दावा करते हैं कि विपक्ष ने इस कदम का विरोध कर राज्य की राजनीतिक आवाज की रक्षा की है।
रणिपेट मंच से वह कांग्रेस-डीएमके गठबंधन की छह प्रमुख गारंटी भी दोहराते हैं। इनमें हर महिला को 2,000 रुपये प्रतिमाह, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों को 2,000 रुपये प्रतिमाह, कॉलेज छात्रों को 2,000 रुपये छात्रवृत्ति, परिवारों को 2,500 रुपये मासिक सहायता, 300 दिनों में सरकारी रिक्तियां भरना तथा Group C और D पदों में स्थानीय लोगों के लिए 60 प्रतिशत अतिरिक्त आरक्षण, और पहली बार महिला संपत्ति मालिकों के लिए मुफ्त पंजीकरण शामिल है।
कांग्रेस इन वादों को तमिलनाडु के सामाजिक न्याय मॉडल के विस्तार के रूप में पेश करती है, जबकि BJP को इस ढांचे के लिए जोखिम बताती है। रैली का संदेश कल्याण, स्थानीय रोजगार और महिला आर्थिक भागीदारी को चुनावी रणनीति के मुख्य स्तंभ के रूप में सामने लाता है।
केंद्र-राज्य टकराव और चुनावी असर
राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाते हैं कि केंद्र तमिलनाडु की स्वतंत्र राजनीतिक रेखा को कमजोर करना चाहता है, क्योंकि मुख्यमंत्री एमके स्टालिन दिल्ली की इच्छानुसार काम नहीं करते। वह यह भी कहते हैं कि BJP तमिलनाडु में ऐसा अनुकूल शासन स्थापित करना चाहती है जो केंद्र की केंद्रीकृत नीति के साथ चले।भाषण में वह शिक्षा के लिए लगभग 2,000 करोड़ रुपये की कथित रोकी गई राशि, मदुरै AIIMS में देरी और मेट्रो परियोजनाओं की मंजूरियों में सुस्ती जैसे मुद्दों को भी उठाते हैं। उनके अनुसार, ये कदम तमिलनाडु की आर्थिक और संस्थागत क्षमता को कमजोर करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं।
लोकसभा में विधेयक की हार के बाद मुख्यमंत्री एमके स्टालिन कहते हैं कि “तमिलनाडु ने दिल्ली को हरा दिया”, जिससे राज्य बनाम केंद्र की राजनीतिक रेखा और तीखी हो जाती है। राहुल गांधी तमिलनाडु के साथ अपने परिवार के पुराने रिश्तों का भी उल्लेख करते हैं और खुद को “दिल्ली में आपका सिपाही” बताते हैं।
तमिलनाडु में मतदान 23 अप्रैल को एक चरण में होना है और मतगणना 4 मई को होगी। मुख्य मुकाबला डीएमके-नीत गठबंधन और AIADMK, BJP तथा PMK वाले NDA के बीच रहने की उम्मीद है, जबकि विजय के नेतृत्व वाली TVK मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश करती है।
हम पहले संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 और परिसीमन विधेयक, 2026 को लेकर लोकसभा में हुए विवाद पर लिख चुके हैं। उस लेख में विपक्ष की यह आपत्ति रेखांकित की गई थी कि महिला आरक्षण को परिसीमन और जनगणना से जोड़ने से संघीय संतुलन व राज्यों के प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है और क्रियान्वयन टलने का जोखिम बढ़ता है।
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