तमिलनाडु के दो गांव विधानसभा मतदान का बहिष्कार करते हैं, भूमि पहुंच विवाद से स्थानीय चुनावी असर
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बीच एट्टायापुरम क्षेत्र के दो गांव एक दशक पुराने रास्ता विवाद के कारण मतदान से दूर रहते हैं। कुलाथुवैपट्टी और कुमारगिरि में 983 पंजीकृत मतदाताओं में से दोपहर तक केवल पांच वोट पड़ने से स्थानीय असंतोष का सीधा असर चुनावी भागीदारी पर दिखता है।
हाइलाइट्स
- विलाथिकुलम क्षेत्र के कुलाथुवैपट्टी और कुमारगिरि गांवों में 983 पंजीकृत मतदाताओं में से केवल पांच ने मतदान किया, भूमि पहुंच विवाद के चलते मतदान बहिष्कार हुआ।
- कृषि भूमि तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता श्रीलंकाई तमिल पुनर्वास शिविर से होकर गुजरता है, जिससे किसानों की कृषि उपकरणों और फसल ढुलाई पर प्रतिकूल असर पड़ा।
- 18 अप्रैल की झड़प के बाद दोनों समुदायों में तनाव बढ़ा, ग्रामीणों ने भूख हड़ताल और घेराव के बाद 2026 विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करने का फैसला किया।
रास्ता विवाद और मतदान बहिष्कार
Financial Express के अनुसार, कुलाथुवैपट्टी और कुमारगिरि के निवासियों ने तब तक चल रहे विधानसभा चुनाव में हिस्सा नहीं लेने की कसम खाई है जब तक उनके रास्ते के विवाद का समाधान नहीं हो जाता। ये दोनों गांव तमिलनाडु के विलाथिकुलम निर्वाचन क्षेत्र में आते हैं, और जिस पंचायत यूनियन प्राथमिक विद्यालय में इनके लिए मतदान होता है वहां सोथुनैक्कनपट्टी और अम्मामपदम के मतदाता भी शामिल हैं.Financial Express.
अधिकारियों ने बताया कि गुरुवार दोपहर तक 983 पंजीकृत मतदाताओं में से केवल पांच वोट डाले गए। यह बहिष्कार किसी तात्कालिक घटना का परिणाम नहीं है, बल्कि उस सड़क पहुंच की मांग से जुड़ा है जिसे ग्रामीण लगभग 10 वर्षों से उठा रहे हैं।
कृषि पहुंच, शरणार्थी शिविर और क्षेत्रीय असर
विवाद एक संकरे रास्ते पर केंद्रित है जो क्षेत्र में स्थित श्रीलंकाई तमिल पुनर्वास शिविर से होकर गुजरता है। कुलाथुवैपट्टी और कुमारगिरि के किसानों के लिए यही रास्ता उनकी कृषि भूमि तक पहुंचने का व्यावहारिक माध्यम है, लेकिन शिविर के विस्तार और कथित अतिक्रमण के कारण कृषि उपकरणों की आवाजाही और फसल ढुलाई प्रभावित होती है.शिविर में दशकों पहले गृहयुद्ध से भागकर आए श्रीलंकाई तमिल रहते हैं और यह भूमि पुनर्वास विभाग के अधिकार क्षेत्र में है। इसी वजह से स्थानीय पंचायत या ग्रामीण राज्य स्तर की मंजूरी के बिना वहां सड़क नहीं बना सकते, जबकि एट्टायापुरम के वर्षा आधारित कृषि क्षेत्र में काम करने वाले किसानों पर इसका प्रत्यक्ष असर पड़ता है.
रिपोर्ट के मुताबिक 18 अप्रैल को पथराव की झड़प के बाद दोनों समुदायों के बीच तनाव और बढ़ गया, जिससे रास्ता और अवरुद्ध हो गया। ग्रामीणों ने भूख हड़ताल और तहसीलदार कार्यालय के घेराव जैसे कदम उठाने के बाद 2026 विधानसभा चुनाव के बहिष्कार का फैसला किया है, जबकि तमिलनाडु की 234 विधानसभा सीटों के लिए मतदान गुरुवार को जारी है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में 23 अप्रैल को शुरू हुए विधानसभा चुनाव के मतदान, प्रमुख मुकाबलों और 4 मई की मतगणना के संभावित राजनीतिक संकेतों पर चर्चा की गई थी। इसमें तमिलनाडु की 234 सीटों पर डीएमके-एआईएडीएमके की पारंपरिक प्रतिस्पर्धा के साथ टीवीके जैसे नए दल की एंट्री से बने त्रिकोणीय/बहुकोणीय मुकाबले और राज्य के ट्रेंड-सेटर माने जा रहे कुछ अहम निर्वाचन क्षेत्रों पर भी फोकस किया गया था।
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