AAP के राज्यसभा सांसदों का भाजपा में विलय, स्वाति मालीवाल ने केजरीवाल पर सिद्धांत छोड़ने का आरोप लगाया

AAP के राज्यसभा सांसदों का भाजपा में विलय, स्वाति मालीवाल ने केजरीवाल पर सिद्धांत छोड़ने का आरोप लगाया
AAP सांसद BJP में

आम आदमी पार्टी को राज्यसभा में बड़ा राजनीतिक झटका लगता है क्योंकि उसके कई सांसद भाजपा में शामिल होने का ऐलान करते हैं और स्वाति मालीवाल पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाती हैं। यह घटनाक्रम अरविंद केजरीवाल की राष्ट्रीय राजनीतिक रणनीति, दल-बदल कानून के प्रावधानों और दिल्ली तथा पंजाब में AAP की साख पर सीधा असर डालता है.

हाइलाइट्स

  • स्वाति मालीवाल ने अरविंद केजरीवाल पर आरोप लगाया कि पार्टी ने अपने मूल सिद्धांतों से समझौता कर भ्रष्ट लोगों और दबंग तत्वों को संरक्षण दिया।
  • मालीवाल ने मई 2024 में केजरीवाल के आवास पर उनके साथ कथित मारपीट की घटना का उल्लेख करते हुए, आरोपी को ऊंचे पद देने और उन्हें चुप कराने की कोशिश का आरोप लगाया।
  • मालीवाल के आरोपों से AAP की दिल्ली और पंजाब में राजनीतिक विश्वसनीयता, महिला सुरक्षा संबंधी दावों और विपक्ष में पार्टी की स्थिति पर दबाव बढ़ा।

आरोपों का राजनीतिक और संगठनात्मक असर

मालीवाल अपने राजनीतिक सफर को 2006 से जोड़ती हैं, जब वह नौकरी छोड़कर RTI आंदोलन से जुड़ती हैं, फिर 2011 के अन्ना हजारे आंदोलन और 2012 में AAP के गठन तक सक्रिय भूमिका निभाती हैं। जैसा कि Financial Express ने रिपोर्ट किया है, वह दिल्ली महिला आयोग में लगभग आठ वर्ष की अपनी सेवा का हवाला देते हुए कहती हैं कि उन्होंने पूरी ईमानदारी और समर्पण से काम किया, लेकिन अब पार्टी अपनी मूल सोच से भटक चुकी है.

उनके आरोप केवल वैचारिक नहीं हैं। मालीवाल मई 2024 में अरविंद केजरीवाल के आवास पर अपने साथ हुई कथित मारपीट के आरोप को फिर दोहराती हैं और कहती हैं कि जिम्मेदार व्यक्ति को संरक्षण दिया गया, ऊंचे पद दिए गए और उन्हें चुप कराने की कोशिश की गई.

मालीवाल AAP नेतृत्व पर भ्रष्टाचार, महिलाओं के खिलाफ हिंसा, दबंग तत्वों को बढ़ावा देने और पंजाब में विश्वासघात तथा लूट जैसे आरोप भी लगाती हैं। इन आरोपों से दिल्ली और Punjab में पार्टी की राजनीतिक विश्वसनीयता, उसके महिला सुरक्षा संबंधी दावे और विपक्षी राजनीति में उसकी स्थिति पर नया दबाव बनता है.

हमारी पिछली रिपोर्ट में AAP के कुछ राज्यसभा सदस्यों के BJP में विलय/पाला बदलने के दावों से जुड़े घटनाक्रम पर चर्चा की गई थी, जिससे पार्टी की उच्च सदन में संख्या घटने और दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता को लेकर विवाद की बात सामने आई। इसमें यह भी बताया गया था कि पंजाब से जुड़े कई नामों के कारण राज्य इकाई में असंतोष और नेतृत्व स्तर पर संगठनात्मक खिंचाव के संकेत मिलते हैं, जो चुनावी रणनीति और एकजुटता पर दबाव बढ़ाते हैं।

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