AAP के राज्यसभा सांसदों के BJP में विलय के दावे से पंजाब की राजनीतिक पकड़ पर दबाव

AAP के राज्यसभा सांसदों के BJP में विलय के दावे से पंजाब की राजनीतिक पकड़ पर दबाव
AAP की मुश्किलें बढ़ीं

पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी की संसदीय ताकत पर बड़ा दबाव बनता दिख रहा है, क्योंकि राज्यसभा में उसके कई सदस्यों के BJP में जाने का दावा सामने आया है। इस घटनाक्रम से पार्टी की ऊपरी सदन में संख्या घटकर तीन पर आने की बात कही जा रही है, जबकि दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता को लेकर नया विवाद भी खड़ा हो गया है।

हाइलाइट्स

  • AAP राज्यसभा के 10 में से 7 सांसदों के BJP में विलय के दावे ने संविधान की दसवीं अनुसूची और दलबदल विरोधी कानून की सीमा पार की।
  • AAP नेता संजय सिंह ने राज्यसभा सभापति को पत्र लिखकर चड्ढा, मित्तल और पाठक को दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता की मांग की।
  • पंजाब से 6 सांसदों की संभावित भाजपा में शिफ्टिंग AAP की राज्य इकाई और नेतृत्व में गंभीर असंतोष और संगठनात्मक खिंचाव को दर्शाती है।

राज्यसभा समीकरण और कानूनी दावेदारी

FinancialExpress.com के अनुसार, राघव चड्ढा ने कहा है कि वह और AAP के अन्य सांसद भारतीय संविधान के प्रावधानों के तहत BJP में विलय की प्रक्रिया अपना रहे हैं, और यह संख्या दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता से बचने की सीमा को पार करती है। उनके बयान के अनुसार, 10 में से 7 सांसद इस फैसले के साथ हैं, हालांकि जिन सभी नामों का उल्लेख किया गया है, उनके औपचारिक रूप से पाला बदलने की स्थिति हर मामले में स्पष्ट नहीं है।

पाठ में कहा गया है कि राघव चड्ढा के साथ अशोक मित्तल और अन्य असंतुष्ट सांसदों के नाम सामने आए हैं, जिनमें संदीप पाठक, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, विक्रम साहनी और स्वाति मालीवाल शामिल हैं। AAP नेता संजय सिंह ने इस घोषणा के बाद कहा है कि वह राज्यसभा सभापति को पत्र लिखकर चड्ढा, मित्तल और पाठक को दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य ठहराने की मांग करेंगे।

संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत, यदि किसी दल के कम से कम दो-तिहाई विधायक या सांसद दूसरे दल में विलय पर सहमत हों तो अयोग्यता से बचाव संभव है। उपलब्ध संख्या के आधार पर यह दावा इसी कानूनी कसौटी पर टिका हुआ है, लेकिन अंतिम स्थिति संसदीय प्रक्रिया और सभापति के स्तर पर उठने वाले कदमों पर निर्भर करती है।

पंजाब इकाई पर असर और नेतृत्व संकट

नामित सांसदों में से छह का पंजाब से होना AAP की राज्य इकाई के भीतर गहरे असंतोष और संगठनात्मक खिंचाव की ओर इशारा करता है। यह पहलू इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ये सदस्य 2022 में उस दौर में चुने गए थे जब AAP ने पंजाब में व्यापक चुनावी जीत दर्ज की थी।

राघव चड्ढा, जिन्हें पार्टी की अगली पीढ़ी के प्रमुख चेहरों में गिना जाता रहा है, हाल में राज्यसभा में AAP के उपनेता पद से हटाए गए थे। उनके स्थान पर आए अशोक मित्तल का भी इस कथित खेमाबदल में शामिल होना घटनाक्रम को और अधिक राजनीतिक महत्व देता है, खासकर तब जब पंजाब चुनाव से पहले पार्टी की रणनीतिक एकजुटता पर सवाल उठ रहे हैं।

उल्लेखित समूह की पृष्ठभूमि भी विविध है, जिसमें संगठनात्मक रणनीति, खेल, उद्योग और महिला अधिकार जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इससे संकेत मिलता है कि यह केवल व्यक्तिगत स्तर का फैसला नहीं माना जा रहा, बल्कि AAP के संसदीय और प्रांतीय ढांचे पर व्यापक असर डाल सकने वाला बदलाव बन रहा है।

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