भारत में ईंधन मूल्यवृद्धि दावे को PIB ने फर्जी बताया

भारत में ईंधन मूल्यवृद्धि दावे को PIB ने फर्जी बताया
PIB ने बताया फर्जी दावा

सोशल मीडिया पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कथित बढ़ोतरी का दावा ऐसे समय फैल रहा है, जब देश के कई राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में चुनावी प्रक्रिया चल रही है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने ईंधन दरों में बढ़ोतरी का कोई आदेश जारी नहीं किया है।

हाइलाइट्स

  • PIB फैक्ट चेक ने 29 अप्रैल को घोषणा की कि पेट्रोल ₹10 और डीजल ₹12.50 की मूल्यवृद्धि संबंधी सोशल मीडिया दावा और दस्तावेज फर्जी हैं।
  • सरकार ने स्पष्ट किया कि कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में वृद्धि के बावजूद तेल विपणन कंपनियां खुदरा ईंधन दरें स्थिर रखे हुए हैं।
  • पेट्रोलियम मंत्रालय ने 22 अप्रैल को कहा कि चुनाव के बाद पेट्रोल-डीजल कीमत बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं और पिछले चार वर्षों से कीमतें स्थिर रहीं।

वायरल दस्तावेज और सरकारी स्पष्टीकरण

PIB फैक्ट चेक के अनुसार, Financial Express में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया पर प्रसारित एक दस्तावेज में दावा किया गया है कि पेट्रोल की कीमत 10 रुपये और डीजल की कीमत 12.50 रुपये बढ़ाई गई है, लेकिन भारत सरकार ने ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया। PIB फैक्ट चेक ने बुधवार, 29 अप्रैल को सोशल मीडिया मंच X पर कहा कि ऐसी खबरों की पुष्टि केवल आधिकारिक सरकारी माध्यमों से की जानी चाहिए।

वायरल दावे के बाद कई सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने कथित ईंधन मूल्यवृद्धि पर नाराजगी जताई। सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के नाम पर प्रसारित आदेश प्रामाणिक नहीं है।

कच्चे तेल की पृष्ठभूमि और उपभोक्ता असर

यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने घरेलू ईंधन दरों में संभावित संशोधन को लेकर अटकलों को बढ़ाया है। सरकार का कहना है कि तेल विपणन कंपनियां खुदरा कीमतों को स्थिर रख रही हैं और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की लागत में उतार-चढ़ाव का असर अपने स्तर पर समाहित कर रही हैं।

22 अप्रैल को भी पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने चुनाव के बाद पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाने के किसी प्रस्ताव से इनकार किया था और ऐसी मीडिया रिपोर्टों को भ्रामक बताया था। मंत्रालय ने कहा था कि भारत उन चुनिंदा देशों में है जहां पिछले चार वर्षों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि नहीं हुई है, और सरकार तथा तेल सार्वजनिक उपक्रमों ने अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेज बढ़ोतरी से नागरिकों को बचाने के लिए लगातार कदम उठाए हैं।

हमारी पहले की रिपोर्ट में चुनाव के बाद पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की अटकलों पर केंद्र सरकार के खंडन और ईंधन आपूर्ति की निगरानी पर फोकस किया गया था। इसमें बताया गया था कि अफवाहों के चलते कुछ राज्यों में घबराहट में खरीदारी बढ़ी और कई पंपों पर स्टॉक खत्म होने जैसी स्थिति बनी, जबकि वैश्विक कच्चे तेल की तेजी से तेल विपणन कंपनियों पर लागत का दबाव भी बढ़ रहा है।

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