भारत निर्वाचन आयोग ने मतगणना सुरक्षा के लिए QR कोड पहचान प्रणाली शुरू की

भारत निर्वाचन आयोग ने मतगणना सुरक्षा के लिए QR कोड पहचान प्रणाली शुरू की
QR कोड से चुनाव सुरक्षा

कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और सात सीटों के उपचुनावों की मतगणना से पहले चुनावी सुरक्षा और पारदर्शिता पर फोकस बढ़ रहा है। 4 मई से लागू होने वाली नई QR कोड आधारित फोटो पहचान व्यवस्था ऐसे समय लाई जा रही है, जब पश्चिम बंगाल में EVM और डाक मतपत्रों की सुरक्षा को लेकर राजनीतिक आरोप तेज हैं।

हाइलाइट्स

  • भारत निर्वाचन आयोग ने 4 मई से असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी और सात उपचुनाव क्षेत्रों में मतगणना केंद्रों के लिए QR कोड आधारित फोटो पहचान प्रणाली लागू की।
  • सुरक्षा के तीन-स्तरीय ढांचे में अंतिम स्तर पर केवल अधिकृत कर्मियों को QR कोड स्कैनिंग के जरिए नियंत्रित पहुंच मिलेगी, जबकि जिला निर्वाचन अधिकारियों को प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए गए हैं।
  • पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के EVM/मतपत्रों तक अनधिकृत पहुंच के आरोपों को मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने CCTV मॉनिटरिंग व नियमित सूचना तंत्र का हवाला देते हुए खारिज किया।

मतगणना केंद्रों के लिए नई सुरक्षा व्यवस्था

Financial Express के अनुसार, भारत निर्वाचन आयोग ECINET के जरिए QR कोड आधारित फोटो पहचान पत्र प्रणाली लागू कर रहा है, जिसका इस्तेमाल असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी और सात विधानसभा क्षेत्रों के उपचुनावों की मतगणना में 4 मई से किया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य मतगणना हॉल के भीतर अनधिकृत प्रवेश रोकना और अधिक नियंत्रित पहुंच सुनिश्चित करना है।

नई प्रणाली तीन-स्तरीय सुरक्षा ढांचे का हिस्सा है। बाहरी स्तरों पर रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा जारी फोटो पहचान पत्र की मैनुअल जांच होगी, जबकि सबसे भीतरी स्तर पर QR कोड स्कैन किया जाएगा। अधिकृत कर्मियों में रिटर्निंग ऑफिसर, मतगणना कर्मचारी, प्रत्याशी, एजेंट और तकनीकी दल शामिल हैं।

आयोग इसे हाल के 30 से अधिक नवाचारों में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में पेश कर रहा है। बूथ लेवल ऑफिसरों के लिए QR कार्ड के बाद अब इस मॉडल को आगे लोकसभा और विधानसभा चुनावों में देशभर में विस्तारित करने की योजना भी बताई गई है। जिला निर्वाचन अधिकारियों को इसके सुचारु क्रियान्वयन के लिए कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए गए हैं।

आयोग ने अधिकृत पत्रकारों के लिए मतगणना हॉल के पास मीडिया सेंटर स्थापित करने की भी बात कही है। पत्रकार मौजूदा प्राधिकरण पत्रों के आधार पर प्रवेश करेंगे, ताकि पहुंच और नियंत्रण के बीच संतुलन बना रहे और प्रक्रिया पर वास्तविक समय में निगरानी संभव हो सके।

पश्चिम बंगाल में आरोप और आयोग का जवाब

कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम स्थित स्ट्रॉन्ग रूम में 4 मई की मतगणना से पहले सुरक्षा कड़ी की जा रही है। यह सख्ती तृणमूल कांग्रेस के उन आरोपों के बीच है, जिनमें BJP और निर्वाचन तंत्र की मिलीभगत से EVM और VVPAT तक पार्टी प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति में पहुंच बनाए जाने का दावा किया गया है।

तृणमूल नेताओं शशि पांजा और कुणाल घोष ने धरना देकर आरोप लगाया कि CCTV फुटेज में डाक मतपत्र क्षेत्र के भीतर अज्ञात लोगों की आवाजाही दिखती है और पार्टी पर्यवेक्षकों को दूर रखा गया। घोष ने प्रसारित दृश्यों में अनियमितताओं का मुद्दा उठाया, जबकि पांजा ने व्यवस्था में खामियों और संदिग्ध गतिविधियों पर सवाल किए।

पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने इन आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि स्ट्रॉन्ग रूम सुरक्षित हैं, आठ कमरों की CCTV निगरानी लगातार हो रही है, जिनमें सात EVM के लिए और एक डाक मतपत्रों के लिए है, और इसका सीधा प्रसारण भी उपलब्ध है।

अग्रवाल के अनुसार, दोपहर में हुई आवाजाही डाक मतपत्रों तक नियमित पहुंच से जुड़ी थी, जिसकी सूचना राजनीतिक दलों को दी गई थी और तीन प्रत्याशियों ने स्थल पर प्रक्रिया का सत्यापन भी किया। उन्होंने कहा कि कोई CCTV बंद नहीं किया गया, राजनीतिक प्रतिनिधि सुरक्षा घेरों के बाहर से निगरानी कर सकते हैं, और मतगणना पूरी तरह साफ-सुथरे तरीके से कराने के लिए कानून-व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

पश्चिम बंगाल में 4 मई की मतगणना से पहले मतपेटियों/स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा को लेकर तृणमूल कांग्रेस के आरोपों पर हमारी पिछली रिपोर्ट में विस्तार से चर्चा की गई थी। उसमें पार्टी द्वारा कथित CCTV फुटेज के आधार पर भाजपा और चुनाव आयोग के बीच मिलीभगत तथा संबंधित पक्षों की मौजूदगी के बिना मतपेटियां खोले जाने का दावा, साथ ही ममता बनर्जी, शशि पांजा और कुणाल घोष के विरोध-प्रदर्शन और एग्जिट पोल को लेकर उठाए गए सवाल शामिल थे।

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