पश्चिम बंगाल चुनाव नतीजों से पहले 294 सीटों पर टीएमसी-भाजपा मुकाबला केंद्र में
पश्चिम Bengal की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए मतगणना 4 मई को सुबह 8 बजे शुरू होती है, ऐसे समय में जब तृणमूल कांग्रेस अपने दशक पुराने शासन को बचाने और भाजपा राज्य में पहली सरकार बनाने की कोशिश कर रही है। 2026 में 92.47 प्रतिशत मतदान, 2021 के करीबी मुकाबलों की विरासत और Falta सीट पर पुनर्मतदान के आदेश इस चुनाव को राज्य की सत्ता के साथ राष्ट्रीय राजनीतिक संकेतों के लिए भी अहम बनाते हैं।
हाइलाइट्स
- Chanakya Strategies एग्जिट पोल ने भाजपा को 150-160 और तृणमूल कांग्रेस को 130-140 सीटें दी हैं, सत्ता परिवर्तन का संकेत मिलता है।
- चुनाव आयोग ने Falta विधानसभा क्षेत्र के सभी 285 मतदान केंद्रों पर गंभीर उल्लंघनों के कारण 21 मई को पुनर्मतदान का आदेश दिया।
- 2021 में तृणमूल कांग्रेस ने 213 और भाजपा ने 77 सीटें जीती थीं, इस बार वोट शेयर सत्ता संतुलन और राष्ट्रीय राजनीतिक बहस को प्रभावित करेगा।
मतगणना की रूपरेखा और प्रमुख संकेतक
FinancialExpress.com के अनुसार, इस चुनाव में मुकाबला CAA-NRC, कथित भर्ती घोटालों, कानून-व्यवस्था, केंद्र-राज्य टकराव और कल्याण योजनाओं के असर जैसे मुद्दों के बीच आकार लेता है। 2021 में तृणमूल कांग्रेस ने 213 सीटें जीतकर दो-तिहाई बहुमत हासिल किया था, जबकि भाजपा 77 सीटों के साथ मुख्य विपक्ष के रूप में उभरी थी, इसलिए इस बार सीटों का झुकाव राज्य की राजनीतिक दिशा के लिए खास महत्व रखता है।
भवानीपुर सबसे चर्चित मुकाबलों में शामिल है, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का सामना सुवेंदु अधिकारी से है। इसके अलावा डायमंड हार्बर, जादवपुर, बालीगंज, कोलकाता पोर्ट, बरुईपुर पश्चिम, आसनसोल दक्षिण, तमलुक, कांथी और खड़गपुर सदर जैसी सीटों पर नजर बनी हुई है, क्योंकि ये शहरी, अर्धशहरी और औद्योगिक इलाकों के रुझान का संकेत दे सकती हैं।
एग्जिट पोल राज्य में सत्ता परिवर्तन की संभावना दिखाते हैं, हालांकि ये आधिकारिक नतीजे नहीं हैं। Chanakya Strategies ने भाजपा को 150-160 और तृणमूल कांग्रेस को 130-140 सीटें दी हैं, जबकि Matrize और Poll Diary के अनुमान भी भाजपा को बढ़त में रखते हैं।
नियामकीय हस्तक्षेप और राजनीतिक असर
चुनाव आयोग ने 144-Falta विधानसभा क्षेत्र के सभी 285 मतदान केंद्रों, जिनमें सहायक केंद्र भी शामिल हैं, पर पुनर्मतदान का आदेश दिया है। आयोग के मुताबिक 29 अप्रैल के मूल मतदान के दौरान गंभीर चुनावी उल्लंघन और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित करने की घटनाएं सामने आईं, इसलिए वहां 21 मई को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक दोबारा मतदान और 24 मई को मतगणना तय है।क्षेत्रीय स्तर पर मतदाता आधार बंटा हुआ दिखता है। ग्रामीण और कई अर्धशहरी इलाकों में तृणमूल कांग्रेस को कल्याणकारी योजनाओं और स्थानीय संगठन से सहारा मिलता है, जबकि भाजपा ने उत्तर और दक्षिण बंगाल के कुछ हिस्सों, खासकर हिंदू-बहुल क्षेत्रों में, अपनी पकड़ मजबूत की है।
यही वजह है कि अंतिम नतीजे केवल अगली सरकार तय नहीं करते, बल्कि यह भी दिखाते हैं कि क्या भाजपा 2021 के वोट शेयर को पूर्ण सत्ता में बदल पाती है या तृणमूल कांग्रेस चौथा कार्यकाल हासिल कर लेती है। राज्य की प्रतीकात्मक राजनीतिक अहमियत को देखते हुए नतीजों का असर पश्चिम बंगाल से बाहर राष्ट्रीय विपक्ष बनाम भाजपा की बहस पर भी पड़ता है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में मतदान पूरा होने के बाद 4 मई की मतगणना से पहले की तस्वीर और तृणमूल कांग्रेस-भाजपा के बीच सीधी टक्कर का विश्लेषण किया गया था। इसमें भवानीपुर, नंदीग्राम, भांगर, समसेरगंज और पानीहाटी जैसी हाई-प्रोफाइल सीटों पर कड़े मुकाबलों के साथ मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और लाखों नाम हटाए जाने के दावों पर उठे विवाद का भी संदर्भ दिया गया था।
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