तमिलनाडु में गठबंधन तनाव के बीच DMK ने कांग्रेस पर पुराने राजनीतिक रुख में लौटने का आरोप लगाया

तमिलनाडु में गठबंधन तनाव के बीच DMK ने कांग्रेस पर पुराने राजनीतिक रुख में लौटने का आरोप लगाया
गठबंधन में बढ़ा तनाव

तमिलनाडु की सियासत में गठबंधन समीकरण फिर से दबाव में हैं, क्योंकि DMK ने अपनी विधायक दल की बैठक में कांग्रेस पर गंभीर राजनीतिक अविश्वास जताया है। पार्टी ने इसे धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील मोर्चे के लिए जोखिम बताया और मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन को तत्काल राजनीतिक फैसले लेने का अधिकार दिया है।

हाइलाइट्स

  • DMK ने अपने चौथे राजनीतिक प्रस्ताव में कांग्रेस पर धर्मनिरपेक्ष गठबंधन लाइन छोड़ने और पुराने राजनीतिक चरित्र में लौटने का आरोप लगाया।
  • DMK ने कहा कि कांग्रेस ने DMK नेतृत्व वाले गठबंधन के तहत 1 राज्यसभा सीट और 28 विधानसभा सीटें लेने के बाद वैकल्पिक मोर्चा तलाशना शुरू किया।
  • NSUI के राज्य सचिव धयानांथ कार्तिक ने कांग्रेस में 'विश्वासघात' और TVK के साथ संभावित नजदीकी के विरोध में पद से इस्तीफा दिया।

विधायक दल की बैठक में प्रस्ताव और आरोप

FinancialExpress.com की रिपोर्ट के अनुसार, DMK ने गुरुवार को पारित अपने चौथे और सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रस्ताव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की कड़ी आलोचना की। पार्टी ने कहा कि कांग्रेस धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन की रेखा से हटकर अपने "पुराने राजनीतिक चरित्र" में लौट रही है और इससे कठिन परिश्रम से हासिल चुनावी जीत खतरे में पड़ती है।

DMK ने कहा कि कांग्रेस ने DMK-नेतृत्व वाले गठबंधन के तहत एक राज्यसभा सीट और 28 विधानसभा सीटें हासिल कीं, लेकिन कुछ ही दिनों में वैकल्पिक मोर्चे की ओर बढ़ गई। प्रस्ताव में कहा गया कि इस कदम ने गठबंधन कार्यकर्ताओं की मेहनत से मिले जनादेश को कमजोर किया है।

बैठक में पारित पहले प्रस्ताव में तमिलनाडु की जनता और सहयोगी दलों का समर्थन के लिए आभार जताया गया। दूसरे प्रस्ताव में पार्टी अध्यक्ष एम. के. स्टालिन के दशकों लंबे नेतृत्व और राज्य तथा संगठन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की सराहना की गई।

तीसरे प्रस्ताव में DMK ने राजनीतिक अस्थिरता के बीच स्टालिन को तत्काल निर्णय लेने के लिए अधिकृत किया। पार्टी ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में तमिलनाडु एक और चुनाव के लिए तैयार नहीं है और स्थिर सरकार बनाए रखना जरूरी है।

विपक्षी खेमे पर असर और बढ़ती दरार

DMK ने यह भी कहा कि ऐसे राजनीतिक बदलाव तमिलनाडु में व्यापक धर्मनिरपेक्ष मोर्चे को कमजोर करते हैं और वैचारिक निरंतरता पर सवाल उठाते हैं। बैठक में नेताओं ने जोर दिया कि द्रविड़ आंदोलन के विरोधी राजनीतिक बलों को राज्य की राजनीति में जगह नहीं मिलनी चाहिए।

इन घटनाक्रमों का असर कांग्रेस के भीतर भी दिखाई दे रहा है। तमिलनाडु में नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया के राज्य सचिव धयानांथ कार्तिक ने "विश्वासघात" और "वैचारिक टकराव" का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

The Indian Express में प्रकाशित खुले पत्र में कार्तिक ने अभिनेता-राजनेता विजय के नेतृत्व वाली Tamilaga Vettri Kazhagam, TVK, के साथ कांग्रेस की संभावित नजदीकी पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि पार्टी अभी तक अपनी वैचारिक या राजनीतिक ताकत स्थापित नहीं कर सकी है और स्थानीय अहम मुद्दों पर उसकी चुप्पी चिंता बढ़ाती है।

यह पूरा घटनाक्रम तमिलनाडु के विपक्षी राजनीतिक क्षेत्र में बढ़ती खाई की ओर संकेत करता है। दूसरी ओर, DMK एक सख्त राजनीतिक संदेश देते हुए संभावित गठबंधन बदलावों के लिए अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत करती दिख रही है।

हमारी पिछली रिपोर्ट में कांग्रेस के DMK के साथ पुराना गठबंधन खत्म कर विजय की Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK) को सरकार गठन में समर्थन देने के फैसले और उससे बने नए सियासी समीकरण पर चर्चा की गई थी। उसमें बताया गया था कि TVK के 108 और कांग्रेस की 5 सीटों के बावजूद बहुमत के लिए CPI, CPI(M), VCK, PMK जैसे छोटे दल निर्णायक रहेंगे, और फ्लोर टेस्ट व राज्यपाल की प्रक्रिया आगे की दिशा तय कर सकती है।

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