तमिलनाडु में TVK सरकार गठन पर VCK की सत्ता हिस्सेदारी की मांग से गतिरोध गहराया
तमिलनाडु में चुनाव बाद सरकार गठन की प्रक्रिया शनिवार तक अनिश्चित बनी हुई है, क्योंकि Vijay की Tamilaga Vettri Kazhagam सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद बहुमत के आंकड़े से समर्थन जुटाने में लगी है। इसी बीच VCK का औपचारिक समर्थन पत्र नहीं आने से सत्ता संतुलन पर दबाव बढ़ा है और छोटे दलों की सौदेबाजी की अहमियत सामने आई है।
हाइलाइट्स
- VCK ने TVK सरकार को समर्थन देने के बदले उपमुख्यमंत्री पद और दो मंत्रिमंडलीय पदों की मांग रखी है।
- TVK ने सरकार गठन के लिए 118 विधायकों के बहुमत हेतु छोटे दलों का समर्थन जुटाना शुरू किया, जिससे VCK की मांगें महत्वपूर्ण बन गई हैं।
- DMK और AIADMK दोनों, Thirumavalavan को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे VCK की भूमिका निर्णायक होती जा रही है।
समर्थन वार्ता और पदों की मांग
PTI की रिपोर्ट के अनुसार, Viduthalai Chiruthaigal Katchi, Vijay के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन देने के बदले सत्ता में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी चाहती है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि पार्टी Thol Thirumavalavan के लिए उपमुख्यमंत्री पद और उसके दो नवनिर्वाचित विधायकों के लिए मंत्रिमंडल में जगह की मांग कर रही है।यह मांग ऐसे समय सामने आती है जब TVK राज्य में सरकार बनाने के लिए 118 विधायकों के बहुमत तक पहुंचने हेतु छोटे दलों का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है। सूत्रों ने कहा कि इन मांगों पर शुक्रवार शाम Thirumavalavan की अध्यक्षता में हुई एक वर्चुअल बैठक में चर्चा हुई।
रिपोर्ट के मुताबिक, VCK ने जातीय हत्याओं की जांच करने वाले आयोगों की निरंतरता और सरकारी नौकरियों में दलितों के लिए पदोन्नति में आरक्षण का मुद्दा भी उठाया है। एक अन्य राजनीतिक रूप से संवेदनशील प्रस्ताव के तहत, Vijay के दो सीटों से जीतने के बाद Tiruchirapalli East सीट खाली होने की स्थिति में Thirumavalavan को वहां उपचुनाव लड़ाने की संभावना पर भी पार्टी की रुचि बताई गई है।
तमिलनाडु की राजनीति पर असर
सार्वजनिक तौर पर VCK ने अपने रुख पर सावधानी बरती है। पार्टी के उप महासचिव Vanni Arasu ने उपमुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही बातचीत की खबरों की न तो पुष्टि की और न ही खंडन किया, लेकिन इतना कहा कि सत्ता में हिस्सेदारी पर पार्टी का रुख जनता की भावना को दर्शाता है।उन्होंने यह भी दोहराया कि VCK राज्यपाल शासन का विरोध करती है और उसका मानना है कि जनादेश मिलने के बाद TVK को सरकार बनाने का अवसर मिलना चाहिए। VCK ने चुनाव DMK के साथ मिलकर लड़ा था और पहले CPI तथा CPI(M) के साथ राजनीतिक तालमेल का संकेत दिया था, लेकिन उसने अब तक Vijay को औपचारिक समर्थन नहीं दिया है।
शनिवार सुबह तक राजनीतिक हलकों में यह अटकलें तेज रहीं कि DMK और AIADMK, दोनों खेमे Thirumavalavan को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं। Indian Express के अनुसार, TVK को रोकने के लिए व्यापक राजनीतिक समझौते की संभावनाओं पर भी चर्चा चल रही है, जिससे राज्य की सत्ता गणित में VCK की भूमिका और अधिक निर्णायक बन गई है।
तमिलनाडु में त्रिशंकु विधानसभा के बाद TVK के बहुमत जुटाने की चुनौती पर हमारी पिछली रिपोर्ट में बताया गया था कि 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद TVK को 118 के आंकड़े तक पहुंचने के लिए CPI, CPI(M) और VCK जैसे छोटे दलों के समर्थन पर निर्भर रहना पड़ रहा है। उस लेख में यह भी रेखांकित किया गया था कि Vijay की एक सीट रिक्त होने से संख्या गणित और कड़ा हो जाता है, जिससे Thol Thirumavalavan के नेतृत्व वाली VCK की भूमिका सरकार गठन और राज्य की राजनीतिक स्थिरता के लिए निर्णायक बनती है।
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