भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था कोर ग्रोथ ड्राइवर के रूप में उभरती, MOSPI सांख्यिकीय ढांचा बदलता
भारत में सेवा क्षेत्र के 50 प्रतिशत से अधिक हिस्से के बीच रचनात्मक और डिजिटल गतिविधियां अब आर्थिक वृद्धि के केंद्र में आ रही हैं। MOSPI इस बदलाव को नीति और मापन प्रणाली में शामिल करने के लिए अपने सांख्यिकीय ढांचे में संशोधन कर रहा है, ताकि अमूर्त संपदा और रचनात्मक उद्योगों का योगदान अधिक सटीक रूप से दर्ज हो सके।
हाइलाइट्स
- MOSPI सचिव डॉ. Saurabh Garg ने CII Annual Business Summit 2026 में बताया कि रचनात्मक अर्थव्यवस्था भारत की राष्ट्रीय समृद्धि की प्रमुख ग्रोथ ड्राइवर बन रही है।
- 2025 की नई National Industrial Classification (NIC) में पहली बार creative economy संज्ञायित की गई, जिसमें social media influencers और video gaming जैसे सेक्टर भी शामिल हैं।
- भारत ने Global Innovation Index में 2015 के 81वें स्थान से 2025 में 38वां स्थान हासिल किया, जबकि intellectual property products नई पूंजी निर्माण के 10% से अधिक के लिए जिम्मेदार हैं।
नई मापन प्रणाली और नीति संकेत
Forbes India के अनुसार, CII Annual Business Summit 2026 में MOSPI के सचिव डॉ. Saurabh Garg ने कहा कि रचनात्मक अर्थव्यवस्था अब हाशिये का क्षेत्र नहीं रही, बल्कि राष्ट्रीय समृद्धि की प्रमुख चालक बन चुकी है। उन्होंने कहा कि सरकार अब विनिर्माण और कृषि के साथ-साथ सेवाओं, रचनात्मक उद्योगों और डिजिटल गतिविधियों को भी विकास के केंद्रीय स्तंभ के रूप में देख रही है।
Garg ने कहा कि इस बदलाव को दर्शाने के लिए मंत्रालय सांख्यिकीय ढांचे का पुनर्गठन कर रहा है। इसके तहत नया Index of Services Production तैयार किया जा रहा है, जिसे सेवा क्षेत्र को उसी कठोरता से मापने के लिए बनाया गया है, जैसी Index of Industrial Production, IIP में अपनाई जाती है।
उन्होंने यह भी कहा कि 2025 National Industrial Classification, NIC में पहली बार “creative economy” को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है, जिसमें social media influencers और video gaming जैसे खंड भी आते हैं। उनके अनुसार, नीति निर्माण में अब वही चीजें मापी जानी चाहिए जिन्हें अर्थव्यवस्था वास्तव में महत्व देती है।
अनौपचारिक क्षेत्र, औपचारिककरण और Brand India पर असर
Garg ने भारत की नवाचार क्षमता में सुधार का भी उल्लेख किया और कहा कि देश Global Innovation Index में 2015 के 81वें स्थान से 2025 में 38वें स्थान पर पहुंचा है। उन्होंने कहा कि intellectual property products नई पूंजी निर्माण के 10 प्रतिशत से अधिक हिस्से के लिए जिम्मेदार हैं, हालांकि साहित्यिक, कलात्मक और मनोरंजन आधारित रचनात्मक हिस्से का योगदान अभी अपेक्षाकृत कम है।उन्होंने कहा कि भारत के लगभग 8 करोड़ अनौपचारिक उद्यमों में creative arts and entertainment पांचवां सबसे बड़ा खंड है, लेकिन प्रति व्यक्ति वार्षिक मूल्य वर्धन अक्सर लगभग 1 लाख रुपये पर सीमित रहता है। उनके अनुसार, इस आधारभूत प्रतिभा को वैश्विक ब्रांड में बदलने के लिए औपचारिककरण, वित्त तक बेहतर पहुंच और कानूनी ढांचे की मजबूती जरूरी है।
Garg ने रचनात्मक उद्योगों को शहरी-ग्रामीण और औपचारिक-अनौपचारिक विभाजन को पाटने वाला समावेशी क्षेत्र बताया। Viksit Bharat 2047 के लक्ष्य के संदर्भ में उन्होंने इसे Brand India से जोड़ा और कहा कि भारत अपनी सांस्कृतिक संपदाओं, जैसे भोजन से सिनेमा तक, को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में काम कर रहा है, जहां संस्कृति और वाणिज्य अब अलग-अलग क्षेत्र नहीं रह गए हैं।
हमारी पिछली रिपोर्ट में Stanford India Conference 2026 में शहरी शासन और प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दों पर हुई चर्चा को रेखांकित किया गया था, जहां बेंगलुरु के प्रशासनिक ढांचे और कार-केंद्रित मॉडल की सीमाओं पर सवाल उठे थे। उसी संदर्भ में सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देने और संस्थागत जवाबदेही मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया गया, साथ ही चुनावी प्रक्रियाओं व मतदाता सूची से जुड़े विवाद भी चर्चा में रहे।
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