आंध्र प्रदेश तीसरे और चौथे बच्चे पर नकद प्रोत्साहन बढ़ाने की तैयारी में

आंध्र प्रदेश तीसरे और चौथे बच्चे पर नकद प्रोत्साहन बढ़ाने की तैयारी में
बड़ा परिवार, बड़ा लाभ

आंध्र प्रदेश सरकार गिरती प्रजनन दर को पलटने के लिए बड़े परिवारों को प्रोत्साहित करने वाली नई वित्तीय और कल्याणकारी योजना पेश कर रही है। इस पहल के तहत तीसरे बच्चे पर 30,000 रुपये और चौथे बच्चे पर 40,000 रुपये की एकमुश्त सहायता का प्रस्ताव है, जबकि विस्तृत दिशा-निर्देश एक महीने में आने वाले हैं।

हाइलाइट्स

  • आंध्र प्रदेश सरकार ने तीसरे बच्चे के जन्म पर 30,000 रुपये और चौथे पर 40,000 रुपये नकद प्रोत्साहन की घोषणा की, योजना का विस्तृत प्रारूप एक महीने में आएगा।
  • तीसरे बच्चे के लिए मुख्यमंत्री नायडू ने पांच साल तक 1,000 रुपये मासिक पोषण सहायता और 18 वर्ष तक मुफ्त शिक्षा देने की प्रतिबद्धता जताई।
  • राज्य को प्रस्तावित नकद अनुदानों, पोषण सहायता और मुफ्त शिक्षा से दीर्घकालिक बजटीय बोझ का आकलन करना होगा, साथ ही निगरानी और सत्यापन तंत्र तैयार करने होंगे।

प्रोत्साहन पैकेज और क्रियान्वयन की रूपरेखा

FinancialExpress.com के अनुसार, मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने श्रीकाकुलम जिले के नरसन्नापेटा में सार्वजनिक सभा के दौरान कहा कि सरकार तीसरे बच्चे के जन्म पर 30,000 रुपये और चौथे बच्चे पर 40,000 रुपये देगी। उन्होंने यह भी कहा कि योजना का विस्तृत प्रारूप एक महीने के भीतर जारी किया जाएगा।

नायडू ने तीसरे बच्चे के लिए पांच साल तक हर महीने 1,000 रुपये के पोषण समर्थन का प्रस्ताव रखा और 18 वर्ष की आयु तक मुफ्त शिक्षा देने की प्रतिबद्धता जताई। यह घोषणा उस पहले के प्रस्ताव का विस्तार है जिसमें दूसरे बच्चे पर 25,000 रुपये देने पर विचार किया गया था, और स्वास्थ्य मंत्री सत्य कुमार यादव ने संकेत दिया कि प्रोत्साहन अब तीसरे और उससे आगे के जन्मों तक बढ़ाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बढ़ती आय और छोटे परिवारों की पसंद के कारण राज्य की जन्म दर घटी है। उनके अनुसार, प्रति महिला 2.1 बच्चों की प्रतिस्थापन स्तर प्रजनन दर बनाए रखना स्थिर आबादी, श्रम आपूर्ति और दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि के लिए जरूरी है।

राजकोषीय असर और क्षेत्रीय विकास का संदर्भ

इस प्रस्ताव का असर केवल जनसांख्यिकीय नीति तक सीमित नहीं है, क्योंकि राज्य को एकमुश्त अनुदान, मासिक पोषण सहायता और 18 वर्ष तक मुफ्त शिक्षा की दीर्घकालिक बजटीय लागत का आकलन करना होगा। नीति की प्रभावशीलता, पात्रता के मानदंड, आय-आधारित लक्ष्यीकरण और धोखाधड़ी रोकने के उपाय इसके क्रियान्वयन में प्रमुख प्रश्न बने हुए हैं।

समर्थकों ने इसे परिवार समर्थक कदम बताया है, जबकि आलोचक यह देखेंगे कि क्या सिर्फ नकद प्रोत्साहन से जन्म दर में स्थायी सुधार आता है या नहीं। स्वास्थ्य और शिक्षा विभागों को लाभ वितरण, बच्चों की संख्या का सत्यापन, पंजीकरण और निगरानी के ढांचे तैयार करने पड़ सकते हैं।

श्रीकाकुलम के भाषण में नायडू ने क्षेत्रीय विकास परियोजनाओं की समयसीमा भी दोहराई, जिनमें मद्दुवलसा चरण-द्वितीय को जनवरी 2027 तक, हीरामंडलम लिफ्ट सिंचाई परियोजना को अप्रैल 2027 तक और थोटापल्ली वितरिकाओं को जुलाई 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य शामिल है। उन्होंने तल्लीकी वंदनम योजना के तहत स्कूली बच्चों के लिए मौजूदा 15,000 रुपये वार्षिक सहायता का भी उल्लेख किया, जिससे यह संकेत मिलता है कि जनसंख्या नीति को व्यापक कल्याण और बुनियादी ढांचा एजेंडे के साथ जोड़ा जा रहा है।

2008-09 के वैश्विक वित्तीय संकट में UPA सरकार के प्रोत्साहन पैकेज और नीति प्रतिक्रिया पर हमारी पिछली रिपोर्ट में बताया गया था कि सरकार ने व्यापक मितव्ययिता के बजाय मौद्रिक राहत, तरलता समर्थन और लक्षित राजकोषीय प्रोत्साहन का मिश्रित रास्ता अपनाया। रिपोर्ट में तीन स्टिमुलस पैकेज (कुल 1.86 लाख करोड़ रुपये) के साथ राजकोषीय घाटे में बढ़ोतरी और बाद में औद्योगिक उत्पादन व निर्यात में तेज बहाली का उल्लेख था, जिससे अल्पकालिक समर्थन और मध्यम अवधि के वित्तीय संतुलन के बीच ट्रेड-ऑफ की तस्वीर सामने आती है।

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