ईडी ने कथित क्रिप्टो धोखाधड़ी जांच में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया
हिमाचल प्रदेश और पंजाब में दर्ज मामलों से जुड़ी कथित क्रिप्टो निवेश धोखाधड़ी की जांच में प्रवर्तन निदेशालय ने कार्रवाई तेज की है। एजेंसी के अनुसार, फर्जी निवेश मंचों के जरिए करीब 500 करोड़ रुपये की कथित ठगी में 2.48 लाख से अधिक उपयोगकर्ता प्रभावित हुए और कुल लेनदेन 219 मिलियन डॉलर से ऊपर रहे।
हाइलाइट्स
- प्रवर्तन निदेशालय ने क्रिप्टो धोखाधड़ी मामले में मिलन गर्ग, सुखदेव ठाकुर और अभिषेक शर्मा को धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत गिरफ्तार किया।
- जांच में खुलासा हुआ कि Korvio, DGT, Hypenext और A-Global जैसे फर्जी प्लेटफार्मों के जरिए निवेशकों को गुमराह कर पोंजी स्कीम के तहत बड़े पैमाने पर धन जुटाया गया।
- ईडी ने तीनों आरोपियों को 12 दिन की हिरासत में लिया है, जबकि जांच में अचल संपत्तियों में सुखदेव ठाकुर की 10% और अभिषेक शर्मा की 5% हिस्सेदारी का पता चला।
गिरफ्तारी और जांच का दायरा
प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, शिमला सब-जोनल कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 की धारा 19(1) के तहत मिलन गर्ग, सुखदेव ठाकुर और अभिषेक शर्मा को गिरफ्तार किया है। एजेंसी कहती है कि जांच हिमाचल प्रदेश और पंजाब में सुभाष शर्मा तथा अन्य कथित साजिशकर्ताओं के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी।जांच में एजेंसी का कहना है कि आरोपियों ने Korvio, DGT, Hypenext और A-Global जैसे कई फर्जी निवेश मंचों का इस्तेमाल किया और निवेशकों को ऊंचे तथा सुनिश्चित रिटर्न का लालच देकर धन जुटाया। ईडी के मुताबिक, 2018 में यह कथित क्रिप्टो आधारित मल्टी-लेवल मार्केटिंग योजना शुरू की गई थी, जिसे बाद में विदेशी सर्वरों पर स्थानांतरित किया गया और korvio.io तथा voscrow.com जैसे डोमेन के जरिए संचालित किया गया।
एजेंसी के अनुसार, सार्वजनिक निवेशकों को Korvio Coin (KRO) में निवेश के लिए कथित रूप से गुमराह किया गया, टोकन मूल्यों में हेरफेर हुआ और नई टोकन पेश कर पोंजी ढांचा चलाया गया, जिसमें नए निवेशकों के धन से पुराने निवेशकों को भुगतान किया जाता था। ईडी का कहना है कि डिजिटल रिकॉर्ड और डोमेन डेटा मिटाने की कोशिश के बावजूद बरामद डिजिटल साक्ष्यों से बड़े पैमाने पर निवेशक नामांकन और धन प्रवाह का पता चला है।
भूमिकाएं, संपत्ति और आगे की कार्रवाई
ईडी के मुताबिक, मिलन गर्ग इस कथित नेटवर्क के प्रमुख संचालकों में से एक और तकनीकी संरचना के मुख्य जिम्मेदार व्यक्ति थे। एजेंसी का आरोप है कि उन्होंने Korvio/Voscrow, Hypenext और A-Global मंचों का विकास और नियंत्रण किया, क्रिप्टो वॉलेट संभाले, निवेशकों का प्लेटफॉर्मों के बीच स्थानांतरण कराया और धन के प्रवाह तथा नकदी को क्रिप्टोकरेंसी में बदलने की प्रक्रिया को संचालित किया।एजेंसी का कहना है कि सुखदेव ठाकुर और अभिषेक शर्मा शुरुआती प्रचारकों में शामिल थे और उन्होंने ऊंचे रिटर्न के वादों के साथ निवेशक जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ईडी के अनुसार, दोनों ने निवेशकों से बड़ी मात्रा में नकदी एकत्र कर उसे विजय जुनेजा, मसूम जुनेजा और अन्य सह-आरोपियों तक पहुंचाया, जबकि मामले का कथित मास्टरमाइंड सुभाष शर्मा फिलहाल फरार है।
जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि कथित अपराध से अर्जित आय से अचल संपत्तियों में लाभकारी हिस्सेदारी ली गई, जिनमें Juneja Square में सुखदेव ठाकुर की 10 प्रतिशत और अभिषेक शर्मा की 5 प्रतिशत हिस्सेदारी शामिल है। ईडी ने यह भी कहा कि सुखदेव ठाकुर ने बैंक खातों और क्रिप्टो वॉलेट के जरिए धन का रूटिंग किया, जबकि अभिषेक शर्मा के बैंक खाते में भी धन शोधन से जुड़े व्यक्तियों और रियल एस्टेट परियोजनाओं के साथ महत्वपूर्ण लेनदेन दिखाई देते हैं।
तीनों आरोपी पहले से ही मूल अपराध में न्यायिक हिरासत में थे, जिसके बाद ईडी ने पीएमएलए अदालत, शिमला में प्रोडक्शन आवेदन दायर किया। अदालत ने उन्हें पेश किए जाने के बाद एजेंसी को 12 दिन की हिरासत दी है, ताकि कथित अपराध से अर्जित आय की कुल मात्रा और उसके धन शोधन की आगे जांच की जा सके। ईडी इससे पहले इसी मामले में हेम राज और मसूम जुनेजा को भी गिरफ्तार कर चुकी है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में बहु-राज्य जमा योजनाओं से जुड़े LUCC मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी द्वारा रवि शंकर तिवारी की PMLA के तहत गिरफ्तारी और अदालत से 10 दिन की हिरासत का विवरण दिया गया था। लेख में LUCC, LJCC और Option One Industries पर ऊंचे रिटर्न के वादों के जरिए लाखों निवेशकों के धन के कथित दुरुपयोग, संदिग्ध बैंक लेनदेन और अपराध की आय से अचल संपत्तियां खरीदने के आरोपों की पृष्ठभूमि भी बताई गई थी।
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