बिहार में निवेश धोखाधड़ी मामले में ED ने तलाशी अभियान तेज किया

बिहार में निवेश धोखाधड़ी मामले में ED ने तलाशी अभियान तेज किया
बिहार में ED की कार्रवाई

बिहार के मुंगेर जिले में कथित निवेश धोखाधड़ी की जांच अब मनी लॉन्ड्रिंग पहलू तक फैल रही है, क्योंकि प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में कई ठिकानों पर तलाशी ली है। जांच का दायरा Jollywood Music Industries Pvt. Ltd. और DLMS Jollywood Music Pvt. Ltd. से जुड़े कथित निवेश जुटाने, संपत्ति खरीद और भुगतान मॉडल में हेरफेर तक पहुंचता है.

हाइलाइट्स

  • ED ने 6 अगस्त 2026 को मुंगेर में Jollywood Music Industries Pvt. Ltd. और DLMS Jollywood Music Pvt. Ltd. के खिलाफ पांच जगहों पर तलाशी अभियान चलाया।
  • कंपनियों ने निवेशकों से कुल 11.67 करोड़ रुपये जुटाए; सॉफ्टवेयर में हेरफेर कर निवेशकों को भुगतान शर्तें पूरी करने से रोका गया।
  • तलाशी के दौरान अचल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज, बैंक खाता विवरण, निवेशकों की सूची आदि बरामद हुए, एजेंसी आगे जांच कर रही है।

तलाशी अभियान और कथित निवेश मॉडल

प्रवर्तन निदेशालय की एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार (Enforcement Directorate), पटना जोनल कार्यालय ने 6 अगस्त 2026 को बिहार के मुंगेर जिले में पांच स्थानों पर धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत तलाशी अभियान चलाया। एजेंसी यह कार्रवाई M/s Jollywood Music Industries Pvt. Ltd. और M/s DLMS Jollywood Music Pvt. Ltd. से जुड़े कथित निवेश धोखाधड़ी मामले में कर रही है, जिन पर मुंगेर के एक परिवार, जितेंद्र कुमार राजीव और उसके सहयोगियों के नियंत्रण का आरोप है.

जांच एजेंसी का कहना है कि योजना में लोगों को "डिजिटल जॉब" और निवेश दोगुना होने का वादा करके आकर्षित किया गया। निवेशकों से कहा गया कि वे 2,56,500 रुपये का निवेश करें और कंपनी की वेबसाइट पर हर महीने 4,800 ऑडियो या वीडियो देखें, जिसके बदले उन्हें 15,000 रुपये मासिक आय और अतिरिक्त सक्रियता पर बोनस मिलेगा। नए निवेशक जोड़ने पर अतिरिक्त भुगतान, तथा अधिक लोगों को लाने वालों को बाइक और कार जैसे प्रोत्साहन देने का भी कथित वादा किया गया.

ED के मुताबिक, निवेश राशि जुटाने के बाद कंपनी के सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने जानबूझकर वेबसाइट की गति धीमी कर दी, जिससे उपयोगकर्ताओं के लिए हर महीने निर्धारित 4,800 ऑडियो या वीडियो देख पाना तकनीकी रूप से संभव नहीं रहा। एजेंसी का आरोप है कि इस कथित हेरफेर ने निवेशकों को भुगतान पाने की शर्तें पूरी करने से रोक दिया.

जांच की पृष्ठभूमि और संभावित असर

एजेंसी के अनुसार, इस योजना में कुल निवेश लगभग 11.67 करोड़ रुपये तक पहुंचा। निवेशकों से दो मुख्य निवेश श्रेणियों में से किसी एक के जरिए "सिक्योरिटी मनी" जमा करने को कहा गया था.

यह जांच BNS, 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज FIR के आधार पर शुरू हुई, जिसमें जितेंद्र कुमार राजीव, धीरज कुमार और अन्य पर जमालपुर, मुंगेर तथा आसपास के क्षेत्रों में लोगों को कथित रूप से लुभाने का आरोप है। ED पटना ने वर्ष 2025 में इस मामले की जांच अपने हाथ में ली और जांच के दौरान पाया कि आरोपियों द्वारा जुटाई गई राशि को विभिन्न अचल संपत्तियों की खरीद में मोड़ा गया.

इसी क्रम में निदेशकों, तकनीकी या सॉफ्टवेयर विशेषज्ञों, गायकों और अन्य संबद्ध व्यक्तियों के आवासीय परिसरों पर तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान अचल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज, बैंक खाते का ब्योरा, समझौते, निवेश विवरण और निवेशकों की सूची जैसे कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद और जब्त किए गए हैं। एजेंसी इन दस्तावेजों की जांच कर रही है और मामले में आगे की कार्रवाई जारी है.

हमारी पिछली रिपोर्ट में PACL से जुड़े कथित सामूहिक निवेश घोटाले की जांच के तहत प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दिल्ली में 45 अचल संपत्तियों की अस्थायी कुर्की का विवरण था। एजेंसी के मुताबिक, करीब 999.66 करोड़ रुपये मूल्य की ये संपत्तियां निवेशकों से जुटाए गए धन से खरीदी गई थीं और मामले में अब तक भारत व विदेश में हजारों करोड़ रुपये की परिसंपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं।

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