विक्सित भारत 2047 के लिए वित्त जुटाने पर केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय का दायरा बढ़ रहा है, क्योंकि सार्वजनिक खर्च का बड़ा हिस्सा राज्यों के माध्यम से होता है। सरकार का कहना है कि इस लक्ष्य के पैमाने को केवल बजटीय संसाधनों से पूरा नहीं किया जा सकता, इसलिए निजी और बहुपक्षीय पूंजी की भूमिका अहम रहने वाली है।
हाइलाइट्स
- राज्यों को विक्सित भारत वित्तपोषण कार्यसमूहों में शामिल किया जाएगा, जो क्षेत्रवार ढांचागत जरूरतों की पहचान कर रिपोर्ट तैयार करेंगे।
- पूर्व वित्त सचिव सुधीर श्रीवास्तव के अनुसार वर्ष 2024 में राज्यों का कुल खर्च लगभग 64 लाख करोड़ रुपये और पूंजीगत व्यय 11 लाख करोड़ रुपये रहेगा।
- N K Singh ने भारत में 10-12.5 प्रतिशत पूंजी लागत को ASEAN देशों के मुकाबले अधिक बताते हुए बहुपक्षीय फंडिंग की क्षमता के बेहतर उपयोग की सिफारिश की।
वित्तपोषण ढांचे में राज्यों की भागीदारी
Forbes India के अनुसार, आर्थिक कार्य विभाग की सचिव अनुराधा ठाकुर ने शुक्रवार को कहा कि वित्त मंत्रालयों और विधानमंडल वाले केंद्र शासित प्रदेशों के सम्मेलन के निष्कर्षों को आगे बढ़ाने वाले कार्यसमूहों में राज्यों को सदस्य बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि हर थीमैटिक सत्र के लिए मॉडरेटरों के मार्गदर्शन में कार्यसमूह चिन्हित किए गए हैं और उनकी रिपोर्टیں विक्सित भारत की दिशा में क्षेत्रवार जरूरतों को रेखांकित करेंगी।नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, राज्यों के मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री और वित्त सचिव शामिल हैं। सम्मेलन में कृषि, ऊर्जा संक्रमण और नई प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सार्वजनिक और निजी वित्त के मिश्रण के जरिए 2047 के लक्ष्य के लिए संसाधन जुटाने के रास्तों पर चर्चा हो रही है।
ठाकुर ने कहा कि नीति, वित्तीय स्रोतों के उपयोग और सबसे महत्वपूर्ण, क्रियान्वयन में साझेदारी इस लक्ष्य को निर्णायक रूप से आगे बढ़ा सकती है। उनके अनुसार, इस पैमाने की जरूरतें केवल सरकारी बजटों से पूरी नहीं हो सकतीं और निजी क्षेत्र के वित्तपोषण को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।
निजी पूंजी, बहुपक्षीय फंडिंग और राज्यों की वित्तीय क्षमता
N K Singh ने कार्यसमूहों के नतीजों की हर छह महीने में समीक्षा के लिए एक सशक्त शीर्ष समूह बनाने की सिफारिश की। उन्होंने कहा कि जहां एजेंडा एक-दूसरे से जुड़ते हैं, वहां कार्यसमूहों को मिलकर काम करना चाहिए, जैसे कृषि और ऊर्जा के मामले में कृषि बिजली सब्सिडी और वितरण घाटे की संयुक्त समीक्षा।निजी पूंजी पर सिंह ने कहा कि बाधा संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि बैंक योग्य परियोजनाओं की कमी है। उन्होंने परियोजना पाइपलाइन के स्वतंत्र आकलन, बेहतर जोखिम-साझेदारी और Hybrid Annuity Model जैसे ढांचों के व्यापक उपयोग की वकालत की, साथ ही कहा कि भारत में 10 से 12.5 प्रतिशत पूंजी लागत मलेशिया, थाईलैंड, वियतनाम और इंडोनेशिया के 6 से 10 प्रतिशत स्तर से अधिक है।
उन्होंने राज्यों को World Bank सहित बहुपक्षीय ऋणदाताओं से अधिक संसाधन जुटाने पर भी जोर दिया। सिंह ने कहा कि बहुपक्षीय विकास बैंकों के पास अप्रयुक्त ऋण क्षमता है और हाइब्रिड कैपिटल के जरिये एक डॉलर पर एक दशक में छह डॉलर तक की ऋण सहायता संभव है।
पूर्व महाराष्ट्र वित्त सचिव सुधीर श्रीवास्तव की प्रस्तुति में दिखाया गया कि विक्सित भारत एजेंडा का बड़ा हिस्सा राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आता है। राज्यों का इस वर्ष लगभग 64 लाख करोड़ रुपये खर्च करने का अनुमान है, जबकि केंद्र का खर्च 55 लाख करोड़ रुपये है; राज्यों ने करीब 11 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय का प्रावधान किया है, जो GSDP का 2.4 प्रतिशत है, और इसे 2031-32 तक 3 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखने की बात कही गई है।
प्रस्तुति में यह भी सामने आया कि राज्यों की वित्तीय क्षमता में बड़ा अंतर है। प्रति व्यक्ति स्वयं के कर राजस्व का दायरा लगभग 5,000 रुपये से 38,000 रुपये तक है, जबकि बकाया देनदारियां GSDP के लगभग 19 प्रतिशत से 46 प्रतिशत तक हैं, जिससे विक्सित भारत के वित्तपोषण में राज्यवार रणनीतियों की जरूरत और स्पष्ट होती है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में Cantabil Retail India Ltd. की क्रेडिट रेटिंग में हुए उन्नयन पर चर्चा की गई थी, जिसे कंपनी के बेहतर वित्तीय प्रदर्शन और बाजार पकड़ के संकेत के रूप में देखा गया। लेख में बताया गया था कि रेटिंग सुधार से सस्ते वित्तपोषण विकल्प, पूंजी की बेहतर उपलब्धता और विस्तार योजनाओं को समर्थन मिलने की संभावना बढ़ती है, जिससे निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होता है।
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