ओडिशा में अवैध खनन मामले में ईडी ने रतिकांत राउत के खिलाफ अभियोजन शिकायत दायर की
ओडिशा में अवैध खनन और विस्फोटकों की कथित अवैध आपूर्ति से जुड़े धनशोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने रतिकांत राउत के खिलाफ विशेष अदालत में पूरक अभियोजन शिकायत दायर की है। एजेंसी की जांच में 341 करोड़ रुपये से अधिक की कथित अपराध आय का पता चला है, जो खनन, खनिज चोरी और संबंधित कारोबारी इकाइयों के जरिये धन के प्रवाह से जुड़ी बताई गई है।
हाइलाइट्स
- प्रवर्तन निदेशालय ने 16.10.2026 को रतिकांत राउत के खिलाफ पीएमएलए अदालत, भुवनेश्वर में पहली पूरक अभियोजन शिकायत दायर की।
- ईडी जांच से सामने आया कि रतिकांत राउत और संबद्ध इकाइयों ने 341 करोड़ रुपये से अधिक की कथित अपराध आय अवैध खनन और विस्फोटकों की खरीद से अर्जित की।
- ओडिशा स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर के ड्रोन व उपग्रह सर्वेक्षण में पट्टा क्षेत्र के अंदर व बाहर सात हिस्सों में अवैध उत्खनन की पुष्टि हुई।
अदालती कार्यवाही और जांच का दायरा
जैसा कि Enforcement Directorate द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, भुवनेश्वर क्षेत्रीय कार्यालय ने 16.10.2026 को रतिकांत राउत के खिलाफ विशेष अदालत, पीएमएलए, भुवनेश्वर में यह अभियोजन शिकायत दायर की। यह इस मामले में पहली पूरक अभियोजन शिकायत है, जबकि मुख्य अभियोजन शिकायत 07.07.2026 को लक्ष्मीप्रिया प्रस्ती और अन्य के खिलाफ दायर की गई थी.एजेंसी ने रतिकांत राउत को 20.08.2026 को धनशोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत गिरफ्तार किया था। ईडी का कहना है कि राउत पर अपने नाम, परिवार के सदस्यों के नाम और संबद्ध संस्थाओं के माध्यम से चल और अचल संपत्तियों के रूप में कथित अपराध आय के अधिग्रहण, कब्जे और छिपाव में शामिल होने का आरोप है.
ईडी ने कहा कि राउत के खिलाफ ओडिशा के विभिन्न थानों में 27 प्राथमिकी दर्ज हैं, जिनमें अवैध खनन, चोरी, डकैती और विस्फोटकों की आपूर्ति जैसे आरोप शामिल हैं। गिरफ्तारी के बाद उन्हें 21.08.2026 को विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने 26.08.2026 तक पांच दिन की ईडी हिरासत दी। 26.08.2026 को अदालत ने उनकी जमानत अर्जी खारिज कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया, जबकि 07.09.2026 को आगे जुटाई गई सामग्री को देखते हुए ईडी को चार दिन की अतिरिक्त हिरासत दी गई।
341 करोड़ रुपये से अधिक की कथित अपराध आय
जांच की शुरुआत ओडिशा पुलिस द्वारा भारतीय दंड संहिता, आयुध अधिनियम, 1959 और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 के तहत दर्ज प्राथमिकी के आधार पर हुई, जिनमें पीएमएलए के तहत अनुसूचित अपराध शामिल हैं। ईडी के अनुसार, जांच में सामने आया कि रतिकांत राउत और उनसे जुड़ी इकाइयों ने 341 करोड़ रुपये से अधिक की कथित अपराध आय उत्पन्न की और अर्जित की.एजेंसी का आरोप है कि यह धन अवैध खनन, विस्फोटकों की अवैध खरीद और इस्तेमाल, तथा खनिजों की चोरी और मिलावट से उत्पन्न हुआ। ईडी ने कहा कि राउत के पास ढेंकानाल में लघु खनिज खदान पट्टे थे, लेकिन उन्होंने अनुमत सीमा से अधिक खुदाई की और अनधिकृत क्षेत्रों से भी खनिज निकाले.
ओडिशा स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर, ORSAC, के ड्रोन और उपग्रह सर्वेक्षण में कथित तौर पर पट्टा क्षेत्र के भीतर अतिरिक्त खुदाई और स्वीकृत सीमा के बाहर सात हिस्सों में अवैध उत्खनन पाया गया। इनमें सरकारी भूमि और उनकी कंपनी M/s Assurance Condev Pvt. Ltd. के स्वामित्व वाली भूमि भी शामिल बताई गई है.
ईडी के अनुसार, धन के परतदार लेनदेन और आवाजाही में Maa Tarini Stone Crusher, RLR Mercantile, Sai Sambhu Infrastructure Pvt. Ltd., Assurance Metalloyd Exim Pvt. Ltd. और लक्ष्मीप्रिया प्रस्ती समेत संबंधित व्यक्तियों और इकाइयों का इस्तेमाल किया गया। एजेंसी ने यह भी कहा कि 08.01.2025 को राउत और उनसे जुड़ी इकाइयों के कई परिसरों पर पीएमएलए की धारा 17 के तहत तलाशी ली गई थी, जिससे कथित अपराध आय की पहचान हुई।
विशेष अदालत पहले ही राउत की जमानत याचिका खारिज कर चुकी है और ईडी भुवनेश्वर द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों पर प्रथमदृष्टया धनशोधन में संलिप्तता का अवलोकन कर चुकी है। मामले में आगे की जांच जारी है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में डॉ. बी.आर. आंबेडकर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड से कथित धन की हेराफेरी से जुड़े धनशोधन मामले में ईडी की कार्रवाई पर अपडेट दिया गया था। इसमें फर्जी बैंक खाते और जाली दस्तावेजों के जरिए लगभग 14.95 करोड़ रुपये की कथित निकासी, साथ ही संपत्तियों की जब्ती/कुर्की के अनुरोध और पीएमएलए अदालत में पूरक अभियोजन शिकायत दायर किए जाने की जानकारी शामिल थी।
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