मिजोरम और मणिपुर में ईडी ने नार्को-हवाला नेटवर्क पर कार्रवाई तेज की, 1,424 खाते फ्रीज

मिजोरम और मणिपुर में ईडी ने नार्को-हवाला नेटवर्क पर कार्रवाई तेज की, 1,424 खाते फ्रीज
ईडी का बड़ा अभियान

म्यांमार से जुड़े सीमा-पार मादक पदार्थ और हवाला नेटवर्क पर जांच तेज करते हुए प्रवर्तन निदेशालय ने मिजोरम और मणिपुर में समन्वित तलाशी अभियान चलाया है। इस कार्रवाई में छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 26 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां अटैच या फ्रीज की गई हैं, जबकि जांच अब बैंक अधिकारियों, सीएसपी ऑपरेटरों और अन्य लाभार्थी खातों तक बढ़ रही है।

हाइलाइट्स

  • ईडी ने मिजोरम और मणिपुर में नार्को-हवाला मामलों की जांच के तहत 1,424 बैंक खाते फ्रीज किए और 26 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति सुरक्षित की।
  • 2024 से जून 2026 तक चुराचांदपुर के मिनी-एटीएम और सीएसपी के जरिये 2,947 ट्रांसफर में 175.03 करोड़ रुपये जोखावथार, चंफाई, लॉन्गतलाई व ऐजोल भेजे गए।
  • जांच में पता चला कि प्राप्त रकम एनईएफटी, आरटीजीएस, आईएमपीएस के जरिए आगे बढ़ाकर म्यांमार के ड्रग सप्लायर्स तक परतदार हवाला लेनदेन से पहुंचाई जाती थी।

तलाशी, गिरफ्तारी और संपत्ति जब्ती का दायरा

प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, Enforcement Directorate के ऐजोल और इंफाल उप-क्षेत्रीय कार्यालयों ने 23 अक्टूबर 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत ऐजोल, चंफाई, लॉन्गतलाई और चुराचांदपुर में कई परिसरों पर तलाशी ली। यह कार्रवाई म्यांमार से हेरोइन, ब्राउन शुगर और मेथामफेटामिन टैबलेट्स की तस्करी तथा उससे जुड़ी हवाला सेटलमेंट की तीन धनशोधन जांचों में की गई, जिसमें नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो और मिजोरम पुलिस ने समानांतर कार्रवाई की।

कार्रवाई के दौरान ईडी ने 1,424 बैंक खाते फ्रीज किए, जो कथित तौर पर नार्को-ट्रेड और नार्को-हवाला ऑपरेटरों से जुड़े हैं। एजेंसी ने मिजोरम स्थित ऑपरेटरों की 17.82 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच कीं, जबकि पहले फ्रीज किए गए 8.19 करोड़ रुपये के साथ कुल सुरक्षित संपत्ति 26 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है।

तलाशी के दौरान धन शोधन निवारण अधिनियम की धारा 19 के तहत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें मिजोरम से तीन और मणिपुर से तीन लोग शामिल हैं। मादक पदार्थ मामलों में पहले से न्यायिक हिरासत में बंद चार और आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी हेतु प्रोडक्शन आवेदन मिजोरम की विशेष अदालत में प्रक्रिया में हैं।

ईडी की जांच तीन मामलों से शुरू हुई थी, जिनका आधार एनडीपीएस अधिनियम के तहत दर्ज प्राथमिकी थीं। इनमें 2025 और 2026 के वे मामले शामिल हैं जिनमें चंफाई, सेलिंग और चुराचांदपुर सेक्टर में हेरोइन, मेथामफेटामिन टैबलेट्स, ब्राउन शुगर और कथित ड्रग मनी जब्त हुई थी।

पूर्वोत्तर कॉरिडोर में नार्को-हवाला तंत्र का असर

जांच में एक आपस में जुड़ा नार्को-हवाला तंत्र सामने आया है, जिसमें चंफाई, ऐजोल और लॉन्गतलाई के बैंक खातों का इस्तेमाल मणिपुर, मिजोरम, असम और त्रिपुरा में पैदा हुए ड्रग धन को इकट्ठा कर म्यांमार स्थित आपूर्तिकर्ताओं तक सेटल करने के लिए किया जाता है। ईडी का कहना है कि म्यांमार से लगी 1,643 किलोमीटर की झरझरी सीमा के कारण पूर्वोत्तर गोल्डन ट्राएंगल में बने मादक पदार्थों का प्रमुख स्थलीय कॉरिडोर बन गया है।

जांच के मुताबिक चंफाई-जोखावथार सेक्टर दोतरफा मार्ग की तरह काम करता है। एक ओर भारत से कैफीन एनहाइड्रस और एल्युमिनियम क्लोराइड एनहाइड्रस जैसे रसायन सीमा पार भेजे जाते हैं, वहीं दूसरी ओर म्यांमार में तैयार हेरोइन, ब्राउन शुगर और मेथामफेटामिन टैबलेट्स तियाउ नदी पार कर मिजोरम और मणिपुर में दाखिल होती हैं और आगे असम, त्रिपुरा, भारत के अन्य हिस्सों तथा बांग्लादेश की ओर बढ़ती हैं।

ईडी ने कहा है कि चुराचांदपुर में नकद वसूली करने वाले सिंडिकेट ऑपरेटिव और मिनी-एटीएम या कस्टमर सर्विस प्वाइंट काउंटर इस तंत्र की अहम कड़ी रहे हैं। एजेंसी के अनुसार, एक काउंटर के जरिये 2024 से जून 2026 के बीच 2,947 ट्रांसफर में कुल 175.03 करोड़ रुपये भेजे गए, जिनका गंतव्य जोखावथार, चंफाई, लॉन्गतलाई और ऐजोल के व्यापारी, फार्मेसी और व्यक्ति थे।

जांच में यह भी सामने आया है कि लाभार्थी खातों में आई रकम बहुत कम नकद निकासी के साथ आरटीजीएस, एनईएफटी और आईएमपीएस के जरिये आगे बढ़ाई गई। ईडी के मुताबिक सात विश्लेषित खातों में प्राप्त 11.98 करोड़ रुपये में से केवल 17 लाख रुपये नकद निकाले गए, जबकि एक चंफाई स्थित गृहिणी के खाते में, जिसे उसके बैंक-कर्मचारी पति संचालित करते थे, 15.48 करोड़ रुपये आए।

एजेंसी के अनुसार, परतदार लेनदेन के बाद धन चंफाई के बिना लाइसेंस वाले रुपया-क्यात एक्सचेंजरों तक पहुंचता है और वहां से म्यांमार स्थित आपूर्तिकर्ताओं का भुगतान किया जाता है। जांच में दिल्ली, कोलकाता और मुंबई से भी संबंधित खातों में धन आने के संकेत मिले हैं, जिससे यह आशंका मजबूत होती है कि महानगरीय शहरों में बिके मादक पदार्थों की आय भी हवाला और शेल इकाइयों के जरिये सीमा क्षेत्र तक लौट रही थी।

तलाशी में नकद प्राप्ति और ट्रांसफर के लेजर, चेक बुक, डेबिट कार्ड, मोबाइल फोन और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए। ईडी ने कहा है कि जांच अब चुराचांदपुर के मिनी-एटीएम और सीएसपी क्लस्टर के अन्य ग्राहकों, लाभार्थी खाता संचालकों, म्यांमार स्थित प्राप्तकर्ताओं, रसायनों के अंतिम उपयोगकर्ताओं और बैंक अधिकारियों की भूमिका तक बढ़ रही है।

हमारी पिछली रिपोर्ट में OSBPL (Ocean Seven Buildtech) से जुड़े कथित रियल एस्टेट धनशोधन मामले में ईडी द्वारा 136.42 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों की अस्थायी कुर्की का विवरण दिया गया था। उसमें बताया गया था कि खरीदारों से जुटाई गई रकम के कथित दुरुपयोग और परियोजनाएं विकसित न होने के आरोपों के आधार पर जांच आगे बढ़ी, और एफआईआर के बाद संपत्तियों के हस्तांतरण को भी कुर्की आदेश में शामिल किया गया।

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