बिहार कांस्टेबल परीक्षा पेपर लीक मामले में ईडी ने 2.01 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क कीं

बिहार कांस्टेबल परीक्षा पेपर लीक मामले में ईडी ने 2.01 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क कीं
ईडी की बड़ी कार्रवाई

बिहार कांस्टेबल भर्ती 2023 परीक्षा के पेपर लीक मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने धनशोधन जांच के तहत 2.01 करोड़ रुपये मूल्य की पांच अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की हैं। यह कार्रवाई उस कथित साजिश के बाद हुई है जिसमें प्रश्नपत्र छपाई का ठेका हासिल करने, धन के कथित दुरुपयोग और शेल इकाइयों के जरिए रकम को छिपाने का आरोप सामने आया है।

हाइलाइट्स

  • ईडी ने बिहार कांस्टेबल 2023 पेपर लीक मामले में 2.01 करोड़ रुपये मूल्य की पांच अचल संपत्तियां कुर्क कीं।
  • Caltex Multiventures Pvt. Ltd. ने कथित धोखाधड़ी से ठेका हासिल किया, 5.9 करोड़ रुपये में से 2.01 करोड़ रुपये शेल इकाइयों के जरिये स्थानांतरित किए।
  • पेपर लीक और धनशोधन के कारण परीक्षा रद्द हुई, जिससे बिहार सरकार को आर्थिक नुकसान और अभ्यर्थियों के करियर पर प्रतिकूल असर पड़ा।

जांच में ठेका, प्रिंटिंग और धन प्रवाह के आरोप

Enforcement Directorate के अनुसार, पटना जोनल कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत यह कुर्की बिहार कांस्टेबल भर्ती 2023 परीक्षा पेपर लीक मामले की जांच में की है। एजेंसी की जांच पटना की आर्थिक अपराध इकाई द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर शुरू हुई, जिसमें टेलीग्राम यूआरएल, मोबाइल नंबरों और बैंक खातों के जरिए प्रश्नपत्र लीक करने के आरोप शामिल हैं।

22 अगस्त 2024 की आरोपपत्र के अनुसार, Blessings Secured Press Pvt. Ltd. के मालिक कौशिक कुमार कर ने कथित तौर पर Caltex Multiventures Pvt. Ltd. नामक प्रॉक्सी कंपनी के माध्यम से प्रश्नपत्र छपाई का ठेका हासिल करने की साजिश रची। आरोप है कि Central Selection Board of Constable, Bihar ने Caltex को ठेका दिया, जबकि उसके पास न तो पूर्व प्रिंटिंग अनुभव था और न ही अपनी प्रिंटिंग प्रेस, और इस व्यवस्था से Blessings Secured Press की भूमिका छिपाई गई, जिसे पहले परीक्षा पेपर लीक मामलों में ब्लैकलिस्ट किया जा चुका था।

ईडी का कहना है कि Caltex Multiventures ने कथित धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश के जरिए ठेका हासिल किया और अनुबंध शर्तों का उल्लंघन करते हुए काम Blessings Secured Press को सौंप दिया। जांच में यह भी सामने आया है कि कंपनी को 5.9 करोड़ रुपये की अग्रिम राशि मिली, जिसमें से केवल एक हिस्सा Blessings Secured Press को भेजा गया, जबकि 2.01 करोड़ रुपये विभिन्न शेल इकाइयों के जरिए कथित रूप से मोड़ दिए गए।

कुर्क संपत्तियां और मामले का व्यापक असर

एजेंसी के मुताबिक, कथित अपराध से अर्जित धन को कोलकाता स्थित ऐसी शेल कंपनियों और इकाइयों के नेटवर्क के माध्यम से परतदार बनाया गया जिनके वास्तविक कारोबारी संचालन नहीं थे। जांच में यह भी आरोप है कि धन को फर्जी लेनदेन के जरिए विभिन्न इकाइयों में भेजकर उसकी उत्पत्ति और प्रकृति छिपाई गई, और अंततः उसे नकदी में बदलकर धन के प्रवाह को समाप्त कर दिया गया।

ईडी ने कहा कि जब कथित अपराध की आय का आगे पता नहीं चल सका, तब M/s NC Print Pvt. Ltd. के नाम पर दर्ज पांच अचल संपत्तियां 2.01 करोड़ रुपये के मूल्य समतुल्य के रूप में अस्थायी रूप से कुर्क की गईं। एजेंसी का आरोप है कि यह कंपनी भी कौशिक कुमार कर के नियंत्रण और लाभकारी स्वामित्व में है।

मामले का असर केवल कथित वित्तीय अनियमितताओं तक सीमित नहीं रहा, क्योंकि प्रश्नपत्र लीक होने के बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी। इससे बिहार सरकार को वित्तीय नुकसान हुआ और अभ्यर्थियों के करियर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।

एजेंसी ने कहा कि अतिरिक्त अपराध आय की पहचान और धनशोधन में शामिल अन्य आरोपियों तथा इकाइयों की भूमिका की जांच जारी है।

हमारी पिछली रिपोर्ट में केरल में सहकारी समितियों और बैंकों से जुड़े कथित धोखाधड़ी मामलों में प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई का ब्यौरा दिया गया था, जहां 27 मामलों में लगभग 550 करोड़ रुपये की कथित अपराध आय की जांच की जा रही थी। लेख में 7 अक्टूबर 2026 को तीन मामलों से जुड़े 17 परिसरों पर एक साथ तलाशी, दस्तावेज़ों व डिजिटल साक्ष्यों की जब्ती और सावधि जमाओं/खातों पर रोक जैसे कदमों के जरिए धन-ट्रेल और जमाकर्ताओं को हुए नुकसान की भरपाई पर फोकस को रेखांकित किया गया था।

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