RBI ने सरकारी प्रतिभूति नीलामी में 32,000 करोड़ रुपये जुटाए
भारतीय रिजर्व बैंक ने 6.36% GS 2031 और 7.71% GS 2066 सरकारी प्रतिभूतियों की नीलामी के पूर्ण परिणाम जारी किए हैं। इस निर्गम के तहत कुल 32,000 करोड़ रुपये की अधिसूचित राशि रखी गई, जबकि दोनों प्रतिभूतियों के लिए प्रतिस्पर्धी बोलियां इससे काफी अधिक रहीं।
हाइलाइट्स
- RBI ने 6.36% GS 2031 के लिए 21,000 करोड़ रुपये और 7.71% GS 2066 के लिए 11,000 करोड़ रुपये की नीलामी द्वारा कुल 32,000 करोड़ रुपये जुटाए।
- 6.36% GS 2031 प्रतिभूति का कट-ऑफ मूल्य 99.43 रुपये तथा प्रतिफल 6.5006%, 7.71% GS 2066 का कट-ऑफ मूल्य 100.93 रुपये और प्रतिफल 7.6345% रहा।
- दोनों निर्गमों के लिए प्राथमिक डीलरों ने पूरी अंडरराइटिंग स्वीकार की और नीलामी में पर्याप्त बाजार मांग दिखाई दी; कोई डिवॉल्वमेंट नहीं हुआ।
नीलामी परिणाम और मूल्य निर्धारण
RBI की प्रेस विज्ञप्ति 2026-2027/442 के अनुसार, 6.36% GS 2031 के लिए 21,000 करोड़ रुपये और 7.71% GS 2066 के लिए 11,000 करोड़ रुपये की अधिसूचित राशि तय की गई। 2031 प्रतिभूति के लिए 260 प्रतिस्पर्धी बोलियों में 54,660 करोड़ रुपये और 2066 प्रतिभूति के लिए 200 प्रतिस्पर्धी बोलियों में 27,177 करोड़ रुपये की मांग प्राप्त हुई।6.36% GS 2031 के लिए कट-ऑफ मूल्य 99.43 रुपये रहा, जिस पर प्रतिफल 6.5006% है। 7.71% GS 2066 के लिए कट-ऑफ मूल्य 100.93 रुपये और प्रतिफल 7.6345% रहा।
स्वीकृत प्रतिस्पर्धी बोलियों की राशि 2031 प्रतिभूति में 20,983.052 करोड़ रुपये और 2066 प्रतिभूति में 10,964.757 करोड़ रुपये रही। आंशिक आवंटन प्रतिशत क्रमशः 66.0555% और 92.7605% रहा, जबकि भारित औसत प्रतिफल 2031 प्रतिभूति में 6.4905% और 2066 प्रतिभूति में 7.6273% दर्ज किया गया।
बाजार मांग और प्राथमिक डीलरों की भूमिका
गैर-प्रतिस्पर्धी श्रेणी में दोनों प्रतिभूतियों के लिए 7-7 बोलियां प्राप्त हुईं। स्वीकृत गैर-प्रतिस्पर्धी राशि 6.36% GS 2031 के लिए 16.948 करोड़ रुपये और 7.71% GS 2066 के लिए 35.243 करोड़ रुपये रही।अंडरराइटिंग के तहत दोनों निर्गमों के लिए अधिसूचित राशि क्रमशः 21,000 करोड़ रुपये और 11,000 करोड़ रुपये रही, और प्राथमिक डीलरों से पूरी अंडरराइटिंग स्वीकार की गई। प्राथमिक डीलरों पर कोई डिवॉल्वमेंट नहीं हुआ, जिससे संकेत मिलता है कि नीलामी को बाजार से पर्याप्त समर्थन मिला।
मोदी सरकार के 12 साल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे लंबे निरंतर कार्यकाल की पृष्ठभूमि पर हमारी पिछली रिपोर्ट में आर्थिक सुधारों, बुनियादी ढांचा विस्तार और डिजिटल भुगतान (UPI) जैसी उपलब्धियों के साथ नीति-निर्णयों की व्यापक तस्वीर रखी गई थी। उसी संदर्भ में हमने भारत के RCEP से बाहर रहने के फैसले पर सरकार के तर्क—घरेलू विनिर्माण, MSME व किसानों पर दबाव और व्यापार घाटे के जोखिम—और Press Note 3/2 के जरिए सीमा-साझा देशों से निवेश की कड़ी जांच/सीमित ढील के संकेतों को भी रेखांकित किया था।
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