RBI ने Mogaveera Co-operative Bank पर निकासी सीमा के साथ परिचालन प्रतिबंध लगाए

RBI ने Mogaveera Co-operative Bank पर निकासी सीमा के साथ परिचालन प्रतिबंध लगाए
Mogaveera बैंक पर सख्ती

मुंबई स्थित Mogaveera Co-operative Bank पर 12 जून 2026 के कारोबार बंद होने के बाद से कड़े नियामकीय प्रतिबंध लागू होते हैं। इन निर्देशों के तहत बैंक बिना RBI की पूर्व लिखित मंजूरी के नए ऋण, नई जमा स्वीकृति, निवेश और संपत्ति हस्तांतरण जैसे कई काम नहीं कर सकता, जबकि जमाकर्ताओं के लिए निकासी सीमा 1 लाख रुपये तय की गई है।

हाइलाइट्स

  • RBI ने 12 जून 2026 से Mogaveera Co-operative Bank पर छह महीने के लिए निकासी सीमा समेत कई परिचालन प्रतिबंध लगाए।
  • प्रतिबंधित अवधि में खाताधारक केवल 1,00,000 रुपये तक की निकासी कर सकते हैं जबकि 5,00,000 रुपये तक की जमा बीमा DICGC के तहत उपलब्ध है।
  • RBI ने स्पष्ट किया कि यह लाइसेंस रद्दीकरण नहीं है, बैंक सीमित प्रतिबंधों के भीतर संचालन जारी रखेगा और स्थिति की समीक्षा होती रहेगी।

RBI निर्देश और तात्कालिक प्रतिबंध

Reserve Bank of India की 11 जून 2026 की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, Banking Regulation Act, 1949 की धारा 35A को धारा 56 के साथ पढ़ते हुए Mogaveera Co-operative Bank Ltd., Bombay को विशेष निर्देश जारी किए गए हैं। ये निर्देश 12 जून 2026 के कारोबार बंद होने के बाद से प्रभावी होते हैं और छह महीने तक लागू रहते हैं, हालांकि इनकी समीक्षा की जा सकती है।

इन प्रतिबंधों के तहत बैंक RBI की पूर्व लिखित मंजूरी के बिना कोई नया ऋण या अग्रिम नहीं दे सकता, मौजूदा ऋण का नवीनीकरण नहीं कर सकता, कोई निवेश नहीं कर सकता, नई देनदारी नहीं ले सकता और नई जमा स्वीकार नहीं कर सकता। बैंक अपने दायित्वों के निर्वहन में भुगतान करने, समझौता करने, या अपनी संपत्तियां बेचने, हस्तांतरित करने अथवा अन्य तरीके से निपटाने जैसे कदम भी निर्देशों में दी गई शर्तों के अलावा नहीं उठा सकता।

RBI ने बैंक की मौजूदा तरलता स्थिति को देखते हुए जमाकर्ताओं को बचत, चालू या किसी अन्य खाते से अधिकतम 1,00,000 रुपये तक निकासी की अनुमति देने को कहा है। निर्देशों में तय शर्तों के अधीन बैंक को जमा के विरुद्ध ऋण समायोजित करने की छूट भी दी गई है, जबकि कर्मचारियों के वेतन, किराया और बिजली बिल जैसे आवश्यक मदों पर खर्च की अनुमति बनी रहती है।

जमाकर्ताओं पर असर और नियामकीय निगरानी

केंद्रीय बैंक का कहना है कि वह बैंक के बोर्ड और वरिष्ठ प्रबंधन के साथ उसके कामकाज में सुधार के लिए लगातार जुड़ा रहा है। फिर भी पर्यवेक्षी चिंताओं को दूर करने और जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा के लिए ठोस प्रयासों की कमी के कारण ये निर्देश जारी करना आवश्यक हो गया।

पात्र जमाकर्ता DICGC Act, 1961 के तहत, आवश्यक सहमति और सत्यापन के बाद, 5,00,000 रुपये तक की जमा बीमा दावा राशि पाने के हकदार होंगे। अधिक जानकारी के लिए जमाकर्ता बैंक अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं, और संबंधित विवरण DICGC की वेबसाइट पर भी उपलब्ध हैं।

RBI ने स्पष्ट किया है कि इन निर्देशों को बैंकिंग लाइसेंस रद्द करने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। बैंक अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार होने तक इन्हीं प्रतिबंधों के भीतर बैंकिंग कारोबार जारी रखता है, और RBI आगे भी स्थिति की निगरानी करते हुए जमाकर्ताओं के हित में आवश्यक होने पर निर्देशों में बदलाव या अन्य कदम उठाता है।

विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ाने के लिए सरकार और आरबीआई के उपायों पर हमारी पिछली रिपोर्ट में बताया गया था कि रुपये पर दबाव और विदेशी पोर्टफोलियो निकासी के बीच सरकारी बॉन्ड पर एफपीआई के लिए कर राहत, Fully Accessible Route का विस्तार और विदेशी मुद्रा तरलता बढ़ाने के कदम उठाए गए। उस लेख में यह भी रेखांकित किया गया था कि FCNR(B) जमा और फॉरेक्स स्वैप विंडो जैसे प्रावधानों से भुगतान संतुलन तथा बैंकिंग फंडिंग दबाव कुछ हद तक कम हो सकता है, हालांकि इसे पूर्ण समाधान नहीं माना गया।

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